सिवनी की सुखतरा हवाई पट्टी पर नाइट लैडिंग की सुविधा ही नहीं, फिर सूर्यास्त के बाद कैसे उड़ा प्रशिक्षु पायलट का विमान?

सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी पर नाइट लैडिंग की व्यवस्था नहीं होने के बावजूद प्रशिक्षु पायलट का विमान सूर्यास्त के बाद आसमान में कैसे था, यह बड़ा सवाल बन गया है। घटना के बाद प्रशासन और नागरिक उड्डयन विभाग की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। जनता की मांग है कि रेडबर्ड पायलट प्रशिक्षण संस्थान से जुड़े सभी दस्तावेज अब सार्वजनिक किए जाएं। यह मामला जिले की सुरक्षा, नियमों और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर बहस खड़ी करता है।

प्रशासन से दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग तेज, सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी पर नाईट लैडिंग की व्यवस्था नहीं, फिर सूर्यास्त के बाद कैसे उड़ान भर रहा था प्रशिक्षु पायलेट का विमान!
रेडबर्ड पायलेट प्रशिक्षण संस्थान की सभी अनुमतियों के दस्तावेज लेकर उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए जिला एवं पुलिस प्रशासन को . . .


सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी एक बार फिर चर्चा में है। कारण—एक प्रशिक्षु पायलट का विमान सूर्यास्त के बाद उड़ान भरता हुआ पाया गया, जबकि इस एयरस्ट्रिप पर नाइट लैडिंग या नाइट टेक-ऑफ की कोई व्यवस्था मौजूद ही नहीं है। इस घटना ने न केवल सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं।

घटना के बाद से जिले में कई प्रकार की चर्चाएँ, सवाल और आंकलन चल रहे हैं। नागरिकों, स्थानीय संगठनों और एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एयरस्ट्रिप पर नाइट ऑपरेशन की सुविधा नहीं है, तो सूर्यास्त के बाद किसी भी विमान का उड़ान में होना विमानन नियमों का सीधा उल्लंघन है। यह केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि संभावित खतरे को आमंत्रण देने जैसा था।

👉 सुखतरा हवाई पट्टीसीमाएं,सुविधाएँ और तकनीकी वास्तविकताएँ

सिवनी की सुखतरा हवाई पट्टी अपने आप में एक छोटी, सीमित क्षमताओं वाला एयरफील्ड है। इसे प्राथमिक रूप से प्रशिक्षण, छोटे चार्टर और आपातकालीन उड़ानों के लिए उपयोग किया जाता है। यहां—

  • नाइट लैडिंग लाइट्स
  • रनवे एंड लाइट्स
  • टैक्सी-वे लाइट्स
  • PAPI सिस्टम
  • एप्रोच लाइटिंग
  • कंट्रोल टावर नाइट ऑपरेशन

जैसी तकनीकी सुविधाएँ कभी स्थापित ही नहीं की गईं

अर्थात, नियमानुसार यहाँ सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार की टेकऑफ या लैंडिंग की अनुमति नहीं होती

लेकिन सवाल अब यह उठ रहा है कि:

यदि नाइट लैडिंग नहीं,तो सूर्यास्त के बाद विमान आसमान में कैसे था?

क्या वह किसी अन्य एयरस्ट्रिप से यहां आया?
क्या वह किसी अन्य रूट पर था और दिन के समय लौटना था लेकिन देरी हुई?
या फिर प्रशासन को जानकारी दिए बिना प्रशिक्षण संस्थान ने उड़ान संचालन कर लिया?

इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण हैं और यही कारण है कि घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

👉 नियम क्या कहते हैं?

भारतीय नागरिक उड्डयन नियम (DGCA CAR) स्पष्ट करते हैं कि:

  • बिना नाइट लैडिंग सुविधा के एयरस्ट्रिप पर सूर्यास्त के बाद उड़ान संचालन प्रतिबंधित है।
  • प्रशिक्षु पायलटों द्वारा नाइट फ्लाइंग केवल उन एयरस्ट्रिप/एयरपोर्ट पर की जा सकती है, जो नाइट ऑपरेशन के लिए प्रमाणित हों।
  • प्रशिक्षण संस्थान को हर उड़ान के लिए लॉगबुक, ATC सूचना, और फ्लाइट प्लान तैयार रखना अनिवार्य है।

यदि इनमें से कोई नियम टूटता है, तो DGCA तत्काल जांच का अधिकार रखता है।

👉 क्या रेडबर्ड प्रशिक्षण संस्थान ने सभी नियमों का पालन किया था?

इस प्रश्न का उत्तर अब तक धुंधला है। यही कारण है कि जनता की मांग है कि:

रेडबर्ड पायलट प्रशिक्षण संस्थान से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँ:

  • DGCA से प्राप्त अनुमतियाँ
  • फ्लाइंग परमिट
  • नाइट फ्लाइंग की अनुमति है या नहीं
  • प्रशिक्षु पायलटों के लिए जारी निर्देश
  • सुखतरा एयरस्ट्रिप के संचालन मानक
  • पिछले 2 वर्षों की उड़ान लॉगबुक
  • सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट
  • मेंटेनेंस रिकॉर्ड

यदि ये दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं, तभी यह स्पष्ट होगा कि विमान सूर्यास्त के बाद हवा में क्यों और कैसे था।

👉 सूर्यास्त के बाद उड़ानतकनीकी रूप से कितना खतरनाक?

सुखतरा जैसी छोटी एयरस्ट्रिप पर नाइट ऑपरेशन की सुविधा न होने का बड़ा कारण है—सुरक्षा।

यदि विमान को अचानक तकनीकी समस्या हो जाए,तो?

  • पायलट को runway दिखाई नहीं देगा
  • आपातकालीन लैंडिंग असंभव
  • प्रकाश व्यवस्था न होने से दिशा भ्रम की संभावना
  • रनवे की सीमा पहचानना मुश्किल
  • आसपास के जंगल व ऊँचाई वाले क्षेत्र खतरा बढ़ाते हैं

विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी स्थिति में प्रशिक्षु पायलट को उड़ान कराना एविएशन रिस्क है।

👉 प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय लोग यह भी पूछ रहे हैं:

1 क्या प्रशासन को इस उड़ान के बारे में जानकारी थी?

2 यदि नहीं,तो बिना सूचना के उड़ान भरना कैसे संभव हुआ?

3 यदि जानकारी थी,तो नाइट ऑपरेशन की सुविधा न होने पर अनुमति क्यों दी गई?

4 उड़ान लॉगबुक की जांच कब और कैसे होगी?

इन सवालों पर कोई आधिकारिक जवाब अभी तक नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा रहा है।

👉 सिवनी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासनकौन करेगा जवाब?

जिले के नागरिकों और कई सामाजिक संगठनों की मांग है कि:

प्रशासन को तुरंत

  • सभी अनुमतियों के दस्तावेज
  • एयरस्ट्रिप संचालन के नियम
  • DGCA द्वारा दी गई प्रमाणिक जानकारी
  • रेडबर्ड इंस्टिट्यूट के लाइसेंस
  • प्रशिक्षु पायलटों के नाइट फ्लाइंग रिकॉर्ड
  • इस उड़ान का फ्लाइट प्लान

सार्वजनिक करने चाहिए।

जवाबदेही से कोई बच न सके, इसके लिए दस्तावेजों की पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

👉 इलाके में पिछले घटनाक्रम भी चिंता बढ़ाते हैं

उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षण विमान पहले भी सिवनी क्षेत्र में दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। लगातार होने वाली घटनाएं संकेत देती हैं कि:

  • प्रशिक्षण मानकों में खामियाँ हैं
  • फ्लाइट सुपरविजन कमजोर है
  • तकनीकी मॉनिटरिंग पर्याप्त नहीं
  • प्रशासनिक नियंत्रण कागज़ी स्तर पर सीमित है

यह घटनाएँ किसी बड़े हादसे का संकेत न बन जाएँ, इसके लिए समय रहते जांच जरूरी है।

👉 स्थानीय नागरिकों में बढ़ती चिंता

सुखतरा गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बिल्कुल स्वाभाविक है।

