“इतिहास के ज्ञान से ही विषम परिस्थिति में हम अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे” – उप मुख्यमंत्री

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के पद्मधर पार्क में आयोजित भरत मिलाप कार्यक्रम में कहा कि इतिहास का ज्ञान ही हमें विषम परिस्थितियों में सही भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण और राम मंदिर का निर्माण भारत के गौरव का प्रतीक है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों की पूजा की तथा कलाकारों को सम्मानित किया।

🕉️ रीवा में भव्य भरत मिलाप कार्यक्रम का आयोजन

(ब्यूरो कार्यालय)

रीवा (साई)। मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नगर रीवा में स्थित पद्मधर पार्क में परंपरागत भरत मिलाप कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष भी भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

✍️ इतिहास का ज्ञानसमाज और राष्ट्र के लिए आवश्यक

अपने उद्बोधन में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक होता है।
उन्होंने कहा कि “जब हमें अपने इतिहास का ज्ञान होता है, तब हम किसी भी विषम परिस्थिति में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। यही ज्ञान हमें आत्मबल और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव देता है।”

उप मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान समय में देश में सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का वातावरण बन रहा है। यह पुनर्जागरण केवल धार्मिक नहीं बल्कि राष्ट्र के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक है।

🕉️ सनातन की पुनर्स्थापना से देश हो रहा मजबूत

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने भव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार किया है, जो सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “कोठारी बंधुओं का बलिदान हमें याद रखना चाहिए। उनके त्याग से ही अयोध्या में राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह न केवल धार्मिक बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक क्षण है।”

🌸 दशहरा उत्सव समिति को साधुवाद

रीवा की दशहरा उत्सव समिति द्वारा दशहरा एवं भरत मिलाप जैसे कार्यक्रमों के आयोजन को श्री शुक्ल ने परंपरा और संस्कृति के संरक्षण का सशक्त उदाहरण बताया।
उन्होंने समिति के पदाधिकारियों और आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा कि “आप सभी इस परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं, यही रीवा की पहचान और गौरव है।”

🎭 भावनात्मक मंचीय प्रस्तुति ने किया सभी को अभिभूत

कार्यक्रम के दौरान मंच पर कलाकारों द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर आधारित एक भावनात्मक प्रस्तुति दी गई।
यह प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि उपस्थित दर्शक भावविभोर हो उठे।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कलाकारों की इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा –

“इस मंचीय अभिनय ने हमें यह एहसास दिलाया कि जब आस्था और त्याग एक साथ जुड़ते हैं, तब इतिहास रचा जाता है।”

🌿 सांस्कृतिक गौरव का प्रतीकभरत मिलाप

भरत मिलाप का आयोजन दशहरा उत्सव के बाद उस क्षण का प्रतीक है जब श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटते हैं और भरत उनसे मिलते हैं। यह मिलन भ्रातृ प्रेम,त्याग और धर्मनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।

रीवा में दशकों से यह परंपरा जीवित है, जहां हजारों लोग हर वर्ष इस आयोजन में भाग लेते हैं।
इस वर्ष भी पद्मधर पार्क में विशाल जनसमूह ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया।

🕯️ लोक और धर्म का संगम

कार्यक्रम में न केवल धार्मिक भावनाएं, बल्कि सामाजिक एकता और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
विभिन्न विद्यालयों के छात्र, सांस्कृतिक दल और स्थानीय कलाकारों ने रामायण प्रसंगों पर आधारित नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए।

🙏 विशिष्ट अतिथि और जनसमूह की उपस्थिति

भरत मिलाप कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
इनमें पूर्व महापौर वीरेन्द्र गुप्ता,महामंत्री राजेश पाण्डेय,मैहरधाम के पुजारी श्री पवन महाराज सहित दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

🏛️ रीवासांस्कृतिक धरोहर की भूमि

रीवा शहर सदियों से धर्म,संस्कृति और परंपरा का केंद्र रहा है।
यह नगर न केवल बघेल वंश की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है, बल्कि रामायण कालीन कथाओं से भी इसका गहरा संबंध है।
रीवा के दशहरा उत्सव और भरत मिलाप कार्यक्रमों की प्रसिद्धि अब राज्य की सीमाओं से आगे देशभर में फैल चुकी है।

🌼 उप मुख्यमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें (Highlights)

  1. इतिहास का ज्ञान हमारे व्यक्तित्व को सशक्त बनाता है।
  2. सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
  3. राम मंदिर निर्माण भारतीय संस्कृति की गौरवगाथा का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
  4. रीवा की परंपराएं मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक गौरव की पहचान हैं।
  5. युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की आवश्यकता है।

🌸 कला और धर्म का उत्सव

कार्यक्रम में रथयात्रा, शंखध्वनि, और पुष्पवर्षा के साथ राम-भरत मिलन का दृश्य प्रस्तुत हुआ।
श्री शुक्ल ने मंच पर उपस्थित कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में संस्कृति के प्रति सम्मान और एकता का भाव जाग्रत होता है।
उन्होंने कहा, “जब समाज अपने धर्म, परंपरा और संस्कृति से जुड़ता है, तब राष्ट्र स्वयं सशक्त होता है।”

🌿 सनातन और आधुनिकता का संगम

श्री शुक्ल ने कहा कि आज का भारत आधुनिकता और परंपरा का अनोखा संगम है।
उन्होंने कहा –

“हम विज्ञान, तकनीक और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारी जड़ें सनातन संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं। यही हमारी पहचान है।”

🔱 स्थानीय जनों का उत्साह

रीवा के नागरिकों ने भरत मिलाप कार्यक्रम को लेकर अपार उत्साह दिखाया।
सड़कें रोशनी से जगमगा उठीं, घर-घर में दीप प्रज्वलित हुए और पूरे नगर में जय श्रीराम के जयघोष गूंजे।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यह आयोजन रीवा की पहचान है और इसे पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजना जरूरी है।

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के उद्बोधन ने यह संदेश दिया कि इतिहास का ज्ञान केवल अतीत की स्मृति नहीं,बल्कि भविष्य की दिशा है।
जब हम अपने मूल्यों, संस्कृति और सनातन परंपरा से जुड़ते हैं, तब ही हम राष्ट्र को मजबूत बना सकते हैं।
रीवा का भरत मिलाप कार्यक्रम इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आस्था,इतिहास और संस्कृति के संगम से ही समाज का वास्तविक उत्थान संभव है।

“इतिहास के ज्ञान से ही विषम परिस्थिति में हम अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे।”
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल