भारत में मॉनसून की एंट्री: केरल पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून, दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत को मिलेगी राहत

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है और केरल में इसके पहुंचने की पुष्टि कर दी गई है। मानसून की एंट्री के साथ कई जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। उत्तर भारत के भीषण गर्मी से जूझ रहे राज्यों को भी जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना भी जताई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

(दीपक अग्रवाल)

मुंबई (साई)।भारत में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को घोषणा करते हुए बताया कि मानसून केरल पहुंच चुका है। इसके साथ ही देश में चार महीने तक चलने वाले मानसूनी मौसम की औपचारिक शुरुआत हो गई है। पिछले कई दिनों से केरल के विभिन्न हिस्सों में बारिश हो रही थी, लेकिन अब मौसम विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

मानसून का आगमन भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि व्यवस्था और करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे समय में जब देश के कई हिस्से भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे हैं, मानसून की दस्तक राहत की बड़ी खबर बनकर सामने आई है।

सामान्य तिथि से देरी से पहुंचा मानसून

आमतौर पर केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है। इस वर्ष मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है। हालांकि मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव के चलते इसकी गति प्रभावित हुई और आखिरकार 4 जून को इसके आगमन की घोषणा की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि चार दिन की देरी को बहुत अधिक चिंताजनक नहीं माना जा सकता, क्योंकि मानसून की प्रगति कई समुद्री और वायुमंडलीय कारकों पर निर्भर करती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की वर्तमान स्थिति सामान्य बनी हुई है और इसके आगे बढ़ने की गति भी संतोषजनक है।

केरल में भारी बारिश का दौर शुरू

मानसून की एंट्री के साथ ही केरल के कई हिस्सों में तेज बारिश देखने को मिल रही है। मौसम विभाग ने अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की गई है।

विभाग के अनुसार:

  • कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है।
  • बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
  • हवा की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
  • निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।

इसके अलावा तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पत्तनमथिट्टा, इडुक्की और त्रिशूर जिलों में भी गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया गया है।

उत्तर भारत को कब मिलेगी राहत?

देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में पिछले कुछ सप्ताह से रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की जा रही है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मानसून दिल्ली और उत्तर भारत में कब पहुंचेगा।

मौसम विभाग के मॉडल के अनुसार:

  • उत्तर प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश कर सकता है।
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां पहले शुरू हो सकती हैं।
  • दिल्ली में मानसून की सामान्य तिथि 25 से 30 जून के बीच मानी जाती है।
  • राजस्थान और हरियाणा में जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून पहुंचने की संभावना है।

यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो उत्तर भारत के लोगों को अगले कुछ सप्ताह में गर्मी से राहत मिल सकती है।

मानसून क्यों है भारत की जीवनरेखा?

भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है और यहां की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि आज भी वर्षा आधारित है। ऐसे में मानसून केवल मौसम की घटना नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

मानसून के अच्छे रहने पर:

  • कृषि उत्पादन बढ़ता है।
  • खाद्यान्न उपलब्धता बेहतर होती है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
  • जलाशयों और बांधों में जलस्तर बढ़ता है।
  • बिजली उत्पादन में सहायता मिलती है।
  • पेयजल संकट कम होता है।

वहीं कमजोर मानसून कई क्षेत्रों में कृषि संकट, जल संकट और महंगाई जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।

इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका

मानसून के आगमन की खुशखबरी के बीच मौसम विभाग का एक पूर्वानुमान चिंता भी बढ़ा रहा है। आईएमडी ने अपने संशोधित अनुमान में कहा है कि वर्ष 2026 में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रह सकती है।

विभाग के अनुसार इस बार पूरे देश में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है।

एलपीए अर्थात लॉन्ग पीरियड एवरेज वह औसत वर्षा होती है जो 30 से 50 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर निर्धारित की जाती है। भारत में मानसूनी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर माना जाता है, जो 1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित है।

मौसम विभाग के मानकों के अनुसार यदि वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है तो उसे अपर्याप्त वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है।

अल-नीनो का प्रभाव क्यों बढ़ा रहा चिंता?

इस वर्ष मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल-नीनो परिस्थितियों पर भी टिकी हुई हैं। अल-नीनो एक ऐसी समुद्री और वायुमंडलीय घटना है जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है।

भारत में सामान्यतः अल-नीनो के दौरान:

  • मानसूनी वर्षा कमजोर पड़ सकती है।
  • कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
  • कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  • जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के पूरे सीजन में कई अन्य कारक भी सक्रिय रहते हैं। इसलिए केवल अल-नीनो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

किसानों की उम्मीदें बढ़ीं

देशभर के किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई सीधे तौर पर बारिश पर निर्भर करती है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की खेती मानसूनी वर्षा के आधार पर होती है।

मानसून के समय पर आने से किसानों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

  • बुवाई समय पर शुरू होगी।
  • सिंचाई पर खर्च कम होगा।
  • उत्पादन लागत घट सकती है।
  • फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
  • ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

इसी कारण मानसून की हर गतिविधि पर किसानों की विशेष नजर बनी रहती है।

जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था पर असर

भारत के अधिकांश बांध, जलाशय और भूजल स्रोत मानसूनी वर्षा से ही भरते हैं। यदि वर्षा सामान्य रहती है तो पूरे वर्ष पेयजल और सिंचाई की स्थिति बेहतर बनी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं होता। इसका सीधा संबंध देश की जीडीपी, ग्रामीण मांग, खाद्य मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन से भी होता है। अच्छी बारिश आर्थिक गतिविधियों को गति देती है जबकि कमजोर मानसून कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा सकता है।

जनता की प्रतिक्रिया और बढ़ी उम्मीदें

मानसून के आगमन की खबर के बाद देशभर में लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है। विशेष रूप से उत्तर भारत के उन क्षेत्रों में जहां पिछले कुछ सप्ताह से भीषण गर्मी का प्रकोप बना हुआ है, वहां लोग जल्द बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कई राज्यों में जल संकट और बढ़ते तापमान के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा था। ऐसे में मानसून की एंट्री को राहत भरी शुरुआत माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में क्या रहेगा मौसम का रुख?

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियां बनने पर यह दक्षिण और पूर्वी भारत के बड़े हिस्सों को कवर करेगा।

इसके बाद क्रमशः मध्य भारत, पूर्वी भारत और उत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां बढ़ेंगी। जून के अंत तक पूरे देश में मानसून पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक एंट्री के साथ देश में वर्षा ऋतु की शुरुआत हो चुकी है। केरल में मानसून पहुंचने से जहां किसानों, जल संसाधन प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों को राहत मिली है, वहीं उत्तर भारत भी अब बारिश का इंतजार कर रहा है। हालांकि सामान्य से कम वर्षा और अल-नीनो की संभावनाएं चुनौतियां पैदा कर सकती हैं, फिर भी मानसून की शुरुआत ने देशभर में उम्मीदों का नया दौर शुरू कर दिया है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि इस वर्ष मानसून देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए कितना लाभदायक साबित होता है।