मठ महाकाल परिवार के सौजन्य से पारंपरिक गरबा की मनमोहक प्रस्तुति, पारिवारिक माहौल में गूंजे भक्ति और संस्कृति के स्वर

मठ महाकाल परिवार के सौजन्य से आयोजित पारंपरिक गरबा नवरात्रि के अवसर पर भक्तिमय और सांस्कृतिक वातावरण में धूमधाम से संपन्न हो रहा है। इस गरबे की सबसे बड़ी खासियत इसका पारिवारिक माहौल और लोकसंगीत की मधुर ध्वनियाँ हैं, जिसने शहरवासियों को मोह लिया है।

🌸 गरबे की सांस्कृतिक धूम

(अशोक सोनी)

सिवनी (साई)। मठ महाकाल परिवार द्वारा आयोजित पारंपरिक गरबा इस बार शहरवासियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह आयोजन पूरी तरह से पारिवारिक और सांस्कृतिक माहौल में हो रहा है, जहां सभी आयु वर्ग के लोग भक्ति और उल्लास के साथ गरबा में शामिल हो रहे हैं।

🎶 लोकसंगीत और भक्ति रस का संगम

गरबे की खासियत यह है कि इसमें केवल आधुनिक संगीत नहीं, बल्कि पारंपरिक ढोल,मंजीरे और शंख की गूंज सुनाई देती है। जय अम्बे गौरी”, “गरबा री रास” जैसे भक्ति गीतों के साथ जब माताजी की आराधना होती है तो पूरा माहौल श्रद्धा और ऊर्जा से भर जाता है।

👨‍👩‍👧 पारिवारिक माहौल की अनोखी छटा

आमतौर पर गरबा आयोजनों में प्रतियोगिता और आधुनिकता का रंग अधिक दिखता है, लेकिन मठ महाकाल परिवार का गरबा अपनी पारिवारिक गरिमा और आत्मीय वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी साथ मिलकर गरबा करते हैं। यह आयोजन परिवारों को एक सूत्र में बांधने और समाज को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

🪔 नवरात्रि और गरबे का आध्यात्मिक महत्व

नवरात्रि केवल देवी की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह साधना,भक्ति और शक्ति का उत्सव है। गरबा, माता की आराधना का एक प्रमुख रूप है। इसमें दिया (प्रदीप) को माता की शक्ति का प्रतीक माना जाता है और उसके चारों ओर परिक्रमा करते हुए भक्त शक्ति,ऊर्जा और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

🏛️ मठ महाकाल परिवार की भूमिका

मठ महाकाल परिवार पिछले कई वर्षों से उज्जैन में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करता आ रहा है। इस वर्ष भी उन्होंने नवरात्रि को आध्यात्मिकता और संस्कृति का संगम बनाने के लिए पारंपरिक गरबे की शुरुआत की। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और समाज में सामूहिकता की भावना को बढ़ाने का काम करते हैं।

💃 परिधान और पारंपरिक सजावट

गरबा आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए प्रतिभागियों ने पारंपरिक चनिया-चोली और केडियू-धोती पहन रखी है। रंग-बिरंगे परिधान और चमचमाती सजावट से वातावरण और भी भव्य बन गया है। आयोजन स्थल को दीपों,रंगोली और फूलों से सजाया गया, जिससे ऐसा लगता है मानो नवरात्रि के दौरान साक्षात् माता दुर्गा यहां विराजमान हों।

🌟 युवा और बच्चों की सहभागिता

इस आयोजन की एक और विशेषता यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। छोटे बच्चे जहां माता के भजन गाकर माहौल को भक्ति से भर रहे थे, वहीं युवा पारंपरिक ढोल की थाप पर गरबे की लय में थिरकते नजर आए।

📸 सोशल मीडिया पर चर्चा

गरबे के दौरान खींची गई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। लोग #MahakalGarba और #TraditionalGarba जैसे हैशटैग के साथ फोटो शेयर कर रहे हैं। इस आयोजन ने न केवल शहरवासियों को प्रभावित किया है बल्कि देशभर में गरबा प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है।

🙏 समाज में एकता का संदेश

मठ महाकाल परिवार का यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इसमें सभी वर्गों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल होते हैं। इसने यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कृति समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।

✅ निष्कर्ष

मठ महाकाल परिवार द्वारा आयोजित यह पारंपरिक गरबा केवल एक नृत्य आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति,संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। पारिवारिक माहौल, भक्ति गीतों की गूंज और पारंपरिक सजावट ने इस आयोजन को अद्वितीय बना दिया।
यह कहना गलत नहीं होगा कि उज्जैन के इस गरबे ने लोगों को केवल नवरात्रि का आनंद ही नहीं दिया, बल्कि संस्कृति और परिवारिक मूल्यों के महत्व को भी पुनर्जीवित किया