सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश सरकार ने सामाजिक विकास, प्रशासनिक सुधार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विद्युतीकरण और सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जनजातीय और महिला-बाल विकास विभाग की योजनाओं को जारी रखने के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह फैसला राज्य में सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास के लिए अहम माना जा रहा है।
जनजातीय और महिला-बाल विकास योजनाओं को मिला वित्तीय बल
मंजूर बजट के तहत कई प्रमुख योजनाओं को निरंतरता दी गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य जनजातीय और कमजोर वर्गों को शिक्षा, पोषण और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्य स्वीकृतियां:
- पीवीटीजी आहार अनुदान योजना – 2,350 करोड़ रुपये
- एकीकृत छात्रावास योजना – 1,703 करोड़ 15 लाख रुपये
- सीएम राइज विद्यालय योजना – 1,416 करोड़ 91 लाख रुपये
- आवास सहायता योजना – 1,110 करोड़ रुपये
- छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति – 522 करोड़ 8 लाख रुपये
- मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना – 31 करोड़ 3 लाख रुपये
विश्लेषकों का मानना है कि इन योजनाओं से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और पोषण स्तर में सुधार होगा।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत विद्युतीकरण
मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अविद्युतीकृत घरों और सरकारी संस्थानों में बिजली पहुंचाने के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।
योजना के मुख्य बिंदु:
- 63,077 घरों का विद्युतीकरण
- 650 शासकीय संस्थानों को बिजली कनेक्शन
- केंद्र सरकार से 220 करोड़ से अधिक सहायता
- राज्य सरकार का अंश लगभग 146 करोड़ रुपये
इसके अलावा ऑफ-ग्रिड सोलर प्रणाली से 8,521 घरों में बिजली पहुंचाने की योजना भी शामिल है।
दूरस्थ क्षेत्रों के लिए सोलर आधारित समाधान
जिन क्षेत्रों में पारंपरिक बिजली लाइन पहुंचाना कठिन है, वहां सोलर और बैटरी आधारित ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाए जाएंगे।
इससे संभावित लाभ:
- दूरस्थ गांवों में बिजली पहुंच
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार
- ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार
न्यायालय आईटी कर्मचारियों को आयु सीमा में राहत
मंत्रि-परिषद ने उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आईटी संवर्ग के कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए एक बार 5 वर्ष की आयु छूट देने का निर्णय लिया है।
वर्तमान आयु सीमा:
- अनारक्षित वर्ग – 40 वर्ष
- आरक्षित वर्ग – 45 वर्ष
इस निर्णय से अनुभवी कर्मचारियों को करियर उन्नति का अवसर मिलने की संभावना है।
नए पेंशन नियम 2026 से प्रशासनिक प्रक्रिया आसान
सरकार ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 और पेंशन सारांशीकरण नियम 2026 को मंजूरी दी है।
इन नियमों के मुख्य लाभ:
- पेंशन प्रक्रिया सरल होगी
- समय सीमा में मामलों का निपटारा
- पेंशन गणना प्रक्रिया आसान
परिवार पेंशन में महत्वपूर्ण बदलाव
नए नियमों के तहत परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अब शामिल होंगे:
- अविवाहित पुत्री
- विधवा पुत्री
- तलाकशुदा पुत्री
इस फैसले को सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली नियम 2026 लागू
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़े नए नियमों को भी मंजूरी दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
प्रमुख प्रावधान:
- अभिदाता की मृत्यु पर परिवार पेंशन
- ई-सेवा पुस्तिका व्यवस्था
- पूर्व सेवाओं को जोड़ने की सुविधा
- अंशदान गणना की स्पष्ट प्रक्रिया
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इन फैसलों का असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है:
सामाजिक स्तर पर:
- जनजातीय विकास
- महिला और बाल सुरक्षा
- ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं
प्रशासनिक स्तर पर:
- पेंशन प्रक्रिया में पारदर्शिता
- कर्मचारी हित संरक्षण
- डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा
जन प्रतिक्रिया और सामाजिक अपेक्षाएं
सामाजिक स्तर पर इन फैसलों को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, लोगों की अपेक्षाएं भी हैं:
- योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन
- पारदर्शिता बनाए रखना
- दूरस्थ क्षेत्रों तक लाभ पहुंचाना
विशेषज्ञों की राय
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं में निवेश से राज्य की मानव विकास दर बेहतर हो सकती है।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार:
- शिक्षा और स्वास्थ्य निवेश जरूरी
- ग्रामीण अवसंरचना सुधार आवश्यक
- डिजिटल प्रशासन को मजबूत करना होगा
भविष्य की संभावनाएं
राज्य में आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है:
- डिजिटल गवर्नेंस
- हरित ऊर्जा
- सामाजिक सुरक्षा विस्तार
- ग्रामीण औद्योगिक विकास
इन योजनाओं का उद्देश्य 2030 तक समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
️⃣ CONCLUSION / निष्कर्ष
मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद के ये फैसले राज्य में सामाजिक कल्याण, प्रशासनिक सुधार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। जनजातीय विकास, महिला-बाल कल्याण, ग्रामीण विद्युतीकरण और पेंशन सुधार जैसे फैसले राज्य के विकास मॉडल को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो आने वाले वर्षों में राज्य में समावेशी और संतुलित विकास की गति तेज हो सकती है।

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