ठंड भी क्या चीज़ है—शादी के सामने फीकी पड़ ही जाती है!
सिवनी की गलियों में दिसंबर की ठिठुरती शाम थी। हवा इतनी तेज कि बोनट वाले भी काँप जाएँ! ऐसे में दो महिलाएँ बेहद स्टाइलिश अंदाज़ में सड़क पर चल रही थीं—साड़ी में ग्लिटर, पर्स में शाइन, और चाल में शादी वाला कॉन्फिडेंस।
ठंड से कांपते हुए एक समाजसेवी ने सोचा—
“अरे! बेचारे ठंड में परेशान हो रही होंगी… चलो कंबल दे ही देते हैं।”
और बस, यहीं से शुरू होता है मजेदार किस्सा।
आगे क्या हुआ—जोक्स की तरह हँसाने वाला जवाब
जैसे ही वो कंबल लेकर आगे बढ़ा और दोनों महिलाओं को देने की कोशिश की, तुरंत ही झटपट जवाब हवा में तीर की तरह चला—
“जाइए काम करिए अपना! हम गरीब नहीं हैं,
हम तो शादी में जा रहे हैं…!”
यह सुनकर सामने वाला कुछ सेकेंड के लिए ठंड भी भूल गया।
चेहरे पर मुस्कान और दिल में सवाल—
“ठंड ऐसा कौन झेलता है… सिर्फ शादी में जाने वाले!”
कहानी यहीं खत्म नहीं होती—
पीछे खड़े लोगों ने यह जवाब सुना और जोरदार ठहाके लगाकर माहौल गर्म कर दिया।
भारतीय शादियाँ—स्टाइल पहले,ठंड बाद में!
भारत में शादी हो और लोग ठिठुरें नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है?
- ठंड 10°C हो? कोई बात नहीं—साड़ी चमकदार होनी चाहिए।
- हवा चल रही हो?—चूड़ी की खनक सुनाई देनी चाहिए।
- कंबल की जरूरत पड़े?—लेकिन फैशन कम नहीं होना चाहिए।
शादी में चमक-दमक चाहे तापमान गिराकर माइनस में ले जाए, लेकिन लोग कहते हैं—
“फैशन को ठंड क्या बिगाड़ेगी!”
✅ Conclusion (निष्कर्ष)
इस मजेदार किस्से ने यह साफ कर दिया कि भारतीय शादी और ठंड का कॉम्बिनेशन हमेशा हँसी से भरपूर रहता है। दो महिलाओं का जवाब भले ही कड़क था, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़क थी उनकी शादी वाली तैयारी। ठंड चाहे जितनी बढ़ जाए, फैशन और आत्मविश्वास के सामने हार ही मान लेता है।
(साई फीचर्स)

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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