बढ़ती जीवनशैली की अव्यवस्था बना रही ‘साइलेंट किलर’ का शिकार, उच्च रक्तचाप पर बढ़ी चिंता

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 17 मई 2026 के अवसर पर बढ़ती हाइपरटेंशन समस्या को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, तनाव और खानपान की खराब आदतें लोगों को तेजी से उच्च रक्तचाप की ओर धकेल रही हैं। यह बीमारी बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है। समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उच्च रक्तचाप की बढ़ती समस्या के लिए लापरवाही पड़ रही भारी

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस विशेष | 17 मई 2026

(डॉ. प्रितम भि. गेडाम)

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने कई गंभीर बीमारियों को तेजी से बढ़ावा दिया है। इन्हीं बीमारियों में एक सबसे खतरनाक समस्या है उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन, जिसे दुनियाभर में “साइलेंट किलर” के नाम से जाना जाता है।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 17 मई 2026 के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते लोग अपनी आदतों में सुधार नहीं लाते, तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी बीमारियों के मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग यह तक नहीं जानते कि वे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं।

आधुनिक जीवनशैली ने बढ़ाया खतरा

पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। देर रात तक जागना, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, अत्यधिक नमक और तेलयुक्त भोजन, तनावपूर्ण कार्यशैली तथा शारीरिक श्रम की कमी ने स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • प्रोसेस्ड फूड और पैक्ड खाने का बढ़ता चलन
  • मोबाइल और स्क्रीन टाइम में वृद्धि
  • नियमित व्यायाम की कमी
  • मानसिक तनाव और प्रतिस्पर्धा
  • धूम्रपान एवं शराब का सेवन

ये सभी कारण मिलकर उच्च रक्तचाप की समस्या को बढ़ा रहे हैं।

पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़ रहे हैं।

क्यों कहा जाता है ‘साइलेंट किलर’?

हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है। कई बार व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता कि उसका रक्तचाप लगातार बढ़ रहा है।

जब स्थिति गंभीर हो जाती है तब:

  • तेज सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • सीने में दर्द
  • धुंधला दिखाई देना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • दिल की धड़कन अनियमित होना

जैसे लक्षण सामने आते हैं।

कई मामलों में लोगों को बीमारी की जानकारी तब मिलती है जब उन्हें हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

क्या होता है रक्तचाप?

रक्तचाप वह दबाव है जो हृदय द्वारा रक्त पंप करने के दौरान रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर पड़ता है। इसे दो संख्याओं में मापा जाता है:

  • सिस्टोलिक प्रेशर: जब हृदय सिकुड़ता है
  • डायस्टोलिक प्रेशर: जब हृदय आराम की स्थिति में होता है

सामान्य रक्तचाप आमतौर पर:

120/80120/80

से कम माना जाता है।

जब रक्तचाप लगातार:

140/90140/90

या उससे अधिक रहने लगे, तब उसे उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन माना जाता है।

दो प्रकार का होता है उच्च रक्तचाप

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार उच्च रक्तचाप मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

1. प्राथमिक हाइपरटेंशन

यह सबसे सामान्य प्रकार है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है और इसका संबंध जीवनशैली से जुड़ा होता है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • बढ़ती उम्र
  • मोटापा
  • तनाव
  • गलत खानपान
  • धूम्रपान
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी

2. द्वितीयक हाइपरटेंशन

यह किसी अन्य बीमारी के कारण होता है, जैसे:

  • किडनी रोग
  • हार्मोनल असंतुलन
  • कुछ विशेष दवाओं का प्रभाव

कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण और पारिवारिक इतिहास भी जोखिम बढ़ाते हैं।

प्रदूषण और मिलावट भी बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खानपान ही नहीं बल्कि प्रदूषण और मिलावटी खाद्य पदार्थ भी उच्च रक्तचाप के लिए जिम्मेदार हैं। दूषित हवा, रासायनिक युक्त भोजन और तनावपूर्ण वातावरण शरीर पर लगातार नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

