बिहार,यूपी के नतीजों की दुहाई देकर ममता ने सोनिया को दिखाई जगह . . .
राहुल के कदमतालों,विशेषकर सलाहकारों पर जताई ममता ने तल्ख नाराजगी और कहा . . .
(लिमटी खरे)
2014 के बाद से कांग्रेस जिस राजनीतिक अवसान की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, वह अब केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गया है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और गठबंधन नीति को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। सोनिया गांधी के 79वें जन्मदिन के अवसर पर संसद भवन में आयोजित समारोह के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने INDIA गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर कर दिया।
यह केवल एक जन्मदिन समारोह नहीं था, बल्कि विपक्षी राजनीति की दिशा, दशा और नेतृत्व संकट का प्रतीक बन गया। ममता बनर्जी द्वारा बिहार और उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों का हवाला देकर सोनिया गांधी को दी गई नसीहत ने कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर दिया।
कांग्रेस कभी भारतीय राजनीति की धुरी हुआ करती थी। लेकिन 2014 के बाद सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी लगातार आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। नेतृत्व का केंद्रीकरण राहुल गांधी के इर्द-गिर्द सिमट गया है, जबकि संगठनात्मक मजबूती, जमीनी कैडर और आक्रामक राजनीतिक रणनीति कमजोर पड़ती गई।
दूसरी ओर, क्षेत्रीय दल—विशेषकर तृणमूल कांग्रेस—ने अपने-अपने राज्यों में न केवल खुद को मजबूत किया बल्कि कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में भी सेंध लगाई। ममता बनर्जी खुद को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली विपक्षी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश में लगातार सक्रिय रही हैं।
सोनिया गांधी का जन्मदिन और राजनीतिक संदेश
09 दिसंबर को संसद भवन में सोनिया गांधी का 79वां जन्मदिन मनाया गया।
माहौल औपचारिक रूप से उत्सवपूर्ण था—
- केक काटा गया
- INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता मौजूद थे
- मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव प्रमुख रूप से दिखाई दिए
- राहुल और प्रियंका गांधी पीछे खड़े नजर आए
लेकिन इस समारोह के पीछे राजनीतिक संदेशों और असहजताओं की परतें छिपी थीं।
INDIA गठबंधन में टीएमसी की अनुपस्थिति का सवाल
समारोह के दौरान यह चर्चा तेज हो गई कि INDIA गठबंधन तब तक अधूरा है, जब तक तृणमूल कांग्रेस की सक्रिय भागीदारी नहीं हो।
सूत्रों के अनुसार—
- कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने टीएमसी नेताओं से संपर्क किया
- उन्हें कार्यक्रम में आने का आग्रह किया गया
- बाद में कुछ टीएमसी सांसद पहुंचे और सोनिया गांधी को बधाई दी
यहीं से घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।
ममता बनर्जी का फोन और सीधी सियासी बात
सूत्रों की मानें तो टीएमसी नेताओं से मिली जानकारी के बाद ममता बनर्जी ने सीधे सोनिया गांधी से फोन पर बातचीत की।
शुरुआती औपचारिक बधाई के बाद बातचीत ने राजनीतिक रूप ले लिया।
सोनिया गांधी ने कहा—
- देश लोकतांत्रिक संकट से गुजर रहा है
- विपक्षी एकता समय की मांग है
- पश्चिम बंगाल में महागठबंधन पर विचार होना चाहिए
लेकिन ममता बनर्जी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं दिखीं।
बिहार और यूपी के नतीजों की दुहाई
ममता बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कांग्रेस को आईना दिखाया।
उन्होंने कहा—
- बिहार में वामपंथियों के साथ गठबंधन का परिणाम क्या रहा
- यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस की स्थिति कितनी कमजोर रही
उन्होंने आंकड़ों के जरिए कांग्रेस की रणनीतिक विफलताओं को गिनाया—
- यूपी 2017: 114 सीटों पर लड़कर सिर्फ 7 जीत
- बिहार: 60 से अधिक सीटों पर लड़कर गिनती की जीत
ममता का साफ कहना था कि इन नतीजों के बाद कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति पर सवाल
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हकीकत भी सामने रखी—
- कांग्रेस का जमीनी कैडर कमजोर
- संगठनात्मक ढांचा लगभग निष्क्रिय
- चुनावी लड़ाई में टीएमसी का दबदबा
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कांग्रेस बंगाल में चुनाव लड़ना चाहती है तो उसे टीएमसी के कैडर और नेतृत्व के अंतर्गत ही लड़ना होगा।
राहुल गांधी और उनके सलाहकारों पर सीधा प्रहार
सूत्रों के अनुसार बातचीत का सबसे संवेदनशील हिस्सा राहुल गांधी को लेकर था।
ममता बनर्जी ने कहा—
- राहुल गांधी के सलाहकार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं
- निर्णय जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं
- कांग्रेस तेजी से राजनीतिक रसातल की ओर जा रही है
यह टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत थी, बल्कि कांग्रेस की रणनीतिक सोच पर सीधा हमला मानी जा रही है।
कांग्रेस के भीतर असहजता और खामोशी
इस बातचीत के बाद कांग्रेस नेतृत्व में असहजता साफ देखी गई।
सोनिया गांधी ने कथित तौर पर यह कहकर बातचीत समाप्त की—
“I will talk to Rahul…”
लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस वाकई आत्ममंथन के लिए तैयार है?
