पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और विचारधारा का पुनर्स्मरण
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर मध्यप्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों ने केवल श्रद्धांजलि तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि उनकी विचारधारा को समकालीन शासन और समाज से जोड़ने का प्रयास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें राष्ट्र निर्माण का वैचारिक स्तंभ बताया।
उन्होंने कहा कि जब विश्व स्तर पर साम्यवाद और समाजवाद की विचारधाराएं प्रभाव में थीं, तब दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति आधारित एकात्म मानववाद का दर्शन प्रस्तुत किया, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास को केंद्र में रखता है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्तमान समय में कल्याणकारी योजनाओं और समावेशी विकास की चर्चा लगातार बढ़ रही है।
एकात्म मानववाद और अंत्योदय की विचारधारा क्या है
दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद केवल राजनीतिक दर्शन नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक संतुलन का सिद्धांत माना जाता है। इसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समन्वित विकास की बात की गई है।
उनकी अंत्योदय की अवधारणा का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है। यह विचार आज भी कई कल्याणकारी योजनाओं की आधारशिला माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विचार भारत की सनातन सांस्कृतिक सोच को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है और राष्ट्र निर्माण को सामाजिक न्याय से जोड़ता है।
समर्पण दिवस के रूप में मनाई जाती है पुण्यतिथि
राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा सेवा कार्य और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
देश स्तर पर भी शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जिससे उनके विचारों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम में श्रद्धांजलि और पौधरोपण का संदेश
भोपाल में मुख्यमंत्री ने लालघाटी स्थित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और नमो वन में रुद्राक्ष का पौधा लगाया।
इस प्रकार के कार्यक्रम प्रतीकात्मक रूप से सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और वैचारिक संदेश देने का प्रयास माने जाते हैं। पौधरोपण जैसे कार्यक्रमों को सामाजिक जिम्मेदारी और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है।
शासन नीति और विकास मॉडल से जुड़ा संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान शासन मॉडल में गरीब, किसान, महिला और युवाओं के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अंत्योदय का सिद्धांत आज की शासन व्यवस्था में निम्न क्षेत्रों में लागू होता दिखाई देता है:
- ग्रामीण विकास योजनाएं
- सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम
- रोजगार आधारित योजनाएं
- महिला सशक्तिकरण
- गरीब वर्ग के लिए आवास और बुनियादी सुविधाएं
यह मॉडल सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास के संतुलन का प्रयास माना जाता है।
राजनीतिक संदर्भ और वैचारिक प्रभाव
दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख विचारकों में शामिल रहे।
उनकी विचारधारा ने भारतीय राजनीति में वैचारिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी सोच और समाज केंद्रित विकास मॉडल को बढ़ावा दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान समय में भी कई नीतियां और योजनाएं इसी दर्शन से प्रेरित बताई जाती हैं।
सामाजिक प्रभाव और जनमानस में स्वीकार्यता
दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा को सामाजिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह समाज के कमजोर वर्गों को केंद्र में रखती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार:
- इससे गरीब वर्ग को विकास से जोड़ने में मदद मिलती है
- सामाजिक असमानता कम करने का प्रयास होता है
- शासन और समाज के बीच विश्वास मजबूत होता है
डेटा और नीति विश्लेषण
हाल के वर्षों में सरकारों द्वारा चलाए गए कल्याणकारी कार्यक्रमों में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर देखा गया है:
- अंतिम व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचाना
- ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना बढ़ाना
- डिजिटल सेवाओं से योजनाओं को पारदर्शी बनाना
- सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाना
नीति विशेषज्ञ इसे अंत्योदय आधारित शासन मॉडल का व्यावहारिक रूप मानते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सामान्य तौर पर ऐसे कार्यक्रमों को वैचारिक प्रेरणा और सांस्कृतिक जुड़ाव के रूप में देखा जाता है।
जनता के बीच इन विचारों की चर्चा खासकर ग्रामीण और पारंपरिक समाज में अधिक देखी जाती है, जहां सामुदायिक विकास और सामाजिक सहयोग की भावना मजबूत होती है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि एकात्म मानववाद का महत्व आज के वैश्विक दौर में और बढ़ गया है क्योंकि:
- केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं माना जाता
- सामाजिक संतुलन और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है
- समावेशी विकास ही स्थायी विकास का आधार है
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले समय में दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा निम्न क्षेत्रों में और प्रभावी हो सकती है:
- सामाजिक न्याय आधारित नीति निर्माण
- ग्रामीण और शहरी संतुलित विकास
- सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित विकास मॉडल
- समावेशी अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे विविधता वाले देश में यह मॉडल लंबे समय तक प्रासंगिक रह सकता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि उनके विचारों की प्रासंगिकता को समझने का अवसर भी है।
एकात्म मानववाद और अंत्योदय जैसे सिद्धांत आज भी शासन, समाज और विकास मॉडल को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए संदेश से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भविष्य की विकास नीतियों में समावेशी और समाज केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता मिलती रहेगी।
यह विचारधारा भारत के सामाजिक और आर्थिक संतुलन के लिए आगे भी मार्गदर्शक बनी रह सकती है।

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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