लिमटी की लालटेन750
लोकलुभावन बजट,युवाओं को रोजगार नहीं,शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि जैसे क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं नदारत!
विपक्ष युवा,शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि,रोजगार आदि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने का प्रयास करेगा या सदन से बर्हिगमन का आसान रास्ता अख्तियार करेगा!
(लिमटी खरे)
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बजट और आर्थिक दिशा पर राष्ट्रीय बहस तेज
भारत का आम बजट केवल सरकार की आय-व्यय योजना नहीं बल्कि देश की आर्थिक सोच, विकास प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीति का दस्तावेज माना जाता है। आम बजट 2026 ऐसे समय में पेश हुआ जब देश वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगाई के दबाव, रोजगार की चुनौतियों और सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों से जूझ रहा है।
इस बजट के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी बनाया। वे लगातार नौ बार बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बन चुकी हैं। इससे पहले मोरारजी देसाई और पी. चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कई बार बजट पेश किए, लेकिन लगातार इतनी बार बजट प्रस्तुत करना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
बजट की पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति
भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेज गति से बढ़ी है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार रही हैं:
- युवाओं के लिए रोजगार अवसर
- ग्रामीण आय में स्थिरता
- महंगाई नियंत्रण
- स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे का विस्तार
- वैश्विक आर्थिक अस्थिरता
सरकार का कहना है कि बजट 2026 दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती पर आधारित है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह तत्काल राहत देने में कमजोर नजर आता है।
विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का बड़ा फोकस
आम बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को प्राथमिकता दी गई है। सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से:
- रोजगार के अप्रत्यक्ष अवसर बनते हैं
- उद्योगों को लागत में राहत मिलती है
- निवेशकों का भरोसा बढ़ता है
- लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है
सरकार का दावा है कि इससे अगले 5–10 वर्षों में अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा।
डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर जोर
बजट में डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी हब बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- डिजिटल सेक्टर में लाखों नए अवसर बन सकते हैं
- स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होगा
- टेक्नोलॉजी निर्यात बढ़ सकता है
हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या ग्रामीण और पारंपरिक रोजगार क्षेत्रों को भी समान प्राथमिकता मिली है।
कृषि क्षेत्र के लिए घोषणाएं
सरकार ने कृषि टेक्नोलॉजी, सिंचाई, फूड प्रोसेसिंग और किसान क्रेडिट योजनाओं पर जोर दिया है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो किसानों की आय बढ़ सकती है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि किसानों के लिए आय सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन व्यवस्था पर ज्यादा ठोस कदम अपेक्षित थे।
रोजगार को लेकर सबसे ज्यादा सवाल
बजट 2026 की सबसे बड़ी आलोचना रोजगार को लेकर हो रही है। विपक्ष का कहना है कि बजट में रोजगार सृजन का स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखता।
मुख्य आलोचनाएं:
- सरकारी नौकरियों पर स्पष्ट नीति नहीं
- स्किल डेवलपमेंट का सीमित विस्तार
- निजी सेक्टर रोजगार प्रोत्साहन योजना का अभाव
युवा वर्ग लंबे समय से रोजगार को लेकर ठोस नीति की मांग कर रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर बहस
विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। देश की बड़ी आबादी अभी भी सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- शिक्षा निवेश से भविष्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है
- स्वास्थ्य निवेश से उत्पादकता बढ़ती है
टैक्स और मध्यम वर्ग
इस बजट में आयकर में बड़ी राहत नहीं दी गई। हालांकि सरकार का कहना है कि दीर्घकालिक निवेश आधारित विकास से मध्यम वर्ग को फायदा मिलेगा।
मध्यम वर्ग की मुख्य अपेक्षाएं:
- टैक्स राहत
- महंगाई नियंत्रण
- आवास और शिक्षा खर्च में सहायता
राजनीतिक असर और विपक्ष की रणनीति
राजनीतिक रूप से यह बजट आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है।
साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि विपक्ष सदन में बहस करेगा या विरोध के तौर पर वॉकआउट का रास्ता अपनाएगा।
आम जनता की प्रतिक्रिया
देशभर में बजट को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
सकारात्मक प्रतिक्रिया:
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश
- टेक्नोलॉजी फोकस
- महिला सशक्तिकरण योजनाएं
नकारात्मक प्रतिक्रिया:
- रोजगार पर स्पष्ट नीति नहीं
- टैक्स राहत कम
- महंगाई पर सीमित फोकस
भविष्य की संभावनाएं
यदि बजट की योजनाओं का सही क्रियान्वयन होता है तो:
- अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है
- निवेश बढ़ सकता है
- टेक्नोलॉजी सेक्टर तेजी से बढ़ सकता है
लेकिन अगर रोजगार और सामाजिक क्षेत्र पर फोकस नहीं बढ़ा तो सामाजिक असंतुलन बढ़ सकता है।
8️⃣ Conclusion / निष्कर्ष
आम बजट 2026 देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर जोर स्पष्ट दिखता है, लेकिन रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाएं अभी भी बनी हुई हैं।
आने वाले समय में बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाओं का क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है और क्या इसका लाभ आम नागरिक तक पहुंच पाता है। फिलहाल यह बजट विकास और बहस दोनों का केंद्र बना हुआ है।
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निर्मला सीतारमण के खाते में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है कि वे पहली ऐसी महिला वित्त मंत्री हैं जिन्होंने लगातार नवीं बार आम बजट पेश किया है। उन्होंने2019 से अब तक वैसे तो आठ साल तक वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला है पर2024 में उन्होंने अंतरिम और पूर्ण दोंने ही बजट पेश किए थे। इसके पहले मोरारजी देसाई के द्वारा दस बार तो पी. चिदंबरम ने नौ बार बजट पेश किया है,पर लगातार09 बार बजट पेश करने वाली इकलौती व महिला वित्त मंत्री बन चुकी हैं निर्मला सीतारमण।
भारत का आम बजट केवल आय-व्यय का सरकारी दस्तावेज नहीं होता,बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा,विकास माडल और सरकार की प्राथमिकताओं का आईना भी होता है। आम बजट2026 भी ऐसे समय में प्रस्तुत हुआ जब भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों,घरेलू महंगाई,रोजगार की जरूरत और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे कई मोर्चों पर खड़ा है।
इस बजट को लेकर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर सरकार इसे विकासोन्मुख,निवेश प्रोत्साहन और गरीब-हितैषी बता रही है,वहीं विपक्ष और कुछ आर्थिक विशेषज्ञ इसे संतुलन से दूर और कुछ वर्गों के लिए निराशाजनक बता रहे हैं।
सबसे पहले चर्चा करते हैं बजट के उजले पक्ष पक्ष अर्थात सकारात्मक पहलुओं पर। आम बजट2026 में सरकार ने विकास,डिजिटल अर्थव्यवस्था,इंफ्रास्ट्रक्चर,कृषि,स्टार्टअप और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखने का प्रयास किया है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास के साथ समावेशन की नीति को मजबूत करता है। बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने,रोजगार सृजन,टेक्नोलॉजी निवेश और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि,सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह बजट वास्तव में आम जनता के जीवन स्तर में तत्काल सुधार ला पाएगा या केवल दीर्घकालिक आर्थिक ढांचे को मजबूत करेगा।
