देसी कॉमेडी की असली जान तब निकलकर आती है, जब गंभीर जगहों पर भी हल्की-फुल्की अक्ल अपना कमाल दिखा दे।
थाना वैसे ही सख्त माहौल के लिए जाना जाता है, लेकिन जब वहां देसी लॉजिक घुस जाए, तो हँसी रोकना मुश्किल हो जाता है।
एक बार थानेदार ने बड़े रौब से कहा—
“चोरों के कब्जे से हमने काफी सामान बरामद किया है। क्या आप इनमें से अपना सामान पहचान सकते हैं?”
भीड़ में खड़ा एक आदमी तुरंत बोला—
“क्यों नहीं! वह जो कोने में रुमाल पड़ा है,वह मेरा है। उस पर‘बी’लिखा है।”
थानेदार ने गंभीर आवाज़ में कहा—
“यह कोई सबूत नहीं हुआ। मेरे पास भी एक रुमाल है,जिस पर‘बी’लिखा है।”
आदमी बिल्कुल शांत स्वर में बोला—
“माफ कीजिएगा साहब,मेरे दो रुमाल चोरी हुए थे।”
बस, थाने का माहौल अचानक कोर्ट रूम से कॉमेडी क्लब बन गया। 😄
देसी दिमाग की खासियत यही है—
जहाँ तर्क खत्म होता है, वहीं नया तर्क पैदा हो जाता है।
ऐसी ही देसी अक्ल रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी देखने को मिलती है—
पति-पत्नी जोक:
पत्नी: ये रुमाल तुम्हारा कैसे हुआ?
पति: क्योंकि इस पर दाग मेरी मेहनत के हैं।
दोस्त-दोस्त जोक:
दोस्त1: पहचान कैसे करेगा अपना सामान?
दोस्त2: भाई, भावनात्मक जुड़ाव से।
टीचर-स्टूडेंट जोक:
टीचर: ये होमवर्क तुम्हारा कैसे है?
स्टूडेंट: मैडम, गलती मेरी सिग्नेचर जैसी है।
बॉस-कर्मचारी जोक:
बॉस: ये फाइल तुम्हारी कैसे हुई?
कर्मचारी: सर, इसमें गलतियाँ सिर्फ मेरी हैं।
देसी लॉजिक वाले मामलों की कुछ खास बातें—
- सबूत से ज़्यादा आत्मविश्वास
- तर्क से ज़्यादा तुरंत जवाब
- गलती में भी कॉमेडी
- हर परेशानी में जुगाड़
यही वजह है कि ऐसे जोक्स हर उम्र के लोगों को पसंद आते हैं।
न भाषा की सीमा, न जगह की—बस सीधी हँसी।
- Conclusion (निष्कर्ष)
आखिर में यही कहा जा सकता है कि देसी दिमाग जब थाने पहुँचे, तो केस भी हँसते-हँसते सुलझ जाता है।
और याद रखिए—
जहाँ लॉजिक फेल हो जाए,वहाँ देसी जवाब काम कर जाता है!😂
थानेदार ने कहा- चोरों के कब्जे से हमने काफी सामान बरामद किया है।
क्या आप इन चीजों में से अपना सामान पहचान सकते हैं?
क्यों नहीं,वह जो कोने में रुमाल पड़ा है,वह मेरा है। उस पर बी लिखा है।
यह कोई सबूत न हुआ। मेरे पास भी एक रुमाल है जिस पर बी लिखा है।
माफ कीजिएगा,मेरे2 रुमाल चोरी हुए थे।
(साई फीचर्स)

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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