“भारत में पहली बार! बाघ को लगेगा नकली दांत!, इजरायल टीम करेगी सर्जरी!, ऐतिहासिक Tiger Operation!”

भारत में पहली बार किसी बाघ की डेंटल सर्जरी होने जा रही है, जिसमें इजरायल की विशेषज्ञ टीम बाघ को नकली दांत लगाएगी। नागपुर के गोरेवाड़ा वाइल्डलाइफ़ रिसर्च सेंटर में होने वाला यह ऑपरेशन वन्य जीव संरक्षण और मेडिकल साइंस के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। टूटा दांत होने के कारण बाघ शिकार करने में अक्षम हो गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इस सर्जरी की ओर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं।

भारत में पहली बार बाघ की डेंटल सर्जरी: नागपुर में इजरायल टीम लगाएगी नकली दांत, वन्य जीव संरक्षण में ऐतिहासिक कदम

भारत में पहली बार बाघ की डेंटल सर्जरी: इतिहास रचने की तैयारी

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(लिमटी खरे)


लिमटी की लालटेन के 744वें एपीसोड में आज हम एक ऐसी अनोखी, रोमांचक और वैश्विक महत्व की खबर लेकर आए हैं, जिसने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह घटना वन्य जीव संरक्षण, मेडिकल साइंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का ऐसा संगम है, जिसे आने वाले वर्षों में एक मील का पत्थर कहा जाएगा।

महाराष्ट्र के नागपुर में पहली बार किसी बाघ को नकली दांत (डेंटल इम्प्लांट) लगाया जाने वाला है। यह सर्जरी इजरायल की विशेषज्ञ टीम मुफ्त में करेगी और पूरा खर्च भी वही उठाएगी। यह केवल मेडिकल उपलब्धि नहीं बल्कि वन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता की ऐतिहासिक मिसाल भी है।

बाघ की डेंटल सर्जरी क्यों जरूरी पड़ी?

मिली जानकारी के अनुसार जिस बाघ की सर्जरी होने वाली है, उसकी उम्र लगभग छह वर्ष है। कुछ समय पहले यह बाघ महाराष्ट्र के खापा क्षेत्र में भटकते हुए देखा गया था। वापस जंगल लौटते समय वह एक बिना मुंडेर वाले कुएं में गिर गया।
टीम ने उसे रेस्क्यू तो कर लिया, लेकिन परीक्षण में पता चला कि उसका एक दांत टूटा हुआ है।

यह दांत उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि—

  • बाघ शिकार करने में दांतों पर निर्भर रहता है
  • यह दांत उसके जबड़े की ताकत का प्रमुख हिस्सा था
  • टूटा दांत उसे शिकार के दौरान भारी नुकसान पहुंचा सकता था

वन विशेषज्ञों के अनुसार टूटा दांत होने से वह—

  • शिकार नहीं कर पाएगा
  • भूख से कमजोर हो जाएगा
  • आसान शिकार की तलाश में मानव बस्तियों पर हमला कर सकता है
  • दूसरे बड़े वन्य जीवों से संघर्ष में घायल हो सकता है

इसलिए बाघ को जंगल में छोड़ने से पहले डेंटल इंप्लांट जरूरी माना गया।

कहां होगी सर्जरी?इजरायल टीम क्यों आई है?

बाघ को गोरेवाड़ा वाइल्डलाइफ़ रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में रखा गया है, जहां विशेषज्ञों ने उसकी स्थिति का परीक्षण किया।

उधर नागपुर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान इजरायल के प्रसिद्ध डेंटल एक्सपर्ट:

  • डॉ. यानिव मेयर
  • डॉ. एयाल मिलमैन

भारत आए हुए थे।

जब उन्हें इस घायल बाघ के बारे में बताया गया तो उन्होंने तुरंत रुचि दिखाई। परीक्षण के बाद दोनों डॉक्टरों ने यह ऐतिहासिक सर्जरी करने की सहमति दे दी।

