मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया किसान नीतियों की सफलता

मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए देश के शीर्ष राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में अग्रणी रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों का परिणाम बताया। वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित कर राज्य सरकार ने कृषि विकास को नई दिशा देने का संकेत दिया है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)।Mohan Yadav ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है।

यह उपलब्धि न केवल कृषि क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान

मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन का आंकड़ा हासिल किया है। यह राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है, जिससे राज्य देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

गेहूं उत्पादन में मजबूत प्रदर्शन

  • कुल उत्पादन: 51 मिलियन टन
  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: लगभग 78 प्रतिशत
  • देश में स्थान: दूसरा

गेहूं उत्पादन में यह वृद्धि बेहतर सिंचाई सुविधाओं, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के कारण संभव हुई है।

मक्का उत्पादन में अग्रणी भूमिका

  • उत्पादन: 64 मिलियन टन
  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: लगभग 30 प्रतिशत

मक्का उत्पादन में मध्यप्रदेश देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। यह पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स)

  • उत्पादन: 78 मिलियन टन
  • हिस्सेदारी: 17 प्रतिशत
  • देश में स्थान: तृतीय

मिलेट्स और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीतियों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

दलहन उत्पादन में प्रथम स्थान बरकरार

दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

  • कुल दलहन उत्पादन: 24 मिलियन टन
  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: 40 प्रतिशत
  • देश में स्थान: प्रथम

चना उत्पादन में भी राज्य शीर्ष तीन में दूसरे स्थान पर रहा।

  • चना उत्पादन: 11 मिलियन टन
  • हिस्सेदारी: लगभग 01 प्रतिशत

दलहन उत्पादन में यह सफलता खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

तिलहन उत्पादन में भी मजबूत पकड़

तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन का उत्पादन करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: 19 प्रतिशत

सोयाबीन में राष्ट्रीय पहचान

  • उत्पादन: 38 मिलियन टन
  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: 27 प्रतिशत

सोयाबीन उत्पादन में राज्य की अग्रणी भूमिका ने इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित किया है।

मूंगफली उत्पादन

  • उत्पादन: 55 मिलियन टन
  • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: 99 प्रतिशत
  • देश में स्थान: तृतीय

सरकारी योजनाओं का प्रभाव

राज्य में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कृषि विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। इनमें प्रमुख हैं:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
  • एक जिला-एक उत्पाद योजना
  • मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन
  • कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) का गठन
  • भावांतर भुगतान योजना
  • रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना

इन योजनाओं ने किसानों को जोखिम से सुरक्षा, बाजार उपलब्धता और बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने में मदद की है।

“किसान कल्याण वर्ष” 2026 की घोषणा

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य:

  • किसानों की आय में वृद्धि
  • आधुनिक तकनीक का विस्तार
  • कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा
  • फसल विविधीकरण
  • जैविक खेती को प्रोत्साहन

यह कदम राज्य की दीर्घकालिक कृषि रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

कृषि उत्पादन में वृद्धि का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।

✔ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
✔ कृषि आधारित लघु उद्योगों को गति मिली है।
✔ किसानों की आय में सुधार हुआ है।
✔ कृषि निर्यात की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन वृद्धि के साथ भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन तंत्र को और मजबूत किया जाए, तो राज्य राष्ट्रीय कृषि अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण

कृषि क्षेत्र में यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाती है। कृषि को आर्थिक विकास के केंद्र में रखकर बनाई गई योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की साख को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

भविष्य की संभावनाएं

आने वाले वर्षों में राज्य सरकार की प्राथमिकताएं निम्न बिंदुओं पर केंद्रित रह सकती हैं:

  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार
  • कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा
  • डिजिटल कृषि सेवाओं का प्रसार
  • निर्यात उन्मुख फसलों का उत्पादन
  • जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन

यदि वर्तमान रफ्तार बरकरार रहती है, तो मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में और आगे बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है, वह राज्य की नीतिगत दूरदृष्टि और किसानों की मेहनत का परिणाम है। खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में शीर्ष स्थान प्राप्त कर राज्य ने राष्ट्रीय कृषि परिदृश्य में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

“किसान कल्याण वर्ष” 2026 की घोषणा के साथ राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि कृषि और किसान विकास उसकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था का और भी सशक्त स्तंभ बन सकता है।