राजनीतिक प्रभाव और INDIA गठबंधन की चुनौती
इस घटनाक्रम के दूरगामी राजनीतिक प्रभाव हैं—
- INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल
- कांग्रेस की नेतृत्व क्षमता पर संदेह
- क्षेत्रीय दलों का बढ़ता आत्मविश्वास
- राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति का बिखराव
यदि कांग्रेस अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तो गठबंधन केवल कागजों तक सीमित रह सकता है।
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
संक्षेप में कांग्रेस की स्थिति—
- लगातार चुनावी हार
- घटता जनाधार
- कमजोर संगठन
- अस्पष्ट रणनीति
वहीं टीएमसी, सपा, राजद जैसे दल—
- अपने-अपने राज्यों में मजबूत
- जमीनी पकड़ सशक्त
- नेतृत्व स्पष्ट
यह असंतुलन ही टकराव की जड़ है।
आम जनता और विपक्षी राजनीति पर असर
आम मतदाता के लिए यह टकराव निराशाजनक है।
जो जनता मजबूत विपक्ष की उम्मीद कर रही थी, उसे आपसी कलह दिखाई दे रही है।
इसका सीधा असर—
- लोकतांत्रिक विमर्श पर
- सरकार के खिलाफ प्रभावी आवाज पर
- 2029 की राजनीतिक तैयारी पर
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
आगे की राह आसान नहीं—
- कांग्रेस को आत्ममंथन करना होगा
- नेतृत्व और सलाहकारों पर पुनर्विचार जरूरी
- गठबंधन में बराबरी और सम्मान का संतुलन बनाना होगा
अन्यथा, क्षेत्रीय दल कांग्रेस को केवल एक सहयोगी भर मानते रहेंगे, नेतृत्वकर्ता नहीं।
🧾 निष्कर्ष /Conclusion
सोनिया गांधी के जन्मदिन समारोह के बहाने सामने आई यह सियासी तल्खी दरअसल कांग्रेस की गहराती राजनीतिक संकट की तस्वीर है।
ममता बनर्जी की दो टूक बातें केवल चेतावनी नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए आत्मचिंतन का अवसर हैं।
यदि कांग्रेस समय रहते अपनी रणनीति, नेतृत्व और गठबंधन नीति पर पुनर्विचार नहीं करती, तो INDIA गठबंधन में उसकी भूमिका और भी सीमित होती चली जाएगी।
यह घटनाक्रम विपक्षी राजनीति के भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है।
मूल पाठ
2014 के बाद कांग्रेस किस रसातल में जाती जा रही है यह बात किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस में सत्ता की धुरी सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी के इर्दगिर्द आकर थम चुकी है। देश का मीडिया भी राहुल गांधी को नाकारा सिद्ध करने में कोई कसर नहीं रख रहा है, पर कांग्रेस के आलंबरदार और विभिन्न धड़े विशेषकर सोशल मीडिया सेल पूरी तरह निष्क्रिय ही नजर आ रहे हैं, या यूं कहें कि उन्हें राहुल की छवि की कोई परवाह नहीं रह गई है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा।
हाल ही में 09 दिसंबर को कांग्रेस की सुप्रीमो श्रीमति सोनिया गांधी का जन्म दिवस संसद भवन में मनाया गया। सोनिया गांधी का यह 79वां जन्म दिवस था, उनके सामने केक रखा हुआ था, इंडिया गठबंधन के अनेक बड़े नेताओं की उपस्थिति से राहुल व प्रियंका गदगद ही नजर आ रहे थे। सोनिया गांधी के बाजू में दायीं ओर मल्लिकार्जुन खड़गे का असान लगा था, तो उनके पास ही समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों अखिलेश यादव बैठे हुए थे। प्रियंका और राहुल उनके पीछे खड़े थे तो बाईं ओर वाली कुर्सी इन दोनों के लिए आरक्षित रखकर खाली रखी गई थी, ताकि अगर उनमें से कोई बैठना चाहे तो बैठ सके।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसी बीच यह खुसपुसाहट होने लगी कि इंडिया गठबंधन तो है पर वह त्रणमूल कांग्रेस की अनुपस्थिति में अधूरा ही नजर आ रहा है। कांग्रेस के नए उभरे खुद को चाणक्य के रूप में स्थापित करने की मंशा रखने वाले एक नेता ने त्रणमूल के कुछ सदस्यों को फोन करके वहां पहुंचने के लिए ताकीद किया। वैसे वहां का यह पूरा वातावरण पूरी तरह खुशगवार ही नजर आ रहा था, केक कटा, और सभी में बटा।
