(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। प्रदेश में शिक्षा सुधारों को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यालय शिक्षा विभाग की व्यापक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई शिक्षा नीति2020की भावना के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा,कौशल विकास तथा कृषि आधारित शिक्षा को अब स्कूल स्तर पर सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई जाए।
सरकार का मानना है कि आधुनिक समय की जरूरतों के अनुसार विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि रोजगार-केंद्रित और जीवन-कौशल आधारित शिक्षा भी मिलनी चाहिए ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। समीक्षा बैठक में विभागीय योजनाओं, परिणामों और सुविधाओं की प्रगति विस्तार से प्रस्तुत की गई।
ड्रॉपआउट रेट में उल्लेखनीय कमी—शिक्षा सुधारों का सकारात्मक प्रभाव
बैठक के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में विद्यालयों का ड्रॉपआउट रेट21.4%से घटकर16.8% पर आ गया है। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इस रफ्तार को और तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि—
“विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो,इसके लिए प्रोत्साहन योजनाओं का व्यापक स्तर पर लाभ सुनिश्चित किया जाए।”
सरकार द्वारा दी जा रही निम्नलिखित योजनाओं ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—
- साइकिल वितरण योजना
- स्कूटी वितरण योजना
- पाठ्य-पुस्तकों का नि:शुल्क प्रदाय
- बालिका छात्रावास और सेनिटेशन किट वितरण
- छात्रावासों में उन्नत सुविधाओं का विस्तार
इन योजनाओं के कारण अधिक छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल आने लगे हैं और शिक्षा तक उनकी पहुंच लगातार बेहतर होती जा रही है।
व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास—नई शिक्षा नीति के मुख्य स्तंभ
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में व्यवसायिक शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, इसलिए स्कूलों में इसे और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है।
प्रमुख निर्देश
- विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं।
- विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
- उद्योगों और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए।
- ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में ऐसे प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाए जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहकर व्यवहारिक जीवन से जुड़नी चाहिए। कौशल आधारित शिक्षा से विद्यार्थी छोटे-छोटे उद्यम भी आरंभ कर सकते हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।
स्कूलों में कृषि शिक्षा—भविष्य की खेती के लिए नई सोच
प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और बड़ी संख्या में छात्र कृषि परिवारों से आते हैं। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिया कि—
“विद्यालयों में प्रारंभिक स्तर से ही कृषि शिक्षा दी जाए,ताकि बच्चे खेती में नए तकनीकी बदलावों को समझ सकें।”
कृषि शिक्षा शामिल होने पर संभावित लाभ
- विद्यार्थी कृषि के आधुनिक तरीकों को सीख सकेंगे।
- जैविक खेती, ड्रिप सिस्टम, मृदा परीक्षण जैसी तकनीकों की समझ विकसित होगी।
- भविष्य में कृषि-आधारित स्टार्टअप और एग्रीटेक क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि नवाचार को गति मिलेगी।
सरकार कृषि विश्वविद्यालयों और स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सहयोग से विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगी।
‘भवन एक,कक्षाएं अनेक’ —संसाधनों का स्मार्ट उपयोग
मुख्यमंत्री ने एक अभिनव विचार प्रस्तुत किया—
“Building One, Classes Many”
इस व्यवस्था से एक विद्यालय भवन में खाली समय में महाविद्यालय की कक्षाएं संचालित की जा सकेंगी। इससे—
- संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा
- छात्रों को नजदीक ही उच्च शिक्षा की सुविधा मिलेगी
- नये भवन निर्माण पर होने वाले व्यय में कमी आएगी
यह मॉडल ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।
परीक्षा परिणामों में ऐतिहासिक सुधार
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024–25 में परीक्षा परिणामों में प्रदेशभर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
मुख्य उपलब्धियां
- कक्षा10वीं– 74%परिणाम
- कक्षा12वीं– 76%परिणाम
- प्रथम परीक्षा में 87%औसत परिणाम
- द्वितीय परीक्षा में 82%औसत परिणाम
- शासकीय विद्यालयों में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण छात्रों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि
मुख्यमंत्री ने इसे शिक्षकों की मेहनत और विभाग की रणनीतियों का सकारात्मक परिणाम बताया।
प्राचार्यों और शिक्षकों को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान
शिक्षकों की भूमिका को सर्वोच्च माना गया और उनकी उपलब्धियों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि—
“जो विद्यालय अच्छे परीक्षा परिणाम देंगे,उनके प्राचार्यों और उत्कृष्ट शिक्षकों को विशेष सम्मान दिया जाएगा।”
इससे शिक्षकों में उत्साह बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा।
छात्रावासों में सुविधाओं का विस्तार—सरकार की प्राथमिकता
बैठक में बताया गया कि छात्रावासों में कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं—
- वॉशिंग मशीन
- रोटी मेकर
- मैट्रेस और हाइजिन किट
- 210नए छात्रावास की स्वीकृति प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाभियान योजना में
इन सुविधाओं से छात्रों के रहने और पढ़ाई के वातावरण में काफी सुधार हुआ है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को मजबूती—शिक्षकों की परेशानियों में कमी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि—
- शिक्षा विभाग के पोर्टल और मोबाइल ऐप को और सक्षम बनाया जाए।
- शिक्षकों को ऑनलाइन कार्यप्रणाली में सरलता और पारदर्शिता मिलनी चाहिए।
- अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम किया जाए।
इससे प्रशासनिक भार कम होगा और शिक्षक ज्यादा समय विद्यार्थियों को दे पाएंगे।
निजी निवेश और स्कूल पहुँच मार्ग—अवसंरचना विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने दूरस्थ क्षेत्रों में निजी विद्यालय स्थापित करने हेतु निजी निवेश नीति तैयार करने के निर्देश दिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि—
“जहां विद्यालयों तक पहुंच मार्ग खराब है,वहां अन्य विभागों के सहयोग से तत्काल सुधार किया जाए।”
इससे स्कूलों की पहुंच और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
स्कूल शिक्षा विभाग की इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली अब व्यावसायिक शिक्षा,कौशल विकास और कृषि शिक्षा पर आधारित एक व्यवहारिक, तकनीकी और भविष्य-उन्मुख मॉडल की ओर बढ़ रही है।
ड्रॉपआउट रेट में कमी, परीक्षा परिणामों में सुधार, छात्रावासों की सुविधाओं का विस्तार और डिजिटल शिक्षा के साधनों को मजबूत करने के निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा परिवर्तन लाने वाले कदम साबित होंगे।
सरकार का यह प्रयास प्रदेश में शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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