इस बजट में आधारभूत संरचनाओं पर निवेश को केंद्र में रखा गया है। इसमें सड़क,रेलवे,लॉजिस्टिक्स,ग्रीन एनर्जी और शहरी विकास के लिए भारी निवेश का प्रावधान किया गया है। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे,उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा,लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को अक्सर आर्थिक विकास का इंजन माना जाता है और सरकार इसी रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।
बजट में डिजिटल इंडिया,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष योजनाएं शामिल की गई हैं। यह भारत को टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दशक में डिजिटल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सकता है। सके अलावा सरकार ने कृषि टेक्नोलॉजी,सिंचाई,फूड प्रोसेसिंग और किसान क्रेडिट पर ध्यान दिया है। यदि इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन होता है तो किसानों की आय बढ़ सकती है एवं कृषि उत्पादन में सुधार हो सकता है।
भले ही बड़ी टैक्स राहत नहीं दी गई हो,लेकिन कुछ अप्रत्यक्ष राहत और निवेश प्रोत्साहन योजनाएं शामिल की गई हैं। सरकार का तर्क है कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती से मध्यम वर्ग को फायदा मिलेगा। इसमें राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का प्रयास किया गया है तो दूसरी ओर सरकार ने घाटे को नियंत्रित रखने का लक्ष्य रखा है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है और इससे भारत की आर्थिक साख मजबूत हो सकती है।
महिला सशक्तिकरण और लखपति दीदी योजना को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूहों के लिए ऋण सीमा बढ़ाना और लखपति दीदी योजना का विस्तार करना एक सामाजिक रूप से प्रगतिशील कदम है। यह केवल कल्याणकारी योजना नहीं,बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास का मॉडल है।
अब बात की जाए इसके अंधियारे पक्ष अर्थात नकारात्मक पहलुओं पर,विपक्ष का मानना है कि इसमें मध्यम वर्ग को सीमित राहत दी गई है। आयकर में बड़ी राहत नहीं मिली,महंगाई से राहत के लिए सीधे कदम कम दिखे,जबकि मध्यम वर्ग लंबे समय से टैक्स कटौती की उम्मीद कर रहा था।
वहीं,रोजगार पर स्पष्ट रोडमैप की कमी भी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश रोजगार बढ़ा सकता है,लेकिन सीधे नौकरी सृजन योजनाएं कम दिखीं एवं युवाओं के लिए स्किल आधारित रोजगार नीति पर ज्यादा स्पष्टता नहीं है। महंगाई नियंत्रण पर कम फोकस देखने को मिला,आलोचकों का कहना है कि खाद्य महंगाई,ईंधन लागत,रोजमर्रा खर्च जैसे जनता से सीधे जुड़े मसलों पर बजट में सीधी राहत कम दिखती है।
विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा,स्वास्थ्य,सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च को बढ़ाया जा सकता था। सरकार इस बजट को विकास पर केंद्रित तो विपक्ष इसे कार्पोरेट फ्रेंडली निरूपित कर रहा है। इसमें युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार कमजोर ही नजर आई है। किसानों को आय की स्थायी सुरक्षा चाहिए,पर नहीं मिली।
जहाँ एक ओर बजट में भविष्य की चमक है,वहीं दूसरी ओर वर्तमान की कई ज्वलंत समस्याओं की अनदेखी भी की गई है। आलोचकों और विपक्ष द्वारा कहा जा रहा है कि निशुल्क योजनाओं के बजाए युवाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में सरकार पूरी तरह विफल ही दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर यह बजट लोगों की आशाओं के अनुरूप तो किसी भी दृष्टिकोण से दिखाई नहीं दे पा रहा है। इसमें सीनियर सिटीजन्स के लिए योजनाएं नगण्य ही हैं। अब सदा की तरह ही सत्ताधारी इसे लोक लुभावन तो विपक्ष निराशाजनक बजट निरूपित करेंगे,पर यक्ष प्रश्न तो यही खड़ा है कि क्या विपक्ष के द्वारा सक्षम मंच अर्थात देश की सबसे बड़ी पंचायत में सरकार को युवा,शिक्षा,स्वास्थ्य,कृषि,रोजगार आदि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने का प्रयास करेगा अथवा हर बार की तरह ही इस बार भी बहिर्गमन का आसान रास्ता अपनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेगा . . .
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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)
(साई फीचर्स)

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