एक टोपी बेचने वाला दोपहर तक टोपियाँ बेचते-बेचते थक गया। उसने सोचा, “चलो पेड़ के नीचे थोड़ा आराम कर लेते हैं।”
संवाद1 (टोपी वाला-बंदर):
- टोपी वाला पेड़ के नीचे लेटा ही था कि दो-तीन बंदर आ गए।
- बंदरों ने उसकी सारी टोपी उठा ली।
टोपी वाले को अपनी दादा जी की कहानी याद आ गई।
- उसने तुरंत अपनी एक टोपी उठाई और जमीन पर फेंक दी।
संवाद2 (बंदर-टोपी वाला):
- तभी पेड़ से एक बंदर नीचे उतरकर आया और टोपी वाला की एक और टोपी फटाक से उठा लिया।
- बंदर पेड़ पर चढ़ते हुए बोला:
“अबे साले! तू क्या सोचता है कि सिर्फ तेरे ही दादा ने कहानी सुनाई थी? हमारे दादा भी गूंगे थे!”
हास्य के पलों में:
- दोस्त-दोस्त संवाद:
- दोस्त 1: “भाई, बंदर भी कहानी सुनते हैं अब?”
- दोस्त 2: “हाँ, और अपनी टोपी भी वापस नहीं करते!”
- बच्चा: “अंकल, बंदर ने टोपी कैसे चुराई?”
- अंकल: “बेटा, फनी जोक्स का नियम है – बंदर हमेशा चालाक होते हैं!”
हास्य जोड़ने के लिए बुलेट पॉइंट्स:
- पेड़ = आराम और हँसी का ठिकाना।
- टोपी = मजेदार झगड़े का कारण।
- बंदर = हँसी का मसाला।
- दादा की कहानी = ट्विस्ट और फनी मोड़।
संवाद3 (टीचर-स्टूडेंट शैली):
- टीचर: “अगर बंदर आपकी टोपी लेकर भाग जाए तो?”
- स्टूडेंट: “टीचर, फटाक से हँसी का धमाका!”
Conclusion /निष्कर्ष:
टोपी वाले और बंदरों की यह कहानी दिखाती है कि थोड़ी सी शरारत भी हँसी का बड़ा कारण बन सकती है।
- पंचलाइन 1: “टोपी फेंकी, बंदर फटाक से उठा लिया, हँसी का धमाका!”
- पंचलाइन 2: “दादा की कहानी याद आई, और बंदर ने हँसी फैला दी!”
साई फीचर्स के इस फनी जोक ने यह साबित किया कि बंदर और इंसान की नोंकझोंक भी हँसी का सबसे मजेदार कारण बन सकती है।
एक टोपी बेचने वाला दोपहर तक टोपिया बेचने के बाद थकान के मारे एक पेड़ के नीचे जाके लेट गया,
इतने में दो- तीन बंदर आये और उसकी टोपी उठा के ले गए,
टोपी वाले को अपने दादा जी की एक कहानी याद आ गयी तो उसने अपनी एक टोपी उठा केर जमीन पैर फेंक दी
तभी पेड़ से एक बन्दर नीचे उतर के आया और टोपी वाले की एक और टोपी फटाक से उठा के ले गया और पेड़ पर चढके टोपी वाले को जीब चिडाते हुए बोल,अबे साले तू क्या सोचता हे सिर्फ तेरे ही दादा ने तुझे कहानी सुनाई थी और हमारे दादा गूंगे थे
(साई फीचर्स)

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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