रात का माहौल और पप्पू की मासूम मांग
रात का समय था। घर में हल्की-हल्की शांत आवाजें, लेकिन पप्पू की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं।
वह धीरे-धीरे मम्मी के पास आया, कम्बल खींचा और बोला—
“मम्मी,मुझे नींद नहीं आ रही…कोई कहानी सुनाओ ना!”
मम्मी घरेलू काम निपटा रही थीं। उन्होंने सोचा, “चलो बेटा कहानी सुनना चाहता है, अच्छा ही है।”
लेकिन असली ट्विस्ट वहीं था जो उनके जवाब में छिपा हुआ था।
मम्मी का जवाब—कहानी नहीं,रियलिटी शो मिलेगा
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा—
“थोड़ी देर ठहर जा बेटा…तुम्हारे डैडी आते ही होंगे।”
पप्पू उत्सुक होकर बोला—
“तो क्या वो कहानी सुनाएँगे?”
मम्मी ने हँसकर कहा—
“बिल्कुल! लेट नाइट टाइम पर घर न आने की लंबी कहानी तो वही सुनाते हैं।
तू भी सुन लेना…मुझे तो रोज सुननी पड़ती है!”
यह सुनते ही पप्पू की आँखें गोल, और पाठकों की हँसी जोरदार!
घर-घर की कॉमेडी—जहाँ कहानी और हकीकत मिल जाती हैं
भारतीय घरों में यह दृश्य आम है—
- बच्चे कहानी सुनना चाहते हैं
- मम्मियाँ पापा की शिकायत सुनाना चाहती हैं
- और पापा रात को आते ही ‘रीयल एपिसोड’ दे जाते हैं
मम्मी की बातें किसी कॉमेडी शो से कम नहीं होतीं।
उधर पप्पू सोच रहा था—यह कहानी है या घरेलू महाभारत?
सोशल मीडिया पर ये जोक क्यों वायरल हुआ?
क्योंकि इसमें—
- बच्चा है
- मम्मी की समझदारी है
- और पापा की लेट-नाइट टाइमिंग
तीनों मिलकर एक परफेक्ट हास्य दृश्य बनाते हैं।
लोगों ने कमेंट किया—
“ये कहानी नहीं, घरेलू वेब सीरीज है!”
“पप्पू को आज असली लाइफ लेसन मिला!”
✅ Conclusion (निष्कर्ष)
यह मजेदार जोक दिखाता है कि भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की बातें भी कितनी हास्य से भरी होती हैं। पप्पू की मासूमियत, मम्मी की चुटीली समझदारी और पापा की लेट-नाइट एंट्री—इन तीनों ने इस घटना को एक शानदार कॉमिक स्टोरी बना दिया।
(साई फीचर्स)

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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