आज स्थिति यह है कि:

  • शुद्ध हवा दुर्लभ होती जा रही है
  • खाद्य पदार्थों में मिलावट बढ़ रही है
  • रासायनिक पदार्थों का उपयोग अधिक हो रहा है
  • तनाव और भागदौड़ ने मानसिक संतुलन प्रभावित किया है

इन सभी कारणों का सीधा असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे मरीज

स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार भारत में उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब यह बीमारी तेजी से फैल रही है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि:

  • बड़ी संख्या में लोग नियमित जांच नहीं कराते
  • शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया जाता है
  • कई मरीज दवाइयां बीच में बंद कर देते हैं
  • स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है

विश्व स्तर पर 1.4 बिलियन से अधिक वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित बताए जाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें अपनी बीमारी का पता तक नहीं होता।

गंभीर बीमारियों का बढ़ता खतरा

अनियंत्रित उच्च रक्तचाप शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

हृदय पर असर

  • हार्ट अटैक का खतरा
  • हार्ट फेलियर
  • सीने में दर्द
  • धमनियों का कठोर होना

मस्तिष्क पर असर

  • स्ट्रोक का खतरा
  • याददाश्त कमजोर होना
  • सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होना

किडनी पर असर

  • किडनी की कार्यक्षमता कम होना
  • किडनी फेलियर का खतरा

आंखों पर असर

  • नजर कमजोर होना
  • आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च रक्तचाप को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं।

स्वस्थ खानपान अपनाएं

  • फल और हरी सब्जियां अधिक खाएं
  • कम नमक का सेवन करें
  • तैलीय और पैक्ड फूड से दूरी रखें
  • साबुत अनाज और कम वसा वाले खाद्य पदार्थ लें

नियमित व्यायाम करें

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें
  • योग और प्राणायाम करें
  • शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं

तनाव कम करें

  • पर्याप्त नींद लें
  • ध्यान और मेडिटेशन करें
  • सकारात्मक वातावरण में रहें

नशे से दूरी रखें

  • धूम्रपान छोड़ें
  • शराब का सेवन कम करें

नियमित जांच बेहद जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर की पहचान केवल नियमित जांच से ही संभव है। कई बार व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस करता है, लेकिन उसका रक्तचाप खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका होता है।

इसलिए:

  • 30 वर्ष के बाद नियमित BP जांच जरूरी
  • परिवार में इतिहास हो तो विशेष सावधानी
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें
  • समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराएं

समाज और प्रशासन की भूमिका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। सरकार और समाज दोनों को मिलकर जागरूकता बढ़ानी होगी।

जरूरी कदम:

  • स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
  • स्कूलों और कॉलेजों में स्वास्थ्य शिक्षा
  • सार्वजनिक स्थानों पर फिटनेस गतिविधियां
  • प्रदूषण नियंत्रण पर सख्ती
  • मिलावटी खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई

यदि समाज स्तर पर स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता नहीं बढ़ी तो आने वाले समय में हृदय रोग और रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आज की सबसे बड़ी जरूरत “रोकथाम” है। यदि लोग समय रहते अपनी जीवनशैली में सुधार करें तो हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि:

  • स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है
  • तनावमुक्त जीवनशैली अपनानी होगी
  • हरियाली और स्वच्छ वातावरण बढ़ाना होगा
  • नियमित स्वास्थ्य जांच को आदत बनाना होगा

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2026 केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि गंभीर चेतावनी है कि तेजी से बदलती जीवनशैली हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। उच्च रक्तचाप जैसी बीमारी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और समय रहते सावधानी न बरतने पर जानलेवा साबित हो सकती है। स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम, तनावमुक्त जीवन और समय पर जांच ही इस “साइलेंट किलर” से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। जागरूकता और अनुशासन अपनाकर ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

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(साई फीचर्स)