2025 में तीसरी बार क्रेश हुआ रेडबर्ड का ट्रेनी विमान, डीजीसीए का दल पहुंचा मौके पर जांच हेतु
डीजीसीए कर चुका है साल भर पहले कंपनी को ग्राऊॅडेड!, विमान के टेकऑफ लेण्डिग की अनुमति है अथवा नहीं संशय बरकरार! सूर्यास्त के बाद उड़ान भर रहा था प्रशिक्षु पायलट्स का विमान . . .
देश की विमानन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। वर्ष 2025 के भीतर रेडबर्ड कंपनी के ट्रेनी विमान का यह तीसरा बड़ा क्रैश है, जिसने देशभर में एयर ट्रेनिंग और एविएशन इंस्टीट्यूट्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना के तुरंत बाद डीजीसीए (DGCA) का विशेष दल मौके पर पहुंचा और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार, विमान की उड़ान और प्रशिक्षण संबंधी कई बिंदु संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है।
🔶 ग्राउंडेड कंपनी का विमान फिर कैसे उड़ा?बड़ा सवाल
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि रेडबर्ड कंपनी को लगभग एक वर्ष पहले हीDGCAद्वारा ग्राउंडेड किया जा चुका था।
यह आदेश कंपनी की सुरक्षा नीतियों, पायलट ट्रेनिंग प्रोटोकॉल और तकनीकी खामियों के कारण जारी किया गया था।
लेकिन इसके बावजूद भी—
- विमान उड़ान पर कैसे गया?
- किसने अनुमति दी?
- क्या यह उड़ान अधिकृत थी?
- टेकऑफ और लैंडिंग क्लियरेंस किस आधार पर मिली?
इन सभी सवालों के जवाब अभी अस्पष्ट हैं और जांच एजेंसियों के पास भी इसका सीधा उत्तर नहीं है।
🔶 सूर्यास्त के बाद प्रशिक्षण उड़ान—नियमों का उल्लंघन?
एविएशन गाइडलाइंस में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रशिक्षु पायलट (Trainee Pilot) आमतौर पर दिन के समय ही उड़ान भरते हैं।
लेकिन इस घटना में विमान को सूर्यास्त के बाद उड़ान भरता देखा गया, जो अपने-आप में गहरे संशय की स्थिति पैदा करता है।
विमानन मानकों के अनुसार—
- नाइट फ्लाइंग के लिए विशेष अनुमति आवश्यक
- प्रशिक्षु पायलट के लिए अतिरिक्त योग्यता अनिवार्य
- प्रशिक्षक (Instructor) की मौजूदगी जरूरी
- रनवे और एटीसी (ATC) से दोहरी अनुमति जरूरी
ऐसे में सूर्यास्त के बाद उड़ान के पीछे क्या वजह थी—इस पर भी DGCA अलग से जांच कर रही है।
🔶 प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी बढ़ाते हैं उलझन
घटना स्थल के आसपास मौजूद लोगों के मुताबिक विमान असामान्य ऊंचाई और अस्थिर गति के साथ उड़ रहा था।
कई लोगों ने बताया कि विमान में कंपन (Vibrations) और इंजन से हल्की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे यह अंदेशा गहरा हो गया कि तकनीकी खराबी उड़ान से पहले ही मौजूद थी।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है:
- उड़ान असामान्य रूप से नीचे
- पायलट द्वारा संतुलन बरकरार रखने की कोशिश
- तेज झटकों के बाद अचानक गिरावट
उनकी इन बातों ने तकनीकी खराबी की आशंका को और मजबूत कर दिया है।
🔶 जांच दल के प्राथमिक निष्कर्ष—क्या मिला?