लोगों का कहना है कि—

  • रोज़ाना कम ऊँचाई पर उड़ते प्रशिक्षण विमान
  • रात में बिना अनुमति की उड़ान
  • बार-बार होने वाली तकनीकी गड़बड़ियाँ
  • अचानक तेज आवाज़ वाले इंजन
  • दुर्घटना की आशंकाएँ

इन सबने ग्रामीणों में डर की भावना पैदा कर दी है।

कुछ नागरिकों ने तो सोशल मीडिया पर भी लिखा कि यदि प्रशासन कदम नहीं उठाता, तो वे सामूहिक रूप से इस मामले को उच्च स्तर पर उठाने को मजबूर होंगे।

👉 विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटनाओं और अनियमितताओं की घटनाएँ तब बढ़ती हैं जब—

  • अनुमति की प्रक्रिया ढीली हो
  • निरीक्षण नियमित न हो
  • प्रशिक्षण संस्थान के रिकॉर्ड जांच न किए जाएँ
  • एयरस्ट्रिप मानकों का अपडेट न हो
  • पायलट मॉनिटरिंग अपर्याप्त हो

उनका कहना है कि रात में उड़ान भरना या उड़ना, जब एयरस्ट्रिप नाइट ऑपरेशन के लिए प्रमाणित नहीं है, सुरक्षा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है।

👉 क्याDGCAकी भूमिका जांच के दायरे में आएगी?

DGCA हर प्रशिक्षण संस्थान और एयरस्ट्रिप की वार्षिक समीक्षा करता है, लेकिन—

  • क्या सुखतरा एयरस्ट्रिप की पिछली समीक्षा रिपोर्ट उपलब्ध है?
  • क्या किसी तकनीकी कमी को नोट किया गया था?
  • क्या रेडबर्ड संस्थान को चेतावनी या निर्देश जारी किए गए थे?

ये सभी तथ्य स्पष्ट होने चाहिए।

यदि संस्था पहले से ही निगरानी में थी, और फिर भी सूर्यास्त के बाद उड़ान का मामला सामने आया, तो यह गंभीर लापरवाही का संकेत है।

👉 प्रशासन यदि दस्तावेज़ सार्वजनिक करे,तो क्या स्पष्ट होगा?

दस्तावेज़ों से ये बातें साफ हो जाएंगी:

एयरस्ट्रिप की नाइट ऑपरेशन स्थिति क्या है?

प्रशिक्षण संस्थान की वास्तविक अनुमति क्या है?

क्या नाइट फ्लाइंग की परमिशन है या नहीं?

विमान का वास्तविक फ्लाइट प्लान क्या था?

कौन पायलट था और प्रशिक्षक कौन था?

विमान में तकनीकीfaultतो नहीं था?

एक बार दस्तावेज़ सामने आ जाएँ, तभी यह स्पष्ट होगा कि उड़ान सामान्य थी या नियमों का खुला उल्लंघन।

👉 जनता की आवाज़: प्रशासन पारदर्शी बने

आज जनता की अपेक्षा बहुत साफ है:

  • जब मामला सुरक्षा से जुड़ा हो
  • जब छात्र-पायलट प्रशिक्षण की बात हो
  • जब विमान दुर्घटनाएँ पहले भी हो चुकी हों

तो प्रशासन को पारदर्शिता दिखानी ही होगी।

दस्तावेज़ छिपाने से अविश्वास बढ़ता है,पारदर्शिता से भरोसा बनता है।”

👉 Conclusion /निष्कर्ष

सुखतरा हवाई पट्टी का मामला केवल एक तकनीकी प्रश्न नहीं, बल्कि सुरक्षा, नियमों और प्रशासनिक ईमानदारी से जुड़ा विषय है।
सूर्यास्त के बाद उड़ान भरता मिला प्रशिक्षण विमान गंभीर संदेह पैदा करता है।
जब एयरस्ट्रिप पर नाइट लैडिंग सुविधा ही नहीं है, तो प्रशिक्षण विमान का रात के समय उड़ना—
नियमों,व्यवस्था और जवाबदेहीतीनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पारदर्शिता की मांग उचित है।
जब तक जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नागरिक उड्डयन विभाग सभी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करते, तब तक यह विवाद शांत नहीं होगा।

जीवन और सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं—इसलिए जांच और जवाबदेही दोनों अनिवार्य हैं।