चिंटू के दादा और दादी ने फैसला किया कि आज वे अपने पुराने दिन याद करेंगे। दादा जी गुलाब का फूल लेकर उसी पार्क में पहुँच गए, जहाँ वे अपनी जवानी में मिलते थे।
संवाद1 (दादा-दादी):
- दादा जी (पार्क में बैठे हुए): “अरे, आज तो दादी आ ही जाएंगी।”
- पैर में दर्द हो रहा था, पर उन्होंने परवाह नहीं की।
दादा जी कई देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन दादी नहीं आई।
संवाद2 (घर लौटते हुए दादा):
- दादा जी (गुस्से में): “अरे, मैं वहाँ पूल पे पागलों की तरह तुम्हारा इंतजार करता रहा और तुम यहाँ घर में स्वेटर बुन रही हो!”
- दादी (शरमाते हुए): “अरे, मैं कैसे आती, मम्मी ने मुझे जाने ही नहीं दिया।”
हास्य के पलों में:
- दोस्त-दोस्त संवाद:
- दोस्त 1: “भाई, दादा का इंतजार और दादी का स्वेटर, क्या कॉम्बिनेशन है!”
- दोस्त 2: “अरे, यही तो फनी जोक्स का मजा है!”
- बच्चा: “अंकल, दादा परेशान क्यों हुए?”
- अंकल: “बेटा, प्रेम और हँसी दोनों एक साथ हैं!”
हास्य जोड़ने के लिए बुलेट पॉइंट्स:
- पार्क = यादों की जगह और हँसी का मैदान।
- गुलाब का फूल = रोमांस और मजेदार प्रतीक।
- स्वेटर बुनना = दादी की मजेदार शरारत।
- दादा का इंतजार = हँसी का कारण।
संवाद3 (पति-पत्नी शैली):
- पत्नी: “अगर मैं घर पर स्वेटर बुन रही हूँ और आप पार्क में इंतजार कर रहे हैं?”
- पति: “तो हँसी का धमाका तय है!”
Conclusion /निष्कर्ष:
दादा और दादी की यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी रोमांस और हँसी घर और पार्क में दोनों जगह मिल सकते हैं।
- पंचलाइन 1: “दादा का इंतजार, दादी का स्वेटर – हँसी का परफेक्ट कॉम्बिनेशन!”
- पंचलाइन 2: “गुलाब फेंकने का इरादा और स्वेटर बुनने का नतीजा = फनी जोक्स!”
साई फीचर्स के इस फनी जोक ने यह साबित किया कि उम्र सिर्फ संख्या है, हँसी और शरारत कभी कम नहीं होती।
एक बार चिंटू के दादा और दादी ने तय किया की वो अपने पुराने दिन वापस लायेंगे
तो दादा जी गुलाब का फूल लेके उसी पार्क में एक पूल पे पहुँच गए जिस पार्क में वो और दादी जी अपनी जवानी के दिनों में मिला करते थे,
वह तक पहुँचते -पहुँचते दादा जी के पेरो में बुरी तरह दर्द हो गया पैर उन्होंने परवाह नहीं की
वो वह कई देर तक दादी का इंतजार करते रहे पैर दादी नहीं आई,
निराश होक डैड जी घर को आये और गुस्से में दादी जी से बोले
अरे में वहाँ उस पूल पे पागलो की तरह तुम्हारा इंतजार करता रहा और तुम यहाँ घर में बेठी स्वेटर बुन रही हो
दादी (शरमाते हुए ) : अरे में केसे आती मम्मी ने मुझे आने ही नहीं दिया
(साई फीचर्स)

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं.
अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.