DGCA अधिकारियों ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण हिस्से बरामद किए हैं, जिनमें—
- इंजन के जले हुए कंपोनेंट
- फ्यूल सिस्टम के असामान्य अवशेष
- कॉकपिट नियंत्रण पैनल के टूटे हिस्से
- नेविगेशन मॉड्यूल के क्षतिग्रस्त पार्ट
यह सब इस बात का संकेत देता है कि विमान में तकनीकी खराबी, अपर्याप्त मेंटेनेंस और प्रोटोकॉल उल्लंघन की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं।
🔶 पिछले दो हादसों ने भी कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे
2025 के भीतर रेडबर्ड के दो अन्य हादसे भी सामने आए थे, जिनमें—
- एक इंजन फेल होने की घटना
- दूसरे में रनवे से फिसलकर आपात लैंडिंग
- प्रशिक्षु पायलटों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती शिकायतें
इन घटनाओं ने ही आखिरकार DGCA को कंपनी को ग्राउंडेड करने का निर्णय लेने पर मजबूर किया था।
लेकिन उसके बाद भी विमान उड़ान भरता रहा—यह और भी बड़ी चिंता का विषय है।
🔶 पायलट ट्रेनिंग सिस्टम पर गंभीर प्रश्न
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ती पायलटों की मांग के कारण कई ट्रेनिंग संस्थान—
- मानकों से समझौता
- अपर्याप्त निगरानी
- मेंटेनेंस में लापरवाही
- प्रशिक्षु उड़ानों के नियमों का उल्लंघन
जैसी गंभीर गलतियों में संलिप्त पाए जाते हैं।
यदि इस मामले में यह सिद्ध हो गया कि बिना अनुमति उड़ान भरी गई थी, तो यह घटना पायलट ट्रेनिंग सिस्टम की खामियों को उजागर कर देगी।
🔶 क्याDGCAसख्त कार्रवाई करेगी?
जांच दल ने स्पष्ट किया है कि—
- नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
- कंपनी के लाइसेंस की समीक्षा
- सुरक्षा मानकों का पुनर्मूल्यांकन
जैसे कदम जल्द उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मत है कि लगातार हो रहे हादसे संकेत देते हैं कि एविएशन सेक्टर में सुरक्षा प्रबंधन की पुनर्समीक्षा आवश्यक है।
🔶 जनता में भय और आक्रोश—क्या ट्रेनिंग संस्थानों पर भरोसा घट रहा है?
लगातार हो रहे हादसों ने लोगों के मन में यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि—
क्या भारत में पायलट ट्रेनिंग सुरक्षित है?
क्या प्रशिक्षु सही मानकों के अनुसार प्रशिक्षित किए जाते हैं?
क्या कंपनियां सुरक्षा नियमों का पालन करती हैं?
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बड़ी संख्या में प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जिसमें लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
🔶 विमानन सुरक्षा पर विशेषज्ञों की राय
विमानन विश्लेषकों के अनुसार—
- नियमित निरीक्षण
- कठोर मानक
- पारदर्शी ट्रेनिंग सिस्टम
- तकनीकी अपग्रेडेशन
की आवश्यकता अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
उनका कहना है कि दुर्घटनाओं की श्रृंखला यह स्पष्ट करती है कि भारत के एविएशन ट्रेनिंग सेक्टर में व्यापक सुधार की जरूरत है।
⭐ Conclusion /निष्कर्ष
2025 में रेडबर्ड कंपनी के ट्रेनी विमान का तीसरी बार क्रैश होना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे एविएशन ट्रेनिंग सिस्टम के लिए एक चेतावनी है।
DGCA की जांच कई गंभीर बिंदुओं को उजागर कर सकती है, जिनमें—
- सूर्यास्त के बाद उड़ान
- पूर्व में लागू ग्राउंडिंग आदेश का उल्लंघन
- तकनीकी खराबी
- सुरक्षा मानकों में लापरवाही
जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशिक्षु पायलटों की सुरक्षा, एयर ट्रेनिंग संस्थानों के संचालन और विमानों की तकनीकी जांच से जुड़े नियमों का पुनर्मूल्यांकन अब अपरिहार्य है।
भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार, DGCA और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स को मिलकर कठोर और सुदृढ़ कदम उठाने होंगे।
(साई फीचर्स)

43 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. दिल्ली, मुंबई, नागपुर, सिवनी, भोपाल, रायपुर, इंदौर, जबलपुर, रीवा आदि विभिन्न शहरों में विभिन्न मीडिया संस्थानों में लम्बे समय तक काम करने का अनुभव, वर्तमान में 2008 से लगातार “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” के ‘संस्थापक संपादक’ हैं. 2002 से लगातार ही अधिमान्य पत्रकार (Accredited Journalist) हैं एवं नई दिल्ली में लगभग एक दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता के दौरान भी अधिमान्य पत्रकार रहे हैं.
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