जानिए, क्या महिलाएं भी तर्पण अथवा पिण्डदान करने की हैं अधिकारी!

इसका भावार्थ है कि सबसे बड़े अथवा सबसे छोटे बेटे या बेटी के अभाव में पत्नी या बहू द्वारा भी श्राद्ध किया जा सकता है। लेकिन पत्नी जीवित नहीं हो तो सगा भाई, भतीजा, भांजा भी श्राद्ध कर सकता है। वहीं इनमें से कोई भी नहीं हो तो किसी शिष्य, मित्र या रिश्तेदार द्वारा भी श्राद्ध किया जा सकता है। गरुड़ पुराण के इस श्लोक से यह स्पष्ट होता है कि, महिलाओं के पास भी श्राद्ध या पिंडदान करने का अधिकार है। लेकिन इसके लिए कुछ विशेष परिस्थितियां भी बताई गई हैं। लेकिन तर्पण या श्राद्ध के लिए पहले पुरुष को ही वरीयता दी जाती है।

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