गिरा, बेहोश हुआ… होश आया तो बोला: “मैं तो अभी-अभी आया हूँ!” 😂

जब गिरने के बाद भी आदमी खुद को “नया आगंतुक” समझे, तब हँसी अपने आप निकल जाती है। यह लेख देसी तर्क, मासूम जवाब और रोज़मर्रा की कॉमेडी से भरपूर है। पढ़ते ही चेहरे पर मुस्कान और पेट में गुदगुदी तय है।

देसी कॉमेडी की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह बिना तैयारी के भी हँसा देती है।
कभी-कभी हालात इतने अजीब होते हैं कि जवाब खुद-ब-खुद मजेदार निकल जाता है।

एक दिन एक आदमी दूसरी मंजिल से नीचे गिर गया।
गिरते ही वह बेहोश हो गया और कुछ ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई।
पानी छिड़का गया, हवा की गई और थोड़ी देर बाद वह आदमी होश में आ गया।
भीड़ ने राहत की साँस ली और एक साथ पूछा—
क्या हुआ?”
आदमी ने चारों तरफ देखा, कपड़े झाड़े और बड़े आराम से बोला—
मुझे क्या पतामैं तो अभी-अभी आया हूँ!
बस फिर क्या था—लोगों की चिंता मिनटों में ठहाकों में बदल गई। 😄

यही तो देसी लॉजिक है—जब याद ही नहीं, तो जिम्मेदारी भी नहीं!

घर पहुँचते ही कहानी आगे बढ़ी—

पति-पत्नी जोक:
पत्नी: ये कपड़े कैसे फट गए?
पति: मुझे क्या पता, मैं तो अभी-अभी घर आया हूँ।

दोस्तों के बीच मज़ाक चालू—

दोस्त-दोस्त जोक:
दोस्त1: भाई, कल क्या हुआ था?
दोस्त2: कुछ नहीं यार, कहानी शुरू होने से पहले ही मैं पहुँच गया।

स्कूल की क्लास में भी यही तर्क—

टीचर-स्टूडेंट जोक:
टीचर: होमवर्क क्यों नहीं किया?
स्टूडेंट: सर, मैं तो आज ही इस क्लास में आया हूँ।

ऑफिस में देसी दिमाग—

बॉस-कर्मचारी जोक:
बॉस: ये फाइल किसने बिगाड़ी?
कर्मचारी: सर, जब मैं आया तब तो ऐसी ही थी।

ऐसे देसी जवाबों की कुछ खास बातें होती हैं:

  • जिम्मेदारी से सीधा इनकार
  • मासूमियत का पूरा उपयोग
  • तर्क कम, आत्मविश्वास ज़्यादा
  • और हँसी की फुल गारंटी

असल में, यही छोटी-छोटी बातें जिंदगी को हल्का बना देती हैं।
जहाँ परेशानी होनी चाहिए, वहाँ भी मुस्कान निकल आती है।

  1. Conclusion (निष्कर्ष)

निष्कर्ष यही है कि कभी-कभी जवाब सही नहीं, मजेदार होना चाहिए।
और याद रखिए—
अगर कुछ समझ न आए,तो आत्मविश्वास से कह दीजिए:
मुझे क्या पता,मैं तो अभी-अभी आया हूँ!😂

एक आदमी दूसरी मंजिल से गिरकर बेहोश हो गया।

जब होश में आया तो आसपास एकत्र भीड़ ने पूछा,क्या हुआ?

वह आदमी बोला- मुझे क्या पता,मैं तो अभी-अभी आया हूं।

(साई फीचर्स)