(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।प्रधानमंत्री सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। Rakesh Shukla ने विभागीय अधिकारियों और वेंडर्स की बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
भोपाल स्थित ऊर्जा भवन परिसर से “सोलर रथ सह मोबाइल बूथ वैन” को शहर में प्रचार-प्रसार के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर Arun Bhimawad सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
सौर ऊर्जा विस्तार की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य देशभर में घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित कर बिजली बिल में राहत प्रदान करना है। मध्यप्रदेश में इस योजना को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
मंत्री श्री शुक्ला ने स्पष्ट किया कि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक योजना का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता है। इसके लिए वेंडर्स के साथ संवाद स्थापित कर जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों की जानकारी ली जा रही है।
ऊर्जा भवन में समीक्षा बैठक, क्रियान्वयन पर जोर
ऊर्जा भवन में आयोजित बैठक में योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि:
- पात्र परिवारों की पहचान तेज की जाए
- आवेदन प्रक्रिया सरल बनाई जाए
- तकनीकी स्वीकृति और स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए
- वेंडर्स की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए
मंत्री ने कहा कि वेंडर्स को आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी परेशानियों का निराकरण विभागीय स्तर पर किया जाएगा, जिससे कार्य में गति आएगी और अधिकतम घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा सकेगा।
सोलर रथ सह मोबाइल बूथ वैन की विशेष भूमिका
मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा संचालित यह सोलर रथ अगले सात दिनों तक भोपाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करेगा।
सोलर रथ की प्रमुख विशेषताएं:
- प्रतिदिन दो कॉलोनियों में बूथ स्थापना
- मौके पर योजना की जानकारी
- आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन
- बैंक और डिस्कॉम प्रतिनिधियों की मौजूदगी
- स्थल पर ही पात्रता और दस्तावेज जांच
मोबाइल वैन में सोलर एनर्जी से जुड़े विशेषज्ञ, डिस्कॉम सदस्य और बैंक प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे, ताकि इच्छुक उपभोक्ताओं को तुरंत सहायता मिल सके।
प्रशासनिक समन्वय से तेज होगा काम
अपर मुख्य सचिव स्तर पर भी योजना की निगरानी की जा रही है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया और शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के सहयोग से यह अभियान संचालित हो रहा है।
डिस्कॉम, बैंक और नगरीय निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक स्तर पर घरों पर सोलर सिस्टम लगाने का कार्य किया जा रहा है।
पीएमएसजी एमबीवाय पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता स्वयं वेंडर का चयन कर आवेदन कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित हो रही हैं।
योजना का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
प्रधानमंत्री सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बिल में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी है।
संभावित लाभ:
✔ घरेलू बिजली खर्च में कमी
✔ कार्बन उत्सर्जन में कमी
✔ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
✔ स्थानीय रोजगार सृजन
✔ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित होते हैं, तो राज्य की ऊर्जा संरचना में सकारात्मक बदलाव आएगा।
आंकड़ों में समझें योजना का महत्व
राष्ट्रीय स्तर पर रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि राज्य में पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है।
- प्रदेश में हजारों घरों ने पहले ही आवेदन किया है
- शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है रुचि
- बैंकिंग सहयोग से आसान वित्तीय सुविधा
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लक्ष्य के अनुरूप स्थापना होती है, तो आने वाले वर्षों में लाखों यूनिट बिजली की बचत संभव है।
जनता की प्रतिक्रिया और उत्साह
भोपाल शहर में सोलर रथ के रवाना होते ही नागरिकों में उत्साह देखा गया। कई कॉलोनियों में पहले से ही सोलर सिस्टम के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
नागरिकों का कहना है कि यदि सब्सिडी और तकनीकी सहायता समय पर मिलती है, तो सौर ऊर्जा अपनाना लाभकारी साबित होगा।
युवा वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवार विशेष रूप से इस योजना में रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि इससे दीर्घकालिक बिजली खर्च में राहत मिल सकती है।
नीति और राजनीतिक संदर्भ
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकता में शामिल है। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और नीतिगत समर्थन से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को बल मिल रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सोलर रथ जैसे जनजागरूकता अभियान चलाना यह संकेत देता है कि योजना को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।
भविष्य की दिशा और संभावनाएं
आने वाले समय में निम्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है:
- ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर विस्तार
- कृषि पंपों का सौरकरण
- सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर अनिवार्यता
- स्कूलों और अस्पतालों में सोलर सिस्टम
- डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का विकास
यदि यह अभियान सफल रहता है, तो मध्यप्रदेश अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री सूर्य घर – मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री राकेश शुक्ला द्वारा सोलर रथ को हरी झंडी दिखाना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यापक जनसंपर्क और जागरूकता अभियान की शुरुआत है।
सही समन्वय, पारदर्शी प्रक्रिया और तकनीकी समर्थन के साथ यह योजना हजारों परिवारों को बिजली बिल में राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रदेश को आगे बढ़ा सकती है। आने वाले महीनों में इसका वास्तविक प्रभाव जमीनी स्तर पर देखने को मिलेगा।

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