देसी कॉमेडी की खास बात यह है कि यहाँ दिमाग कम और आत्मविश्वास ज़्यादा चलता है।
सड़क हो या गली, देसी जुगाड़ हर जगह अपना कमाल दिखाता है।
एक दिन राहुल भैंस के ऊपर बैठकर बड़े शान से घूम रहा था।
ना हेलमेट, ना नंबर प्लेट, बस देसी स्टाइल में सवारी।
तभी रमेश ने टोका—
“तेरा चालान होगा!”
राहुल चौंका—
“क्यों?”
रमेश बोला—
“हेलमेट नहीं पहना है!”
राहुल मुस्कराया, नीचे इशारा किया और बोला—
“जरा नीचे देख…मैं फोर व्हीलर चला रहा हूँ!”
बस, वहीं से आसपास खड़े लोग हँसते-हँसते लोटपोट। 😄
देसी लॉजिक का कोई मुकाबला नहीं—जहाँ ज़रूरत हो, वहीं नियम बदल जाते हैं।
ऐसा ही देसी तर्क घर में भी चलता है—
पति-पत्नी जोक:
पत्नी: ये दूध क्यों गिर गया?
पति: क्योंकि भैंस फोर व्हीलर मोड में थी।
दो दोस्तों की बातचीत—
दोस्त-दोस्त जोक:
दोस्त1: हेलमेट क्यों नहीं पहनता?
दोस्त2: भाई, मेरा वाहन भावनाओं से चलता है।
स्कूल में मासूम दिमाग—
टीचर-स्टूडेंट जोक:
टीचर: स्कूल साइकिल से क्यों आया?
स्टूडेंट: मैडम, चार दोस्त थे… फोर व्हीलर समझ लीजिए।
ऑफिस का देसी सीन—
बॉस-कर्मचारी जोक:
बॉस: ये काम ऐसे क्यों किया?
कर्मचारी: सर, मैंने देसी शॉर्टकट लिया है, नियम खुद एडजस्ट हो गए।
देसी ट्रैफिक लॉजिक की खास बातें:
- नियम परिस्थिति के हिसाब से
- वाहन की पहचान सवारी से
- हेलमेट ज़रूरी, जब दिमाग चल रहा हो
- आत्मविश्वास हो तो भैंस भी फोर व्हीलर
ऐसे जोक्स इसलिए हिट होते हैं क्योंकि ये हर गली-मोहल्ले की कहानी लगते हैं।
जहाँ तर्क से ज़्यादा हँसी की वैल्यू होती है।
- Conclusion (निष्कर्ष)
निष्कर्ष यही है कि देसी दिमाग जब सड़क पर उतरता है, तो ट्रैफिक नियम खुद मुस्कुरा देते हैं।
और याद रखिए—
जहाँ आत्मविश्वास हो,वहाँ भैंस भी फोर व्हीलर बन जाती है!😂
राहुल भैंस के ऊपर बैठ कर घूम रहा था।
रमेश- तेरा चालान होगा।
राहुल- क्यों?
रमेश- हेलमेट नहीं पहना है इसीलिए!
राहुल- जरा,नीचे देख,मैं फोर वीलर चला रहा हूं।
(साई फीचर्स)

लगभग 20 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। दैनिक हिन्द गजट के संपादक हैं, एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए लेखन का कार्य करते हैं . . .
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