चतुर्थी श्राद्ध 2025: कब करें तर्पण और पिंडदान? जानिए 10 या 11 सितंबर की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

पितृ पक्ष में चतुर्थी श्राद्ध का विशेष महत्व है। यह श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका निधन चतुर्थी तिथि को हुआ हो। इस वर्ष 2025 में चतुर्थी श्राद्ध को लेकर 10 और 11 सितंबर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार सही तिथि, मुहूर्त और विधि जानें, ताकि पितरों को तर्पण और पिंडदान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।

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पितृ पक्ष में चतुर्थी श्राद्ध का विशेष महत्व है। यह श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका निधन चतुर्थी तिथि को हुआ हो। इस वर्ष 2025 में चतुर्थी श्राद्ध को लेकर 10 और 11 सितंबर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार सही तिथि, मुहूर्त और विधि जानें, ताकि पितरों को तर्पण और पिंडदान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।

चतुर्थी श्राद्ध 2025 की सही तारीख क्या है – 10 या 11 सितंबर? जानिए पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त, श्राद्ध की विधि, महत्व और पितृ पक्ष में चतुर्थी श्राद्ध का धार्मिक महत्व।

📅 चतुर्थी श्राद्ध की तिथि को लेकर भ्रम

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का विशेष समय है। यह भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है।
इस बार 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 6 सितंबर से हो चुकी है, लेकिन चतुर्थी श्राद्ध को लेकर 10 और 11 सितंबर के बीच संशय है।

पंचांग के अनुसार —

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 10सितंबर 2025,बुधवार दोपहर 3:37बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 11सितंबर 2025,गुरुवार दोपहर 12:45बजे

इसलिए चतुर्थी श्राद्ध 10सितंबर को करना ही श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि श्राद्ध कर्म दिन में ही किया जाता है।

पितर पक्ष अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी देवाधिदेव महादेव ब्रम्हाण्ड के राजा भगवान शिव एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी, मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, ओम नमः शिवाय, जय श्री कृष्ण, जय श्री राम, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।

🌿 चतुर्थी श्राद्ध का महत्व

चतुर्थी श्राद्ध, जिसे चौथ श्राद्ध भी कहा जाता है, उन पितरों के लिए होता है जिनका निधन किसी भी मास की शुक्ल या कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ हो।
इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के तेरहवें दिन के बाद आत्मा की यमपुरी की यात्रा आरंभ होती है, और इस दौरान भोजन-पानी की पूर्ति के लिए पिंडदान आवश्यक होता है।

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🕰 चतुर्थी श्राद्ध2025का शुभ मुहूर्त

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे – दोपहर 12:43 बजे
  • रौहिणी मुहूर्त: दोपहर 12:43 बजे – दोपहर 1:33 बजे
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:33 बजे – 4:02 बजे

इन समयावधियों में श्राद्ध करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

🙏 चतुर्थी श्राद्ध की विधि

  1. स्नान और शुद्धिकरण: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  2. पूजन स्थल तैयार करें: पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल छिड़कें।
  3. सामग्री अर्पण: गंगाजल, जौ, दूध, शहद, तुलसी जल, घी का दीप, धूप, गुलाब के फूल अर्पित करें।
  4. पितरों का आह्वान: देवी-देवताओं को जल अर्पण करने के बाद पितरों के नाम लेकर उनका स्मरण करें।
  5. तर्पण एवं पिंडदान: तिल और जौ के आटे से पिंड बनाकर जल में प्रवाहित करें।
  6. ब्राह्मण भोजन और दान: ब्राह्मणों को कढ़ी, भात, खीर, पूरी, सब्जी का भोग लगाएं और दान दें।
  7. पशु-पक्षियों को भोजन: भोजन को गाय, कौवा, कुत्ता और चीटियों को खिलाएं।

श्राद्ध में क्या न करें

  • मांसाहार, प्याज, लहसुन, बैंगन, मूली, काला नमक, मसूर दाल आदि वर्जित हैं।
  • शराब पीना, झूठ बोलना और कलह करना अशुभ है।
  • काले वस्त्र पहनना मना है।
  • मांगलिक कार्य, ब्याज का धंधा और अनुचित कर्म इस दिन नहीं करने चाहिए।

चतुर्थी श्राद्ध के लाभ

  • पितृ दोष से मुक्ति
  • घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि
  • जीवन में सफलता और मानसिक शांति
  • पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति

📌 पितृ पक्ष से जुड़ी खास बातें

  • मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो अमावस्या को श्राद्ध करें।
  • पितृ पक्ष में प्रतिदिन तर्पण करने से पितरों की कृपा बनी रहती है।
  • पितृ पक्ष में दान करना पुण्यकारी है।

🛑 महत्वपूर्ण अस्वीकरण

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है। इसे अंतिम सत्य न मानें। किसी भी निर्णय से पहले विद्वान पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

हरि ओम,

पितर पक्ष अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी देवाधिदेव महादेव ब्रम्हाण्ड के राजा भगवान शिव एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी, मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, ओम नमः शिवाय, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, जय श्री राम, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।

यहां बताए गए उपाय, लाभ, सलाह और कथन आदि सिर्फ मान्यता और जानकारियों पर आधारित हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि किसी भी मान्यता या जानकारी की समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा पुष्टि नहीं की जाती है। यहां दी गई जानकारी में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों, ज्योतिषियों, पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं, धर्मग्रंथों, दंत कथाओं, किंव दंतियों आदि से संग्रहित की गई हैं। आपसे अनुरोध है कि इस वीडियो या आलेख को अंतिम सत्य अथवा दावा ना मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया पूरी तरह से अंधविश्वास के खिलाफ है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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(साई फीचर्स)