कब्रिस्तान से साइकल उठाने वाला चोर और जज के सामने उसकी अनोखी दलील!

एक जज और चोर के बीच हुई मजेदार बातचीत आपको जोर से हँसाने पर मजबूर कर देगी। कब्रिस्तान में मिली साइकल को लेकर चोर का मासूम लेकिन अजीब तर्क कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट लाता है। जज के सामने चोर की दलीलें जितनी मजेदार हैं, उतनी ही अप्रत्याशित भी। यह छोटा-सा किस्सा कोर्टरूम ह्यूमर और हल्की-फुलकी कॉमेडी से भरपूर है।

जोक्स की दुनिया में कोर्टरूम से जुड़े किस्से हमेशा से सबसे ज्यादा मजेदार माने जाते हैं। कारण बिल्कुल साफ है—जज के सामने खड़े लोग कभी सच बोलते हैं, कभी झूठ, कभी हँसाते हैं और कभी चौंका देते हैं। आज की इस कहानी में एक चोर की अजीबोगरीब दलील ऐसी है कि सुनकर किसी का भी हँसते-हँसते पेट दुखने लगे।

कहानी शुरू होती है एक छोटे से कोर्टरूम से, जहाँ जज गम्भीर मुद्रा में अपनी कुर्सी पर बैठे हैं और सामने खड़ा है एक चोर—जिस पर साइकल चोरी का आरोप है। जैसे ही सुनवाई शुरू होती है, जज गंभीर स्वर में पूछते हैं:
तुमने यह साइकल क्यों चुराई?”

चोर सिर खुजाते हुए, बेहद मासूमियत से बोला:
हुजूर,वह साइकल तो कब्रिस्तान में पड़ी थी…मैं समझा उसका मालिक मर चुका है। इसलिए मैं उठा लाया।”

यह जवाब सुनते ही कोर्टरूम में मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर हँसी फैल गई। जज भी मुस्कुराए बिना न रह सके। यह दलील इतनी मासूम और मजाकिया थी कि ऐसा लगता था जैसे चोर कोर्ट में नहीं, किसी कॉमेडी शो के मंच पर खड़ा हो।

चोर की सोच अपने आप में अनोखी थी। उसने सोचा—कब्रिस्तान में जो चीज़ पड़ी है, उसका मालिक ‘यकीनन’ नहीं रहा होगा। लेकिन यह तर्क चोरी को正justify करना तो दूर, बल्कि और भी मजेदार बना गया।

किसी ने फुसफुसाकर कहा—
अगर यही लॉजिक चल गया,तो लोग कब्रिस्तान से कार भी उठा लाएँगे!”
और फिर कोर्टरूम में दबी हँसी का माहौल बन गया।

यह जोक हमें बताता है कि कई बार लोग अपनी गलती छिपाने के लिए ऐसे तर्क दे देते हैं, जो तर्क कम और कॉमेडी ज्यादा लगते हैं।

Conclusion (निष्कर्ष)

इस मजेदार कहानी में चोर की दलील भले ही गलत थी, लेकिन उसकी मासूमियत और ह्यूमर ने सबको हँसा दिया। जज और चोर के बीच हुआ यह हल्का-फुल्का संवाद दिखाता है कि जिंदगी के गंभीर पलों में भी हँसी की एक चुटकी माहौल हल्का कर सकती है। कोर्टरूम हो या घर—कभी-कभी हँसना जरूरी है।

(साई फीचर्स)