बस सड़क पर जाएगी और बच्चे वहां जहां स्कूल न हो! हंसी की पूरी क्लास तैयार

बस में बैठा यात्री, मासूम सा सवाल और कंडक्टर का करारा जवाब—हंसी अपने आप निकल जाती है। वहीं शिक्षक और बच्चों की बातचीत स्कूल से भागने की बचपन वाली ख्वाहिश याद दिला देती है। यह लेख रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ऐसे मजेदार किस्सों का गुलदस्ता है, जो चेहरे पर मुस्कान ले आएगा।

सुबह-सुबह बस स्टैंड पर एक यात्री कंडक्टर के पास आया। चेहरे पर वही आम भारतीय यात्री वाली मासूमियत थी।
यात्री ने पूछा,
“भाई साहब, यह बस कहां जाएगी?”

कंडक्टर ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया,
“सड़क पर!”

यात्री कुछ सेकेंड तक सोचता रहा… फिर समझ आया कि सवाल गलत जगह पूछ लिया है।
बस में बैठे लोग मुस्कुराने लगे, और किसी ने धीरे से कहा—
“भैया, किराया दे दो, ज्ञान मुफ्त में मिल रहा है।”

उधर उसी बस में एक शिक्षक भी बैठे थे। शायद छुट्टी के दिन थे, वरना बच्चों की आवाज सुनते ही पहचान लेते।
उन्होंने आसपास बैठे बच्चों से पूछा,
“तुम बड़े होकर कहां जाना पसंद करोगे?”

बच्चों ने बिना सोचे-समझे एक सुर में जवाब दिया,
“जहां स्कूल न हो!”

टीचर ने गहरी सांस ली,
और मन ही मन सोचा—
काश,ऐसी जगह का पता मुझे पहले मिल गया होता।

😂 अब कुछ और रोजमर्रा के ठहाके

पति-पत्नी जोक

पति: तुम मुझसे नाराज क्यों हो?
पत्नी: क्योंकि तुम मुझे समझते नहीं।
पति: तो समझाओ ना!
पत्नी: छोड़ो… अब तुम समझने लायक नहीं रहे।

दोस्त-दोस्त जोक

दोस्त: यार, पढ़ाई कैसी चल रही है?
दूसरा दोस्त: बढ़िया!
दोस्त: सच में?
दूसरा दोस्त: हां, किताब रोज खुलती है…
दोस्त: फिर?
दूसरा दोस्त: मोबाइल रखने के लिए!

टीचर-स्टूडेंट जोक

टीचर: बताओ, स्कूल क्यों आते हो?
स्टूडेंट: सर, मजबूरी है।
टीचर: कैसी मजबूरी?
स्टूडेंट: घर वाले रोज छोड़ जाते हैं।

बॉस-कर्मचारी जोक

बॉस: तुम समय पर ऑफिस क्यों नहीं आते?
कर्मचारी: सर, ट्रैफिक बहुत होता है।
बॉस: रोज?
कर्मचारी: जी हां, खासकर मेरे घर से ऑफिस तक!

😄 हंसी बढ़ाने वाले छोटे बुलेट पॉइंट

  • बस का जवाब छोटा हो, तो सफर लंबा याद रहता है
  • बच्चों का सपना: ऐसी जगह जहां होमवर्क न हो
  • टीचर सवाल पूछे, बच्चे भविष्य बदल दें
  • स्कूल का नाम सुनते ही खुशी और छुट्टी एक साथ याद आती है

8️ Conclusion /निष्कर्ष

बस हो या स्कूल, सवाल सीधा हो तो जवाब भी सीधा—लेकिन हंसी तिरछी निकलती है।
यात्री-कंडक्टर और टीचर-बच्चों की यह मासूम नोकझोंक बताती है कि जिंदगी के असली जोक्स किताबों में नहीं, आसपास होते हैं।

आखिरी पंचलाइन:
“बच्चों से पूछो कहां जाना है—
जवाब मिलेगा, जहां स्कूल का बोर्ड भी न दिखे!” 😄

यात्री,यह बस कहां जाएगी?

कंडक्टर,सड़क पर!

वहां बैठे शिक्षक ने पूछा -‘तुम कहां जाना पसंद करोगे?‘

बच्चे बोले: ‘जहां स्कूल न हो . . .!‘

(साई फीचर्स)