(जीता प्रीतम)
गुवहाटी (साई)।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में प्रदेश के वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए कई बड़े फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में चीते की पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंस की पुनर्स्थापना से राज्य की जैव विविधता को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह प्रयास केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मध्यप्रदेश में जंगली भैंस की प्राकृतिक आबादी लगभग सौ वर्षों पहले समाप्त हो चुकी थी। वर्तमान समय में जंगली भैंसों की आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित है। छत्तीसगढ़ में भी कुछ जंगली भैंसे हैं, लेकिन उनकी संख्या अत्यंत सीमित है।
भारत सरकार और राज्य प्रशासन लंबे समय से विलुप्त प्रजातियों की पुनर्स्थापना पर कार्य कर रहे हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के आदान-प्रदान और प्रजनन योजना को आगे बढ़ाया है।
वर्तमान स्थिति
बैठक के दौरान असम से 50 जंगली भैंसे तीन साल में तीन समूहों में मध्यप्रदेश लाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही गेंडे का एक जोड़ा और तीन कोबरा भी प्रदेश में लाये जाएंगे। इन्हें भोपाल के वन विहार में रखा जाएगा।
मध्यप्रदेश से असम को एक जोड़ा टाइगर और छह मगरमच्छ दिये जाएंगे। यह आदान-प्रदान पारस्परिक समझ और वन्य जीव संरक्षण के हित में किया गया है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस पुनर्स्थापना से मध्यप्रदेश का पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक सशक्त होगा। राज्य पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में प्रसिद्ध है। चीते की सफल पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से वन्य जीव संरक्षण का एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
यह योजना न केवल वन्य जीवों के लिए लाभकारी है, बल्कि स्थानीय समुदायों और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी अवसर पैदा करेगी। वन्यजीव पर्यटन में वृद्धि, रोजगार सृजन और जैव विविधता की सुरक्षा इस योजना के मुख्य सामाजिक लाभ हैं।
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला कि कान्हा टाइगर रिज़र्व जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है। अध्ययन में निम्नलिखित कारकों का मूल्यांकन किया गया:
- घास के मैदान की गुणवत्ता और विस्तृत क्षेत्रों की उपलब्धता
- जल स्रोतों की पर्याप्तता
- मानव हस्तक्षेप की न्यूनता
- अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव का विश्लेषण
इस अध्ययन के आधार पर, पुनर्स्थापना की योजना चरणबद्ध और सुरक्षित ढंग से लागू की जाएगी।
आम जनता पर असर
जंगली भैंस की वापसी से स्थानीय लोगों को अनेक लाभ होंगे। इसके तहत:
- वन्य जीव पर्यटन में वृद्धि
- स्थानीय रोजगार में सुधार
- पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में सुधार
- जैव विविधता की सुरक्षा
स्थानीय वन विभाग ने भी योजना को सफल बनाने के लिए समुदायों के साथ सहयोग करने की तैयारी की है।
भविष्य की संभावनाएं
- तीन साल में पूरी तरह से 50 भैंसों का मध्यप्रदेश में पुनर्स्थापन
- गेंडे और कोबरा के प्रजनन के अवसर
- असम-मध्यप्रदेश वन्य जीव आदान-प्रदान का स्थायी मॉडल
- जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती
इस योजना से राज्य के वन्य जीव संरक्षण में नए मानक स्थापित होंगे और विलुप्त प्रजातियों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
8️⃣ निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में जंगली भैंस की पुनर्स्थापना न केवल प्रदेश की जैव विविधता को समृद्ध करेगी, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाएगी। यह प्रयास प्रशासन, वन्यजीव वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की समन्वित योजना का परिणाम है।
वन्य जीवों के सुरक्षित पुनर्वास और प्रजनन के इस मॉडल से देश में विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और असम के मुख्यमंत्री के सहयोग से यह योजना भविष्य में वन्य जीव संरक्षण और पर्यटन दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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