सूत्रों ने कहा कि केक बटने के साथ ही सोनिया गांधी को बधाईयों का सिलसिला आरंभ हो गया, इसी बीच त्रणमूल के कुछ सदस्य वहां पहुंचे और उन्होंने सोनिया गांधी को बधाई दी। वहीं, पास खड़ी प्रियंका वढ़ेरा ने उनका आभार व्यक्त करने हुए कहा कि आप आए बहुत अच्छा लगा, पर क्या आप सब नहीं जानते कि उनके पिता (राजीव गांधी) की सबसे प्रिय रहीं हैं ममता बनर्जी, और ममता बनर्जी ने सोनिया जी को बधाई तक नहीं दी!
सूत्रों की मानें तो त्रणमूल के एक नेता ने कोने में जाकर बातचीत का पूरा ब्यौरा त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को सुना दिया, फिर क्या था ममता बनर्जी के फोन की घंटी सोनिया गांधी के फोन पर गनगना उठी। बधाई के आदान प्रदान के तुरंत बाद ही सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी से सीधे राजनैतिक बातचीत आरंभ कर दी। सोनिया गांधी ने कहा कि आप तो जानती हैं, कि वर्तमान में देश राजनैतिक तौर पर संक्रमण काल से गुजर रहा है, और डेमोक्रेसी अंडर थ्रेट है। यह समय हम सबके साथ आने का है। हमें बंगाल में एक महागठबंधन बनाने पर विचार करना चाहिए।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि सोनिया गांधी का सीधे सियासी बातचीत करना ममता बनर्जी को शायद नगवार गुजरा और उन्होंने कहा कि पहले आप तय कर लीजिए कि आप किसके साथ हैं। बिहार में आप वामपंथियों के साथ मिलकर लड़े! इस पर सोनिया गांधी ने कहा कि बिहार के अनुभव के आधार पर ही वे बात कर रहीं हैं और पश्चिम बंगाल में अगर 30 – 40 सीट भी वे दे देंगी तो भी पर्याप्त होगा।
सूत्रों ने यह भी बताया कि इसके जवाब में ममता बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि आप पहले आत्ममंथन कीजिए कि यूपी बिहार में अखिलेश और तेजस्वी ने आपका क्या हाल कर दिया है। 2017 में आपने अखिलेश से लड़ झगड़कर 114 सीट लीं और विजयश्री का वरण किया सिर्फ 07 पर, बिहार में आप 61 पर चुनाव लड़े और जीते सिर्फ आधा दर्जन। ऐसी स्थिति में आप यह विचार भी करें कि पश्चिम बंगाल में आपका काडर तो है नहीं, अगर आपको लड़ना है तो आपको हमारे काडर के नीचे आकर ही लड़ना होगा।
इतना हीं नहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी को यह भी कह दिया कि वे राहुल गांधी के सलाहकार बदल दें, क्योंकि राहुल गांधी के सलाहकार ही राहुल गांधी की छवि पर न केवल बट्टा लगवा रहे हैं, वरन कांग्रेस को रसातल की ओर तेजी से अग्रसर करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी से भी गठबंधन करने के पहले वे आत्ममंथन अवश्य करें . . ., फिर क्या था, सोनिया गांधी ने यह कहकर फोन रख दिया कि आई विल टॉक टू राहुल . . .
(साई फीचर्स)

43 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. दिल्ली, मुंबई, नागपुर, सिवनी, भोपाल, रायपुर, इंदौर, जबलपुर, रीवा आदि विभिन्न शहरों में विभिन्न मीडिया संस्थानों में लम्बे समय तक काम करने का अनुभव, वर्तमान में 2008 से लगातार “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” के ‘संस्थापक संपादक’ हैं. 2002 से लगातार ही अधिमान्य पत्रकार (Accredited Journalist) हैं एवं नई दिल्ली में लगभग एक दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता के दौरान भी अधिमान्य पत्रकार रहे हैं.
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