पं. दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानव दर्शन से समर्थ और आत्मनिर्भर भारत निर्माण की विचारधारा

पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति और समाज को एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के सिद्धांतों के माध्यम से नई दिशा दी। उनका चिंतन आज भी भारत के विकास मॉडल और नीतिगत निर्णयों में दिखाई देता है। केंद्र और राज्यों की कई विकास योजनाएं उनके विचारों से प्रेरित मानी जा रही हैं। समर्थ, आत्मनिर्भर और समरस भारत के निर्माण में उनके दर्शन की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है।

भारतीय राजनीति और राष्ट्र चिंतन में दीनदयाल उपाध्याय का योगदान

(डॉ. मोहन यादव )

भारत की वैचारिक राजनीति में पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ऐसे चिंतक के रूप में लिया जाता है जिन्होंने विकास को केवल आर्थिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखा बल्कि समाज, संस्कृति और मानव जीवन के संतुलित विकास का मार्ग प्रस्तुत किया। उनका जीवन राष्ट्र निर्माण की एक ऐसी विचारधारा का प्रतीक रहा, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को एक दूसरे से जोड़कर देखा गया।

पं. दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा और राष्ट्रधर्म की साधना माना। उनका स्पष्ट मत था कि भारत का विकास भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।

एकात्म मानव दर्शन: भारतीय चिंतन का आधुनिक रूप

पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानव दर्शन भारतीय दर्शन और आधुनिक विकास सोच का समन्वित स्वरूप माना जाता है। इस दर्शन का मूल उद्देश्य व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना है।

इस दर्शन की मुख्य विशेषताएं:

  • व्यक्ति और समाज का संतुलित विकास
  • आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समरसता
  • सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण
  • आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश
  • प्रकृति और मानव जीवन का संतुलन

यह दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को आधुनिक वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करता है।

चतुर्पुरुषार्थ आधारित विकास मॉडल

पं. दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि समाज और राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों का संतुलन बना रहे।

उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक विकास समाज को पूर्णता नहीं दे सकता। इसके साथ नैतिकता, सामाजिक न्याय और आध्यात्मिक संतुलन आवश्यक है।

अंत्योदय सिद्धांत: अंतिम व्यक्ति तक विकास

उनकी विचारधारा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अंत्योदय रहा, जिसका अर्थ है — समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना।

अंत्योदय सिद्धांत के मुख्य बिंदु:

  • गरीब और वंचित वर्ग का उत्थान
  • ग्रामीण विकास को प्राथमिकता
  • सामाजिक समानता
  • अवसरों की समान उपलब्धता

आज कई सरकारी योजनाओं में अंत्योदय की अवधारणा को नीति स्तर पर अपनाया गया है।

वर्तमान भारत की विकास नीतियों में विचारधारा की झलक

वर्तमान समय में भारत के विकास मॉडल में आत्मनिर्भरता, स्थानीय उत्पादन, समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इन प्रमुख पहलुओं को देखा जा सकता है:

  • आत्मनिर्भर भारत मिशन
  • वोकल फॉर लोकल अभियान
  • सबका साथ, सबका विकास दृष्टिकोण
  • ग्रामीण और कृषि विकास पर जोर

विश्लेषकों के अनुसार ये नीतियां एकात्म मानव दर्शन की आधुनिक व्याख्या के रूप में देखी जाती हैं।

मध्यप्रदेश में विकास मॉडल और नीति दिशा

प्रदेश स्तर पर विकास योजनाओं को स्थानीय क्षमता और संसाधनों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्य में कई स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं:

  • क्षेत्रीय औद्योगिक विकास
  • निवेश आकर्षण कार्यक्रम
  • स्थानीय उद्योगों को वैश्विक मंच से जोड़ना
  • कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना

औद्योगिक निवेश और वैश्विक साझेदारी के प्रयासों के माध्यम से राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

कृषि आधारित समग्र विकास की अवधारणा

पं. दीनदयाल उपाध्याय कृषि को भारत की अर्थव्यवस्था की आधारशिला मानते थे। उनका मानना था कि यदि कृषि मजबूत होगी तो उद्योग, व्यापार और समाज सभी मजबूत होंगे।

कृषि विकास के प्रमुख आयाम:

  • आधुनिक तकनीक का उपयोग
  • सिंचाई विस्तार
  • बेहतर बीज और अनुसंधान
  • भंडारण और बाजार व्यवस्था सुधार

विशेषज्ञों के अनुसार कृषि सुदृढ़ होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

सिंचाई और कृषि अवसंरचना विस्तार प्रयास

राज्य स्तर पर कई सिंचाई परियोजनाओं और जल संसाधन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

संभावित प्रभाव:

  • कृषि उत्पादन में वृद्धि
  • किसानों की आय में सुधार
  • ग्रामीण क्षेत्र में स्थिरता
  • खाद्य सुरक्षा मजबूत होना

अनुसंधान और कृषि नवाचार की दिशा

फसल अनुसंधान केंद्रों और कृषि तकनीक के विस्तार से उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

इन प्रयासों से:

  • पोषण सुरक्षा मजबूत होगी
  • किसानों की लागत घटेगी
  • उत्पादकता बढ़ेगी

सामाजिक प्रभाव और जन प्रतिक्रिया

सामाजिक स्तर पर विकास योजनाओं के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, लेकिन कुछ चिंताएं भी सामने आती हैं:

सकारात्मक पक्ष:

  • रोजगार अवसर बढ़ना
  • ग्रामीण विकास
  • आधारभूत संरचना सुधार

चिंताएं:

  • योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच
  • पारदर्शिता और निगरानी

विशेषज्ञों की राय

नीति विश्लेषकों का मानना है कि यदि विकास मॉडल में सामाजिक समावेशन, आर्थिक अवसर और सांस्कृतिक संतुलन बना रहता है तो दीर्घकालीन विकास संभव है।

कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि:

  • विकास का मूल्यांकन केवल GDP से नहीं होना चाहिए
  • मानव विकास सूचकांक पर ध्यान आवश्यक
  • शिक्षा और स्वास्थ्य निवेश बढ़ाना जरूरी

भविष्य की संभावनाएं

भारत के विकास मॉडल में आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है:

  • तकनीक आधारित कृषि
  • हरित ऊर्जा
  • स्थानीय उद्योग सशक्तिकरण
  • ग्रामीण उद्यमिता
  • वैश्विक आर्थिक भागीदारी

2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को इसी समग्र विकास मॉडल से जोड़ा जा रहा है।

️⃣ CONCLUSION / निष्कर्ष

पं. दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन केवल एक राजनीतिक विचारधारा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की समग्र जीवन दृष्टि है। उनका अंत्योदय सिद्धांत आज भी नीति निर्माण और विकास योजनाओं के मूल में दिखाई देता है।

समरस, आत्मनिर्भर और मजबूत भारत के निर्माण के लिए संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश आवश्यक है। आने वाले समय में यदि विकास मॉडल में मानव केंद्रित दृष्टिकोण बना रहता है, तो भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत और संतुलित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है।

(लेखक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

(साई फीचर्स)