शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार व मानवीय गुणों का होना आवश्यक – उप मुख्यमंत्री

रीवा में आयोजित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता 2025 का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और मानवीय गुणों का होना अत्यंत आवश्यक है। देशभर के 36 सैनिक स्कूलों से आए 460 प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।

🟩 रीवा में अखिल भारतीय सैनिक स्कूल राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता2025का भव्य शुभारंभ

(ब्यूरो कार्यालय)

रीवा (साई)। रीवा के सैनिक स्कूल परिसर में शनिवार को उस समय उत्साह का माहौल था, जब उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलित कर अखिल भारतीय सैनिक स्कूल राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता 2025 का शुभारंभ किया। देश के विभिन्न कोनों से आए 36सैनिक स्कूलों के 460प्रतिभागी छात्र-छात्राएं इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

मंच पर उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि

“शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और मानवीय गुणों का होना उतना ही आवश्यक है जितना फूल में खुशबू का होना।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिक्षित व्यक्ति में संस्कार न हों तो वह न समाज के काम आता है, न देश के।

🟦 अनुशासन और संस्कारसैनिक स्कूलों की पहचान

श्री शुक्ल ने अपने संबोधन में सैनिक स्कूलों के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूलों का मुख्य उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन,राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है।

“एक सच्चा सैनिक वही है जो शिक्षा के साथ-साथ देश के प्रति समर्पित और मानवीय हो,” उन्होंने कहा।

उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि खेल प्रतियोगिता केवल जीतने के लिए नहीं बल्कि सीखने और आत्मविकास के लिए होती है। अगर कोई खिलाड़ी जीत नहीं पाता, तो भी उसके मन में आगे बढ़ने की भावना कायम रहनी चाहिए।

🟨 देशभर से प्रतिभागीकश्मीर से केरल तक की एकता का संगम

इस प्रतियोगिता में कश्मीर से लेकर केरल तक के सैनिक स्कूलों के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। यह आयोजन अपने आप में “एक भारत,श्रेष्ठ भारत” की भावना का प्रतीक बन गया है।

  • कुल 36सैनिक स्कूल
  • 460छात्र-छात्राएं
  • 3प्रमुख खेल विधाएं – बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स

इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और साथ ही राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों की संस्कृति और परंपराओं से भी परिचित होंगे।

🟩 सैनिक स्कूल रीवा की गौरवशाली परंपरा

सैनिक स्कूल रीवा का उल्लेख करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गर्व से कहा कि यह स्कूल देश के सबसे प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में गिना जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान थल सेनाध्यक्ष (Army Chief) और नौ सेनाध्यक्ष (Navy Chief), दोनों ही सैनिक स्कूल रीवा के पूर्व विद्यार्थी रह चुके हैं।

“जब देश की सीमाओं पर हमारे वीर जवान अदम्य साहस का परिचय दे रहे हैं, तब यह जानकर गर्व होता है कि उनमें से कई इसी मिट्टी से जुड़े हैं,” – श्री शुक्ल।

🟦 प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की सेना का शौर्य

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सेना ने हाल के वर्षों में जो शौर्य और पराक्रम दिखाया है, उसमें रीवा सैनिक स्कूल के पूर्व छात्रों की भी अहम भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि जिस संस्थान से देश के सेनापति निकलते हैं, वहीं आज देशभर के विद्यार्थी खेल के मैदान में अपनी एकता और क्षमता दिखा रहे हैं।

🟨 समापन समारोह में सेनाध्यक्षों की उपस्थिति

श्री शुक्ल ने यह भी घोषणा की कि इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में थल सेनाध्यक्ष और नौ सेनाध्यक्ष स्वयं रीवा आएंगे।
उन्होंने कहा, “यह हम सबके लिए गर्व की बात होगी कि हमारे बीच देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी आएंगे। उनके सान्निध्य में विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी और देशभक्ति की भावना और प्रबल होगी।”

🟩 वीर शहीदों को नमन

कार्यक्रम के शुभारंभ से पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सैनिक स्कूल परिसर में स्थित वीर शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि

“राष्ट्र की रक्षा में बलिदान देने वाले अमर शहीद हमें अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की प्रेरणा देते रहेंगे।”

इस अवसर पर छात्रों ने देशभक्ति गीत और बैंड की मधुर धुनों से वातावरण को देशप्रेम से ओतप्रोत कर दिया।

🟦 खेल प्रतियोगिता का आयोजन– 25से31अक्टूबर तक

प्रतियोगिता का आयोजन 25अक्टूबर से 31अक्टूबर 2025 तक किया जा रहा है।
इस दौरान तीन मुख्य विधाओं में प्रतियोगिताएं होंगी —

  1. बास्केटबॉल (Basketball)
  2. वॉलीबॉल (Volleyball)
  3. एथलेटिक्स (Athletics)

इन खेलों में देश के विभिन्न सैनिक स्कूलों के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी, जो पहले अपने समूह स्तर पर विजेता रहे हैं, राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करेंगे।

🟨 खेलों से मिलेगा आत्मविश्वास और राष्ट्रभावना

श्री शुक्ल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल व्यक्ति में आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा,

“जीवन में प्रतिस्पर्धा हमेशा रहेगी, परंतु खेल सिखाते हैं कि जीत और हार दोनों को समान भाव से स्वीकार करना ही असली सफलता है।”

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रतियोगिता से विद्यार्थी न केवल अपनी खेल प्रतिभा को निखारेंगे, बल्कि अनुशासन और टीम भावना का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।

🟩 सैनिक स्कूल प्रबंधन को उप मुख्यमंत्री की सलाह

उप मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सैनिक स्कूल प्रबंधन को सुझाव दिया कि प्रतियोगिता में आए सभी प्रतिभागियों को व्हाइट टाइगर सफारी का भ्रमण कराया जाए।
उन्होंने कहा कि रीवा प्रदेश का गौरव है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता बच्चों के लिए प्रेरणादायक अनुभव होगी।

🟦 कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथि

कार्यक्रम में सैनिक स्कूल रीवा के प्राचार्य कर्नल अविनाश रावल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
संपूर्ण आयोजन अनुशासन, ऊर्जा और देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण रहा।

🟩 सैनिक स्कूलों की भूमिकाभविष्य के राष्ट्रनिर्माता

भारत के सैनिक स्कूल न केवल सेना के लिए भविष्य के अधिकारियों को तैयार करते हैं, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक भी बनाते हैं।
इन विद्यालयों का उद्देश्य है –

  • विद्यार्थियों में अनुशासन,चरित्र और नेतृत्व की भावना विकसित करना,
  • उन्हें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति समर्पित बनाना,
  • और हर विद्यार्थी में यह भावना भरना कि “देश सर्वोपरि है।”

🟦 मध्य प्रदेश में शिक्षा और खेल के नए आयाम

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल के वर्षों में खेल और शिक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाशाली युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए संसाधन उपलब्ध करा रही है।

“हम चाहते हैं कि मध्य प्रदेश का हर छात्र केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल और संस्कारों में भी आगे रहे,” उन्होंने कहा।

🟧 निष्कर्ष (Conclusion)

रीवा में आयोजित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता 2025 न केवल खेल प्रतिभा का मंच है, बल्कि यह अनुशासन,संस्कार और मानवीय मूल्यों का उत्सव भी है।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने जो संदेश दिया — शिक्षा तभी सार्थक है जब उसमें संस्कार और मानवता हो” — वह आज के युवाओं के लिए दिशा-सूचक है।

इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि जब शिक्षा, खेल और संस्कार एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी सशक्त, अनुशासित और मूल्यवान भारत का निर्माण होता है।