(स्वाति खरे)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक और जनजातीय संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के बीच राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश दौरा विशेष महत्व लेकर सामने आया। गुरुवार को अपनी मध्यप्रदेश यात्रा के प्रथम दिन राष्ट्रपति ने एक ओर विश्व प्रसिद्ध ओंकारेश्वर तीर्थ और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल ममलेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर वैदिक विधि-विधान से अभिषेक किया, वहीं दूसरी ओर बैतूल में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय महिलाओं के कौशल, स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए नारी सशक्तिकरण को देश की प्रगति का आधार बताया।
यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल, महिला आर्थिक सशक्तिकरण और जनजातीय समुदाय के विकास की व्यापक सोच भी दिखाई दी।
ओंकारेश्वर तीर्थ में राष्ट्रपति ने किया भगवान शिव का पूजन
नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित ओंकारेश्वर तीर्थ देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने यहां पहुंचकर ओंकारेश्वर भगवान एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया।
मंदिर परिसर में प्रवेश के दौरान राष्ट्रपति ने सबसे पहले नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया।
पूजा-अर्चना के दौरान राष्ट्रपति ने देशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
राज्यपाल और जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत
ओंकारेश्वर पहुंचने पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। दर्शन एवं पूजन के पश्चात खंडवा जिले के कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया।
क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति को नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और ओंकारेश्वर तीर्थ का चित्र भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस महानिरीक्षक अनुराग सिंह सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैतूल में जनजातीय महिलाओं के उत्पादों को मिली राष्ट्रपति की सराहना
मध्यप्रदेश भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में भी शामिल हुईं। कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई विभिन्न प्रदर्शनियों और स्टॉलों का उन्होंने अवलोकन किया।
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक एवं पोषणयुक्त उत्पादों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
उन्होंने यह भी माना कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तब परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति की गति और अधिक तेज होगी।
श्रीअन्न उत्पादों के माध्यम से बढ़ रही महिलाओं की आय
बैतूल जिले की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं सतपुड़ांचल प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से श्रीअन्न आधारित विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इनमें रागी, कोदो, कुटकी, ज्वार और बाजरा जैसे पौष्टिक अनाजों से तैयार कुकीज, पास्ता, नूडल्स, इंस्टेंट इडली-डोसा मिक्स, दलिया और अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद शामिल हैं।
इन उत्पादों के निर्माण और विपणन से महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 175 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 2075 महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों में भाग लेकर प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं।
यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वोकल फॉर लोकल और लखपति दीदी अभियान को मिला प्रोत्साहन
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने वोकल फॉर लोकल और लखपति दीदी जैसी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों की भी सराहना की।
कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उईके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा अन्य अधिकारियों ने भी महिला समूहों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
पारंपरिक कला और वन उत्पादों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी के दौरान राष्ट्रपति ने भरेवा शिल्प कला के स्टॉल का भी निरीक्षण किया। जनजातीय महिलाओं द्वारा पीतल, तांबा और कांसे से तैयार किए गए कलात्मक धातु शिल्पों की उन्होंने विशेष प्रशंसा की।
डोकरा कला के नाम से प्रसिद्ध यह पारंपरिक धातु कला जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। इस अवसर पर कलाकार बलदेव बाघमारे ने राष्ट्रपति को पीतल से निर्मित जनजातीय महिला की प्रतिमा भेंट की।
इसके अलावा राष्ट्रपति ने वन आधारित उत्पादों के स्टॉलों का भी अवलोकन किया, जहां शहद, सागौन और स्थानीय स्तर पर तैयार अन्य उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था।
आध्यात्मिक विरासत और जनजातीय विकास का महत्वपूर्ण संदेश
राष्ट्रपति का यह मध्यप्रदेश दौरा धार्मिक आस्था और सामाजिक विकास के बीच संतुलन का संदेश देता है। एक ओर उन्होंने देश की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े पवित्र स्थलों पर पूजा-अर्चना कर सांस्कृतिक मूल्यों को सम्मान दिया, वहीं दूसरी ओर जनजातीय महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान की।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलता है, तब ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलती है।
जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मिल सकती है नई गति
बैतूल जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की सफलता यह दर्शाती है कि उचित प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और प्रशासनिक सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक परिवर्तन की बड़ी शक्ति बन सकती हैं।
श्रीअन्न आधारित उत्पादों और वन संपदा से तैयार वस्तुओं की बढ़ती मांग भविष्य में इन क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर सकती है।
सरकारी योजनाओं, स्थानीय संस्थाओं और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से इस तरह के प्रयासों को और व्यापक स्तर पर बढ़ाया जा सकता है।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्यप्रदेश यात्रा आध्यात्मिक श्रद्धा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय विकास का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में उनकी पूजा-अर्चना ने देश की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश दिया, जबकि बैतूल में जनजातीय महिलाओं के कार्यों की सराहना ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
यह दौरा इस बात का प्रतीक है कि भारत की प्रगति का मार्ग उसकी सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कौशल और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से होकर गुजरता है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय स्वाति खरे वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल में ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं. इसके पहले वे नई दिल्ली, रायपुर आदि शहरों में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं.
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