मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद का बड़ा निर्णय: किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण, एसडीजी मूल्यांकन योजना और अस्पतालों में बिस्तर वृद्धि को मंजूरी

मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं और सतत् विकास लक्ष्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना को जारी रखने, एसडीजी मूल्यांकन योजना को स्वीकृति देने तथा पाँच जिला चिकित्सालयों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने जैसे प्रस्तावों पर मुहर लगी।

📌 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बैठक

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के कृषक हित, स्वास्थ्य संरचना और विकास नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति बनी। सरकार ने घोषणा की कि किसानों को अब भी शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण मिलता रहेगा। साथ ही, राज्य भर में सतत् विकास लक्ष्य (एसडीजी) मूल्यांकन योजना को अगले 5 वर्षों तक लागू किया जाएगा और जिला चिकित्सालयों में810नए पदों की स्वीकृति दी गई है।

🌾 शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण योजना जारी

मध्यप्रदेश सरकार ने घोषित किया कि वर्ष 2025-26 के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को अल्पावधि फसल ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर प्रदान किया जाएगा।

  • खरीफ2025 की ड्यू डेट – 28 मार्च 2026
  • रबी2025-26 की ड्यू डेट – 15 जून 2026

योजना के अंतर्गत जो किसान निर्धारित तिथि तक अपना ऋण चुकता करेंगे, उन्हें 3 लाख रूपये तक के ऋण पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा।

राज्य सरकार 1.5% सामान्य ब्याज अनुदान और 4% प्रोत्साहन रूप में कुल 5.5% की सब्सिडी देगी। इस वर्ष 23हजार करोड़ रुपये के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

➡️ इस योजना का उद्देश्य किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देकर उन्हें ऋण बोझ से मुक्त करना और कृषि उत्पादन को सशक्त बनाना है।

🌍 सतत् विकास लक्ष्य (एसडीजी) मूल्यांकन योजना को मंजूरी

कैबिनेट ने प्रदेश में सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण, क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन के लिए एक नवीन एसडीजी मूल्यांकन योजना को वर्ष 2025-30 तक लागू करने की स्वीकृति दी।

योजना की मुख्य विशेषताएँ:

  • राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर SDG लक्ष्यों का स्थानीयकरण।
  • SDG डैशबोर्ड पर प्रदर्शन आधारित रैंकिंग व्यवस्था।
  • 1करोड़ रुपये पहले और 75लाख रुपये दूसरे स्थान के जिले को वार्षिक पुरस्कार।
  • कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की व्यवस्था।
  • योजना पर 19करोड़10लाख रुपये (3.82 करोड़ प्रति वर्ष) का व्यय।

यह योजना राज्य को विकसित मध्यप्रदेश@2047”दृष्टिपत्र के लक्ष्यों के अनुसार विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाएगी।

🏥 5जिला चिकित्सालयों में बिस्तर वृद्धि और810नए पदों की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने टीकमगढ़, नीमच, सिंगरौली, श्योपुर और डिंडौरी जिले के जिला चिकित्सालयों में कुल 800बिस्तरों का उन्नयन और 810नए पदों का निर्माण स्वीकृत किया।

जिलेवार बिस्तर वृद्धि:

जिलापुराने बिस्तरनए बिस्तरवृद्धि
टीकमगढ़300500+200
नीमच200400+200
सिंगरौली200400+200
श्योपुर200300+100
डिंडौरी100200+100

पदों का विवरण:

  • 543 नियमित पद
  • 04 संविदा पद
  • 263 आउटसोर्सिंग पद

इस पर 39.5करोड़ रुपये वार्षिक व्यय स्वीकृत किया गया है।

➡️ इन निर्णयों से जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ सुदृढ़ होंगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।

⚖️ न्यायिक संरचना मजबूत करने की दिशा में कदम

मंत्रि-परिषद ने सागर जिले की तहसील मालथौन में कनिष्ठ खंड न्यायालय स्थापित करने और उससे संबंधित 7 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी।
यह निर्णय क्षेत्रीय स्तर पर न्याय की सुलभता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

🏗️ भूखण्ड निवर्तन के लिए नया मूल्य निर्धारण

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब भूखण्ड निवर्तन का आरक्षित मूल्य कलेक्टर गाइडलाइन रेट के100%क्षेत्रफल पर निर्धारित किया जाएगा।

पहले यह दर 60% क्षेत्रफल पर लागू होती थी।
इस संशोधन से राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त होगा और विकास कार्य तेजी से हो सकेंगे।

💬 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए कृषि, स्वास्थ्य और न्यायिक संरचना तीनों आवश्यक हैं।
उनके अनुसार “किसानों को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। एसडीजी मूल्यांकन योजना से हर जिला विकास की दौड़ में सक्रिय भागीदारी करेगा।”

📈 इन निर्णयों का राज्य पर संभावित प्रभाव

  1. कृषक हित सशक्तिकरण: शून्य ब्याज फसल ऋण से किसानों पर वित्तीय दबाव कम होगा।
  2. स्वास्थ्य ढांचा मजबूत: नए बिस्तर और पद राज्य की चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाएंगे।
  3. विकास की प्रतिस्पर्धा: एसडीजी रैंकिंग से जिलों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  4. न्यायिक सुधार: स्थानीय न्यायालय स्थापना से ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को न्याय मिलेगा।
  5. राजस्व वृद्धि: भू-मूल्य संशोधन से राज्य राजस्व में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

🏁 निष्कर्ष

मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद की यह बैठक राज्य के संतुलित विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
किसानों को शून्य ब्याज पर फसल ऋण, स्वास्थ्य संरचना का विस्तार और एसडीजी आधारित विकास मॉडल से राज्य के हर वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।
इन निर्णयों से “विकसित मध्यप्रदेश@2047” के लक्ष्य की ओर एक और कदम बढ़ गया है।