🧩घटना का पृष्ठभूमि: छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप बना काल
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)।मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हाल ही में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहाँ कथित रूप से कोल्ड्रिफ सिरप (Coldref Syrup) के सेवन के बाद कई मासूम शिशुओं की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, सिरप में डाई इथाईलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) नामक घातक रसायन की मिलावट पाई गई, जिससे शिशुओं की किडनी फेल हो गई।
इस घटना ने पूरे प्रदेश सहित देशभर में दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जहाँ पीड़ित परिवार गहरे शोक में हैं, वहीं चिकित्सा समुदाय भी इस त्रासदी से हिल गया है।
🏥 IMAसिवनी का शोक और संवेदना
Indian Medical Association (IMA)सिवनी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संस्था की ओर से जारी बयान में कहा गया —
“छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन से हुई शिशुओं की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है। इस घटना में पीड़ित परिवारों के प्रति समस्त चिकित्सक समुदाय की संवेदनाएँ हैं।”
IMA ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना के लिए किसी भी चिकित्सक को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है, क्योंकि डॉक्टर दवाओं के निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण या विक्रय प्रक्रिया में शामिल नहीं होते।
⚗️दवा में ज़हरीली मिलावट की पुष्टि
IMA सिवनी के अनुसार, अभी तक की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि मौतों का कारण सिरप में डाई इथाईलीन ग्लाइकोल (DEG) की मिलावट थी। यह रसायन अत्यंत विषैला होता है और यदि गलती से भी दवाओं में मिल जाए, तो गंभीर विषाक्तता,किडनी फेल्योर और मृत्यु जैसी स्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है।
डाई इथाईलीन ग्लाइकोल का इतिहास:
यह रसायन पहले भी भारत और विदेशों में कई बड़ी त्रासदियों का कारण बन चुका है। 1990 के दशक में इसी रसायन से मिलावटी सिरप के कारण नाइजीरिया और इंडोनेशिया में भी सैकड़ों बच्चों की मौत हुई थी।
⚖️ IMAका आरोप:“गलत दिशा में कार्रवाई”
IMA सिवनी ने सरकार की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। बयान में कहा गया —
“खेद का विषय है कि शासन द्वारा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के जिम्मेदार दवा निर्माता और औषधि निरीक्षण अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय एक चिकित्सक को गिरफ्तार किया गया है। यह न केवल अन्यायपूर्ण बल्कि चिकित्सा समुदाय की गरिमा के विपरीत है।”
IMA का कहना है कि डॉक्टर की भूमिका केवल रोगी के उपचार और सलाह देने तक सीमित होती है। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए Food and Drug Administration (FDA) जिम्मेदार होता है। ऐसे में चिकित्सक को दोषी ठहराना कानून और न्याय दोनों के खिलाफ है।
🩺सिवनी के डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
IMA सिवनी के सभी चिकित्सकों ने 8 अक्टूबर 2025 को काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
इस दौरान सभी चिकित्सक सामान्य चिकित्सा सेवाएँ जारी रखते हुए शांतिपूर्ण ढंग से सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे।
IMA सिवनी के अध्यक्ष डॉ. दीपक अग्निहोत्री और सचिव डॉ. महेंद्र ओगरे ने कहा —
“हम पीड़ित परिवारों के साथ हैं, लेकिन निर्दोष चिकित्सक को जेल भेजना सरासर अन्याय है। सरकार को तुरंत निष्पक्ष जांच कर असली दोषियों को सज़ा देनी चाहिए।”
🧪दवा निर्माण प्रक्रिया और जिम्मेदारियाँ
भारत में किसी भी दवा के निर्माण, परीक्षण और वितरण की प्रक्रिया Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) और राज्य स्तरीय Drug Control Department के तहत आती है।
चिकित्सकों की भूमिका केवल दवा के चयन, निदान और उपचार की होती है।
IMA ने यह भी कहा कि दवा निर्माण कंपनियों और निरीक्षण एजेंसियों पर नियमित रूप से ऑडिट और गुणवत्ता जांच का दबाव होना चाहिए। इस घटना से यह साफ है कि सिस्टम में कहीं न कहीं सतर्कता की भारी कमी रही है।
📉स्वास्थ्य तंत्र पर जनता का भरोसा डगमगाया
यह घटना न केवल चिकित्सा जगत बल्कि आम जनता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
लोग अब बच्चों की दवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
IMA ने अपील की है कि लोग अफवाहों से बचें और किसी भी तरह की संदिग्ध दवा का उपयोग न करें।
💬चिकित्सक समुदाय में आक्रोश
प्रदेश भर के IMA इकाइयों ने भी इस गिरफ्तारी पर निंदा व्यक्त की है।
IMA मध्यप्रदेश शाखा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने चिकित्सक को रिहा नहीं किया, तो राज्यभर में सांकेतिक हड़ताल की जा सकती है।
यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर परIMA Headquarters (नई दिल्ली) तक पहुंचाया गया है।
🔍सरकारी जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने दवा की बैच सैंपल को लैब में भेजा है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
हालांकि, दवा निर्माता कंपनी पर अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
IMA का कहना है कि यदि Food and Drug Administration अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाता, तो यह हादसा टल सकता था।
📢 IMAसिवनी की प्रमुख मांगें
IMA सिवनी ने सरकार के समक्ष निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं:
- गिरफ्तार चिकित्सक की तत्काल रिहाई।
- दोषी दवा निर्माता कंपनी और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।
- प्रदेश में सभी सिरप उत्पादों की गुणवत्ता जांच।
- चिकित्सकों की प्रतिष्ठा और सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान।
- पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवज़ा और न्याय।
🧘 IMAसिवनी का शांतिपूर्ण आंदोलन
विरोध के दौरान IMA ने किसी भी तरह की हिंसक या आक्रामक गतिविधि से दूरी बनाए रखी।
चिकित्सकों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सत्य को उजागर करना और न्याय की मांग है।
इस शांतिपूर्ण विरोध ने प्रशासन का ध्यान खींचा है और प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
🧭निष्कर्ष (Conclusion)
छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप से हुई शिशुओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
IMA सिवनी ने इस त्रासदी पर न केवल शोक व्यक्त किया है, बल्कि शासन की गलत दिशा में की गई कार्रवाई का विरोध भी किया है।
यह घटना इस बात का प्रतीक है कि स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है — विशेष रूप से दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में।
IMA की मांग स्पष्ट है —
“निर्दोष डॉक्टर को तुरंत रिहा किया जाए और असली दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।”
समाज, शासन और चिकित्सा समुदाय को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए।

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