विकसित भारत @2047 के अनुरूप हों नगरीय विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिए व्यापक दिशा-निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप क्रियान्वित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निजी निवेश, सूचना प्रौद्योगिकी, हरित विकास और शहरी गतिशीलता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इससे प्रदेश के नगर आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।

(पी.के.बक्शी)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप क्रियान्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य का भारत तभी मजबूत बनेगा जब उसके शहर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित होंगे।

मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग, शहरी गतिशीलता और ई-वाहनों को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण आधारित विकास मॉडल अपनाने के निर्देश दिए।

भारत में शहरीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2047 तक देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। ऐसे में नगरों की आधारभूत संरचना, जल-सीवरेज व्यवस्था, परिवहन, आवास और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियां और भी जटिल होंगी।

मध्यप्रदेश जैसे भौगोलिक रूप से बड़े राज्य में शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति आवश्यक है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने अर्बन डेवलपमेंट कंपनी को एक रणनीतिक संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

वर्तमान स्थिति / Latest Developments

संचालक मंडल की बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन पर सहमति बनी —

  1. परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग
  2. सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग
  3. शहरी गतिशीलता प्रभाग
  4. नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण प्रभाग

इन प्रभागों का उद्देश्य नगरीय विकास को व्यावसायिक दक्षता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाना है।

परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग

इस प्रभाग के अंतर्गत —

  • नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति
  • जनहित परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन
  • हरित बांड, सोलर प्रोजेक्ट और अप्रयुक्त परिसंपत्तियों का वैकल्पिक उपयोग
  • मेट्रोपोलिटन क्षेत्र विकास योजना को प्राथमिकता

जैसे नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग

आईटी आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है, जिनमें शामिल हैं —

  • ई-नगर पालिका प्रणाली
  • जीआईएस आधारित निगरानी
  • ऑनलाइन कर और शुल्क संग्रहण
  • नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म का उन्नयन
  • सीसीटीवी आधारित शहरी सुरक्षा व्यवस्था

शहरी गतिशीलता प्रभाग

इस प्रभाग के अंतर्गत —

  • ईवी पॉलिसी का क्रियान्वयन
  • मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
  • रोपवे और मल्टी लेवल पार्किंग
  • सार्वजनिक साइकिल सेवा
  • ई-वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

को प्राथमिकता दी जाएगी।

नमामि नर्मदे और नदी संरक्षण

मुख्यमंत्री ने नर्मदा और तापी नदियों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए उनके समग्र विकास और संरक्षण के लिए “नमामि नर्मदे परियोजना” के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। इसमें —

  • ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • उपचारित जल का पुनः उपयोग
  • नदी तट क्षेत्रों का पर्यावरणीय सुधार

शामिल होंगे।

प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

इन फैसलों के प्रभाव बहुआयामी होंगे —

  • प्रशासनिक: नगरीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
  • सामाजिक: बेहतर आवास, स्वच्छता और परिवहन
  • आर्थिक: निजी निवेश से रोजगार और राजस्व में वृद्धि
  • पर्यावरणीय: नदियों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण

आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण

क्षेत्रअपेक्षित प्रभाव
निजी निवेशशहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि
आईटी आधारित सेवाएंप्रशासनिक पारदर्शिता
ई-वाहनप्रदूषण में कमी
नदी संरक्षणसतत विकास

ये संकेत दर्शाते हैं कि सरकार का फोकस केवल निर्माण नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास पर है।

आम जनता पर असर

नागरिकों को बेहतर जल आपूर्ति, सीवरेज, परिवहन, डिजिटल सेवाएं और स्वच्छ पर्यावरण मिलेगा। इससे जीवन स्तर सुधरेगा और शहर अधिक रहने योग्य बनेंगे।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

यदि योजनाएं समयबद्ध और पारदर्शी रूप से लागू होती हैं तो मध्यप्रदेश के नगर —

  • स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनेंगे
  • निवेश के आकर्षक केंद्र बनेंगे
  • पर्यावरण के अनुकूल विकास मॉडल प्रस्तुत करेंगे

यह राज्य को 2047 तक एक विकसित शहरी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।

8️⃣ निष्कर्ष /Conclusion

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश नगरीय विकास को एक नई सोच और दिशा प्रदान करते हैं। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के साथ शहरी योजनाओं का समन्वय प्रदेश को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाएगा। यदि यह मॉडल सफल रहा तो मध्यप्रदेश देश के लिए शहरी विकास का एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।