सबसे खास बात—

👉 वे इस पूरी सर्जरी को निशुल्क करेंगे और खर्च भी खुद उठाएंगे।

यह कदम वैश्विक स्तर पर पशु संरक्षण को नई दिशा देने वाला है।

क्या यह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ है?विशेषज्ञों की राय

इस मुद्दे पर दो तरह की राय सामने आई है।

सकारात्मक पक्ष

  • बाघ अपनी प्राकृतिक क्षमता वापस पा सकेगा
  • मानव बस्तियों में हमले का खतरा कम होगा
  • वन विभाग को नए समाधान मिलेंगे
  • इंटरनेशनल सहयोग की मिसाल बनेगी

नकारात्मक पक्ष

  • क्या वन्य जीवों में आधुनिक तकनीक का उपयोग उचित है?
  • क्या यह प्राकृतिक चयन में हस्तक्षेप है?
  • क्या इससे भविष्य में मानव हस्तक्षेप बढ़ेगा?

फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण सर्वोपरि है।
अगर विज्ञान का उपयोग किसी जीव को उसके प्राकृतिक जीवन में वापस लाने के लिए किया जाए, तो यह प्रकृति के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके हित में है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्त्व क्यों बढ़ गया?

यह पहली बार है जब—

  • किसी बाघ को भारत में डेंटल इंप्लांट लगाया जाएगा
  • यह ऑपरेशन विदेशी डॉक्टरों की टीम करेगी
  • पूरी प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क होगी
  • भारत और इजरायल मिलकर वन्य जीव चिकित्सा में ऐसा प्रयोग कर रहे हैं

इससे यह संदेश भी गया कि—

मानव और विज्ञान मिलकर प्रकृति की रक्षा भी कर सकते हैं।”

इससे पहले कौन-कौन सी दुर्लभ सर्जरी हुई हैं?

भारत में वन्य जीवों पर आधुनिक चिकित्सा के प्रयोग पहले भी हुए हैं, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम है।

2012 –ताड़ोबा कासाहेबरावबाघ

  • शिकारियों के फंदे में फंसकर पंजा बुरी तरह जख्मी
  • कार्बन फाइबर का कृत्रिम पैर लगाया गया
  • जर्मनी के एओ फाउंडेशन व IIT मुंबई का सहयोग

कर्नाटकभालू का नकली पैर

  • गंभीर चोट के बाद कृत्रिम टांग लगाई गई
  • सफल इलाज का उदाहरण

अब नागपुर में होने वाला डेंटल इंप्लांट इन्हीं उपलब्धियों की श्रृंखला को आगे बढ़ाता है।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है।

कुछ लोग इसे क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं—

  • “भारत वन्यजीव चिकित्सा में नई ऊंचाई छू रहा है।”
  • “इजरायल-इंडिया सहयोग का शानदार उदाहरण।”

वहीं कुछ लोग इसे प्रकृति में अनावश्यक हस्तक्षेप बता रहे हैं—

  • “क्या इंसानी तकनीक हर जगह जरूरी है?”
  • “क्या यह बाघ की प्राकृतिक क्षमता से खिलवाड़ है?”

फिर भी अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हैं।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो—

  1. बाघ का दांत उसकी जीवन रक्षा प्रणाली का प्रमुख हिस्सा है।
  2. शिकार के लिए उसकी शारीरिक बनावट को संपूर्ण रहना आवश्यक है।
  3. दांत टूटना केवल दर्द का मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन-मृत्यु का सवाल है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार—

  • डेंटल इंप्लांट जैसे उपचार जटिल जरूर हैं
  • लेकिन संपन्न देशों में यह तकनीक सफल रही है
  • जानवरों पर इसका प्रयोग ‘रिस्क’ ज़रूर है, पर संभावनाएं भी बेहद मजबूत हैं

भविष्य की संभावनाएं

यह ऑपरेशन सफल होता है तो—

  • भारत वन्य जीव चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है
  • घायल जानवरों के इलाज के नए रास्ते खुलेंगे
  • अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग बढ़ेगा
  • बाघ संरक्षण को अत्याधुनिक तकनीक से मजबूती मिलेगी

