गाँव के मोहल्ले में आज फिर हँसी का तांडव देखने को मिला। मुन्ना रो रहा था और पति-पत्नी दोनों उलझे हुए थे कि इसे कैसे शांत किया जाए।
संवाद1 (पति-पत्नी):
- पति: “मुन्ना रो रहा है। उसे चुप करा दो।”
- पत्नी: “तुम ही चुप करा दो। मैं इसे दहेज में नहीं लाई थी।”
- पति: “तो मैं भी इसे बारात में नहीं ले गया था।”
सभी लोग इस जवाब पर हँसी से लोटपोट हो गए।
हास्य के पलों में:
- दोस्त-दोस्त संवाद:
- दोस्त 1: “मुन्ना रो रहा है, लेकिन असली रोना तो पति-पत्नी का है!”
- दोस्त 2: “हाँ, हँसी रोक पाना मुश्किल है!”
- बच्चा: “अंकल, दहेज में मुन्ना नहीं आया, फिर भी रो रहा है!”
- अंकल: “बेटा, रोना भी एक कला है।”
हास्य जोड़ने के लिए बुलेट पॉइंट्स:
- पति-पत्नी का तर्क = हँसी का बवंडर।
- मुन्ना का रोना = गाँव की सबसे बड़ी मनोरंजन घटना।
- बारात और दहेज = हँसी का मसाला।
- मोहल्ले वाले = दर्शक, जो हँसी से लोटपोट।
संवाद2 (टीचर-स्टूडेंट शैली):
- टीचर: “बच्चा, बताओ दहेज क्या होता है?”
- बच्चा: “मैम, हँसी और तर्क से भरा एक पैकेज!”
Conclusion /निष्कर्ष:
मुन्ना का रोना और पति-पत्नी की बातों ने हँसी का तांडव मचा दिया।
- पंचलाइन 1: “मुन्ना रोया, लेकिन मोहल्ला हँसा!”
- पंचलाइन 2: “दहेज में न आया, पर हँसी में जरूर आया!”
साई फीचर्स के इस फनी जोक ने साबित किया कि पति-पत्नी की छोटी-छोटी नोकझोंक भी हँसी के बवंडर का कारण बन सकती है।
पति- मुन्ना रो रहा है। उसे चुप करा दो।
पत्नी- तुम ही चुप करा दो। मैं इसे दहेज में नहीं लाई थी।
पति- तो मैं भी इसे बारात में नहीं ले गया था।
(साई फीचर्स)

लगभग 20 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। दैनिक हिन्द गजट के संपादक हैं, एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए लेखन का कार्य करते हैं . . .
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