भोपाल में विरासत और विकास का संगम: 9 नए भव्य द्वार बनाए जाएंगे, मुख्यमंत्री ने कहा—राजधानी को मिलेगा नया सांस्कृतिक स्वरूप

भोपाल में विरासत और विकास के सम्मिलित स्वरूप को मजबूत करने के लिए 9 भव्य द्वारों के निर्माण की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ये द्वार महान महापुरुषों की ऐतिहासिक धरोहर को आधुनिक विकास से जोड़ेंगे। अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री ने शहर की पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के संकल्प पर जोर दिया। कार्यक्रम में हाज़िर जनप्रतिनिधियों ने इसे राजधानी के सांस्कृतिक वैभव को सशक्त करने वाली पहल बताया।

राजधानी में सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की नई पहल

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। राजधानी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को और अधिक जीवंत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में घोषणा की कि भोपाल शहर के प्रमुख मार्गों पर 9भव्य विरासत-द्वार निर्मित किए जाएंगे। इन द्वारों का नाम देश और प्रदेश के महान महापुरुषों, राजा-महाराजाओं, धार्मिक व्यक्तित्वों और ऐतिहासिक नायकों पर आधारित होगा।

सरकार का यह निर्णय राजधानी को सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध और आधुनिक विकास के साथ संगठित करने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

महापुरुषों के नाम पर बनेंगे9द्वार: राजधानी को मिलेगा नया सांस्कृतिक आयाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में जिन 9 द्वारों का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, उनमें निम्नलिखित महापुरुषों और व्यक्तित्वों की विरासत को शामिल किया जाएगा—

  • भगवान श्रीराम
  • भगवान श्रीकृष्ण
  • सम्राट अशोक
  • सम्राट विक्रमादित्य
  • राजा भोज
  • अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महापुरुष

इन द्वारों का स्वरूप पूरी तरह से भारतीय कला,शिल्प और स्थापत्य पर आधारित होगा, जिससे भोपाल की पहचान और अधिक विशिष्ट और प्रभावशाली बन सकेगी।

राजा भोज और सम्राट विक्रमादित्य की ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक हजार वर्ष पूर्व राजा भोज के शासनकाल की स्मृति में भोजनर्मदा द्वार का भूमि-पूजन पहले ही किया जा चुका है। अब दो वर्ष की सरकारी अवधि पूर्ण होने पर 13 दिसम्बर को सम्राट विक्रमादित्य द्वार का भूमि-पूजन भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने व्यक्त की विरासत संरक्षण की प्रतिबद्धता

डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि राजधानी के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। उनका कहना था कि—

“विरासत और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। आधुनिकता तभी सार्थक है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की परियोजनाओं में विरासत को सहेजने और सौंदर्यीकरण को मुख्य आधार बनाया जाएगा।

डॉ. अंबेडकर के निर्वाण दिवस पर किया गया स्मरण

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को निर्वाण दिवस पर नमन करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय लोकतांत्रिक ढांचा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—

“आज एक चाय बेचने वाले व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बन सकता है और एक साधारण परिवार का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है। यही हमारे लोकतंत्र की शक्ति है।”

यह बयान सामाजिक परिवर्तन और अवसर की समानता को रेखांकित करता है, जिसे मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक मजबूती की नींव बताया।

सनातन परंपरा और गौमाता पर मुख्यमंत्री के विचार

सभा में मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति और गौमाता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौवंश केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था का अहम आधार भी है।

उन्होंने कहा—

  • गौशाला संचालकों को सरकार आवश्यक सहयोग देगी।
  • मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना के माध्यम से गौपालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

विकास का नया मॉडल: विधायक रामेश्वर शर्मा का वक्तव्य

विधायक रामेश्वर शर्मा ने समारोह में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत किया है जिसमें विरासत और आधुनिकता का असाधारण संतुलन है।

उनके अनुसार—

  • भोपाल शहर में प्रवेश करते ही अब यात्रियों को सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव होगा।
  • विभिन्न द्वारों की डिज़ाइन भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रतिबिंबित करेगी।
  • मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भोपाल से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु सहित कई शहरों के लिए नई विमान सेवाएँ शुरू हुई हैं।

विधायक ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन से आने वाले मुख्यमंत्री ने सुशासन की जो परंपरा आगे बढ़ाई है, वह प्रदेश के लिए सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही है।

सांस्कृतिक,धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित द्वारक्या होगा स्वरूप?

प्रस्तावित द्वारों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा—

1.धार्मिक विरासत

  • भगवान श्रीराम
  • भगवान श्रीकृष्ण
  • सनातन संस्कृति से जुड़े प्रतीक

2.ऐतिहासिक और राजनीतिक महापुरुष

  • सम्राट अशोक
  • सम्राट विक्रमादित्य
  • राजा भोज

3.सांस्कृतिक पहचान एवं कला-साहित्य के स्तंभ

  • मध्यप्रदेश की धरोहरों से जुड़े प्रतीक
  • सांची के स्तूप और प्राचीन स्थापत्य कला की झलक

इन सभी द्वारों का उद्देश्य राजधानी के नागरिकों और आगंतुकों को एक ऐसी सांस्कृतिक अनुभूति प्रदान करना है जो एक ओर अतीत से जोड़ती है और दूसरी ओर विकास की दिशा में प्रेरित करती है।

कार्यक्रम में नागरिकों का अभिनंदन और संवाद

हुजूर विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों ने मुख्यमंत्री के दो वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें गजमाला पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से संवाद करते हुए कहा कि—

  • मुख्यमंत्री निवास केवल सरकार का नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं और जनता का घर है।
  • जनता का विकास ही शासन की असली उपलब्धि है।

नागरिकों ने भी क्षेत्र में जारी विकास कार्यों और नई परियोजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।

प्रमुख बिंदु (Bullet Points)

  • भोपाल में महापुरुषों के नाम पर9भव्य द्वार बनाए जाएंगे।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि ये द्वार विरासत और विकास दोनों को नई पहचान देंगे।
  • डॉ. अंबेडकर के निर्वाण दिवस पर मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया।
  • विधायक शर्मा के अनुसार—डॉ. यादव ने “विरासत + विकास मॉडल” पेश किया है।
  • सम्राट विक्रमादित्य द्वार का भूमि-पूजन 13 दिसंबर को किया जाएगा।
  • गौपालन व सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यों को सरकार बढ़ावा देगी।
  • भोपाल से विभिन्न महानगरों के लिए नई एयर सेवाएँ शुरू हुई हैं।
  • सभी द्वारों में भारतीय संस्कृति, स्थापत्य और विविधता को विशेष स्थान मिलेगा।
  • नागरिकों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन कर क्षेत्र के विकास की सराहना की।

निष्कर्ष /Conclusion

भोपाल में प्रस्तावित 9 विरासत-द्वार केवल स्थापत्य संरचनाएँ नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और समकालीन विकास का प्रतीक बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जनप्रतिनिधियों के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि यह परियोजना राजधानी की पहचान को वैश्विक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर मजबूत करेगी।

ऐसी परियोजनाएँ न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं बल्कि नागरिकों में सांस्कृतिक गर्व की भावना भी जागृत करती हैं। आने वाले समय में इन द्वारों का स्वरूप राजधानी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जाएगा।