सिवनी जिले के किसानों की बढ़ती आर्थिक परेशानी
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। सिवनी जिले के किसानों के सामने इन दिनों कठिन हालात हैं। क्षेत्र के अधिकांश किसान खरीफ सीजन में मक्का की खेती करते हैं, और यह जिले की प्रमुख नकदी फसल बन चुकी है। बीते आठ वर्षों से लगातार किसानों द्वारा मक्का की बोनी की जा रही है, लेकिन उचित दाम न मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट में हैं।
पूर्व विधायक राकेश पाल सिंह ने इस गंभीर स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक विस्तृत पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने किसानों की समस्याओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि मक्का उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
वर्ष2017की राहत योजना अब बनी याद
पत्र में उल्लेख है कि वर्ष2017में मध्य प्रदेश सरकार ने मक्का किसानों को“भावांतर भुगतान योजना”के तहत राहत राशि प्रदान की थी, जिससे किसानों को उस समय बड़ी राहत मिली थी।
इस योजना के तहत किसानों को उनकी उपज के बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सरकार द्वारा दी गई थी।
हालांकि, 2017के बाद किसानों को ऐसी कोई सहायता नहीं मिली, जबकि जिले में मक्का उत्पादन और बोनी में लगातार वृद्धि हो रही है।
पूर्व विधायक का कहना है कि आज भी जिले में हजारों किसान इस उम्मीद में हैं कि सरकार एक बार फिर भावांतर भुगतान की राशि जारी करे, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।
मौसम की मार और बाजार में गिरते दाम
इस वर्ष जिले में अतिवृष्टि (अधिक वर्षा) के कारण मक्का की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। किसानों का उत्पादन काफी कम हुआ है।
दूसरी ओर, बाजार में व्यापारियों द्वारा मक्का बहुत कम कीमतों पर खरीदी जा रही है, जिससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।
पूर्व विधायक ने पत्र में लिखा —
“किसानों को इस वर्ष दोहरी मार झेलनी पड़ रही है — एक ओर उत्पादन में कमी और दूसरी ओर बाजार में कम दाम। ऐसी स्थिति में किसानों का जीवन यापन कठिन हो गया है।”
व्यापारिक शोषण और मूल्य नियंत्रण की मांग
पत्र में उन्होंने यह भी बताया कि कुछ व्यापारियों द्वारा किसानों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।
बहुत कम दामों में खरीदी कर बाजार में ऊंचे दामों पर मक्का बेचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार व्यापारियों द्वारा की जा रही अनुचित मूल्य खरीद की जांच करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित करे।
पूर्व विधायक का सुझाव—पुनः लागू की जाए भावांतर योजना
राकेश पाल सिंह ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वर्ष 2017 की तरह इस वर्ष भी भावांतर भुगतान योजना को लागू किया जाए ताकि किसानों को उचित मूल्य का अंतर मिल सके।
उन्होंने लिखा कि “भावांतर भुगतान योजना” किसानों के लिए संकटमोचक सिद्ध हुई थी और आज पुनः वही स्थिति बन चुकी है जब इस योजना की अत्यधिक आवश्यकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, जिसमें मक्का किसानों को उनकी वास्तविक लागत के अनुरूप सहायता राशि मिले।
आर्थिक संकट की जद में किसान परिवार
सिवनी जिले के अनेक किसान परिवार अब ऋणग्रस्त हो चुके हैं।
अत्यधिक वर्षा, कम उत्पादन और बाजार में गिरते दामों ने उनकी आर्थिक स्थिति को डगमगा दिया है। कई किसानों ने खेती का रुख बदलने की बात कही है, जबकि कुछ ने खेती छोड़ने का भी विचार किया है।
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री को चेताया कि यदि जल्द राहत नहीं दी गई, तो किसानों का विश्वास खेती से उठ सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री से अपेक्षा—संवेदनशील नेतृत्व से मिलेगा संबल
पूर्व विधायक राकेश पाल सिंह ने मुख्यमंत्री से भावनात्मक अपील करते हुए लिखा —
“आपकी कृषक हितैषी सोच और संवेदनशील नेतृत्व से किसानों को अवश्य संबल प्राप्त होगा। सिवनी जिले के किसानों ने हमेशा राज्य सरकार पर भरोसा किया है, और अब समय है कि शासन भी उन्हें आर्थिक सुरक्षा का भरोसा दे।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस राहत की आवश्यकता है। राज्य सरकार यदि समय पर मुआवज़ा या भावांतर राशि देती है, तो यह कदम किसानों के विश्वास को और मजबूत करेगा।
स्थानीय किसानों की उम्मीदें
केवलारी, बरघाट, कुरई और लखनादौन क्षेत्र के मक्का उत्पादक किसानों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और परिवहन की लागत तेजी से बढ़ी है, परंतु बाजार में भाव गिरते जा रहे हैं।
इस स्थिति में केवल सरकारी मदद ही उनके जीवन में स्थिरता ला सकती है।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार भावांतर योजना को दोबारा लागू करती है, तो इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि कृषि उत्पादन में भी स्थिरता आएगी।
राज्य सरकार के सामने चुनौती
मध्य प्रदेश सरकार के लिए यह निर्णय आसान नहीं होगा क्योंकि भावांतर भुगतान योजना में बड़े पैमाने पर बजटीय प्रावधान की आवश्यकता होती है।
हालांकि, किसानों की संख्या और उनके संकट की गहराई को देखते हुए यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
पूर्व विधायक का मानना है कि “जब तक किसानों की मेहनत को उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी संतुलित नहीं हो सकती।”
🧩निष्कर्ष (Conclusion):
सिवनी जिले के मक्का उत्पादक किसान आज कठिन आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
अतिवृष्टि, कम उत्पादन और बाजार में गिरते दामों के कारण किसान वर्ग दोहरी मार झेल रहा है।
पूर्व विधायक राकेश पाल सिंह की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की गई यह अपील किसानों की आवाज़ को शासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
यदि सरकार भावांतर भुगतान योजना या राहत राशि प्रदान करने का निर्णय लेती है, तो इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।
कृषक हितैषी नीतियों और संवेदनशील शासन के माध्यम से ही किसानों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है।

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