यह सर्जरी केवल एक बाघ का इलाज नहीं है, बल्कि भारत की वन चिकित्सा प्रणाली का भविष्य तय करने वाला कदम है।

8 निष्कर्ष (Conclusion)

नागपुर में होने जा रही यह डेंटल इंप्लांट सर्जरी भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है। यह दिखाता है कि विज्ञान, संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलकर वन्य जीव संरक्षण को नई दिशा दे सकते हैं। टूटे दांत वाला यह बाघ अब एक वैश्विक मेडिकल केस स्टडी बनने जा रहा है। उम्मीद है कि सर्जरी सफल होगी और बाघ जल्द ही अपनी प्राकृतिक क्षमता के साथ जंगल में स्वतंत्र जीवन जी सकेगा।

लिमटी की लालटेन 744

इतिहास में पहली बार होगी बाघ की डेंटल सर्जरी, नागपुर में लगाया जाएगा नकली दांत . . .

इजरायल का विशेष दल करेगा डेंटल इंप्लांट, भारत में होगा यह पहला अनूठा प्रयोग

(लिमटी खरे)

आज हम आपको एक ऐसी खबर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने देश ही नहीं वरन दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह खबर न केवल भारत वरन समूची दुनिया भर मे वन्य जीव संरक्षण, मेडिकल साईंस के साथ ही साथ इंटरनेशनल कॉलेबरेशन के क्षेत्र में एक अद्वितीय उदहारण बनने जा रही है।

दरअसल, यह खबर ही ऐसी है। भारत के नागपुर शहर में पहली बार किसी बाघ की डेंटल सर्जरी होने वाली है, जी हां, आपने सही सुना है, बाघ को नकली दांत लगाया जाने वाला है। इंसानों की तरह ही अब बाघ कभी डेंटल इंप्लांट सजर्री होगी, जिसे अंजाम देगी इजराईल से आने वाली विशेषज्ञों की टीम के द्वारा। इसका सकारात्मक पहलू भी है और नकारात्मक पहलू भी। सवाल यही है कि यह वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में एतिहासिक कदम माना जाएगा या प्रकृति के साथ छेड़छाड़  की श्रेणी में इसे रखा जाएगा।

बताया जा रहा है कि जिस बाघ को नकली दांत लगाया जाना है वह छः साल का बाघ है, जो अपने दांत टूट जाने के कारण शिकार करने मे अक्षम हो गया है। महाराष्ट्र के नागपुर जिले के गोरेवाड़ा में स्थित वाईल्ड लाईफ रिसर्च और प्रशिक्षण केंद्र में यह सर्जरी प्रस्तावित है। इजराईल के दल के द्वारा बाघ की सर्जरी न केवल निशुल्क की जा रही है वरन उस पर होने वाले खर्च का भोगमान को भी वे ही भोग रहे हैं।

आईए, अब हम आपको पूरा मामला क्या है यह बताते हैं। कुछ समय पहले एक बाघ भटककर महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर के पास खापा गांव की ओर दिखाई दिया। वहां से वापस जंगल लौटते समय वह बिना मुण्डेर वाले एक कुंए में गिर गया। रेस्क्यू के दौरान उसे सुरक्षित निकाल तो लिया गया पर यह पाया गया कि उसका एक दांत टूटा हुआ था। फिर क्या था बाघ को ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में रखा गया, उसके बाद उसे सेमिनारी हिल्स फैसलिटी के रास्ते गारेवाड़ा भेजा गया। उसका दांत कैसे टूटा यह बात अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

विशेषज्ञों की राय में बाघ अब शिकार नहीं कर सकता है और उसका जंगल में सरवाईव करना भी बहुत मश्किल ही प्रतीत हो रहा है। यही कारण है कि विशेषज्ञों ने इसको जंगल में छोड़ने के पहले डेंटल इम्प्लांट को बहुत जरूरी माना है। इसी बीच इंटरनेशलन कांफ्रेंस के चलते इजराईल के प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉ. यानिव मेयर और डॉ. एयाल मिलमैन के नेतृत्व में एक दल नागपुर आया हुआ था, इसी दौरान जब उन्हें यह बात बताई गई तो उन्होंने सतही बातें जानने के उपरांत उनके द्वारा द्वारा बाघ का परीक्षण कर सर्जरी के लिए अपनी सहमति दे दी।

चिकित्सकों और वन्य जीव विशेषज्ञों की संयुक्त राय में बाघ का दांत ही उसकी शिकार क्षमता का मूल आधार होता है। अगर उसका दांत नहीं होगा तो वह आसान शिकार की ताक में मानव बस्तियों के आसपास पहुंच सकता है। इसके अलावा दूसरे कमजोर जानवरों के साथ संघर्ष में उसकी जान भी जा सकती है।

भारत और इजराईल के संयुक्त आपरेशन को अगर वैश्विक नजरिए से देखा जाए तो यह महज एक सर्जरी नहीं है। यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है। इससे दो देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ होने की भी उम्मीद है। यह अपने आप में ऐतिहासिक इसलिए भी मानी जा सकती है क्योंकि पहली बार किसी बाघ के मामले में भारत व इजराईल एक साथ काम करेंगे। पहली बार किसी बाघ की डेंटल सर्जरी कर डेंटल इंप्लांट किया जाएगा। पहली बार किसी विदेशी चिकित्सक के द्वारा भारत में किसी वन्य जीव की निशुल्क सर्जरी की जाएगी। यहां सबसे अहम बात यह है क इजरायल के चिकित्सकों के द्वारा इसकी सैद्धांतिक सहमति देते समय ही कह दिया गया था कि इस पूरे आपरेशन को वे न केवल निशुल्क करेंगे वरन इसमें होने वाले सभी खर्च वे स्वयं ही वहन करेंगे।

आईए अब हम आपको बताते हैं कि इसके पहले कब कब वन्य जीवों से संबंधित दुर्लभ सर्जरी हुई हैं। 2012 के आसपास ताड़ोबा अंधेरी बाघ रिजर्व के पास शिकारियों के द्वारा लगाए गए फंदे में साहेबराव नामक बाघ का अगला दायां पंजा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे काटना पड़ा था। इससे उसे चलने में कठिनाई होती थी। नागपुर के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. संश्रुत बाभुलकर ने उसे गोद लिया और जर्मनी के एओ फाऊॅडेशन और आईआईटी मुंबई की तकनीकि सहायता के जरिए चार चरणों ंमें की गई सर्जरी में इस बाघ को मजबूत कार्बन फाइबर का कृत्रिम पैर लगाया गया था। इसके बाद कर्नाटक में एक भालू को इसी तरह नकली टांग लगाई गई थी।

नागपुर में होने जा रही यह डेंटल इम्प्लांट  सर्जरी सिर्फ एक बाघ के इलाज की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत में वन्यजीव चिकित्सा, उनके संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई दिशा तय कर सकती है। सोशल मीडिया पर यह बहस में यह मुद्दा भावनात्मक भी है, वैज्ञानिक भी और नीतिगत भी। आने वाले दिनों में यह सर्जरी सफल होती है या नहीं इस पर पूरे देश और दुनिया की नजर रहेगी। इससे एक संदेश यह भी प्रसारित हो रहा है कि इंसान अगर चाहे तो विज्ञान के माध्यम से उसके सकारात्मक पहलुओं के जरिए प्रकृति के संतुलन को बचाया और बनाया भी जा सकता है। जिस बाघ की यह सर्जरी होने वाली है वह महज एक जानवर नहीं है, वह वैश्विक वाईल्ड लाईफ मेडिकल हिस्ट्री बनने जा रहा है। उम्मीद है कि बाघ की सर्जरी सफल होगी, वह जल्द ही जंगल में पहले की तरह ही शिकार करता नजर आएगा . . .

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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)