भारत की शिक्षा प्रणाली: चुनौतियाँ, सुधार और भविष्य की दिशा

भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद इसमें कई सुधार देखने को मिले हैं। डिजिटल शिक्षा, उच्च शिक्षा और रोजगारपरक शिक्षा के क्षेत्र में भारत तेजी से बदलाव कर रहा है।

(मुकेश चौरसिया)

भारत ज्ञान और शिक्षा की परंपरा का प्राचीन केंद्र रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक IIT, IIM और AIIMS तक, भारत की शिक्षा प्रणाली ने सदियों में लंबा सफर तय किया है। लेकिन आज भी यह प्रणाली कई चुनौतियों और सुधारों की आवश्यकता से गुजर रही है।
भारत में शिक्षा को संविधान का मौलिक अधिकार माना गया है और हर बच्चे को 6 से 14 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है।

📚भारत की शिक्षा प्रणाली का ढांचा

भारत की शिक्षा प्रणाली को मुख्यतः पाँच स्तरों में बांटा जा सकता है:

  1. प्राथमिक शिक्षा (Primary Education) – कक्षा 1 से 5 तक
  2. माध्यमिक शिक्षा (Secondary Education) – कक्षा 6 से 10 तक
  3. उच्च माध्यमिक शिक्षा (Senior Secondary) – कक्षा 11 और 12
  4. स्नातक शिक्षा (Undergraduate Studies) – कॉलेज/विश्वविद्यालय स्तर
  5. स्नातकोत्तर और शोध (Postgraduate & Research) – उच्च शिक्षा और पीएचडी

इस प्रणाली का उद्देश्य बच्चों को मूलभूत शिक्षा से लेकर विशेषज्ञता तक पहुँचाना है।

🏫सरकारी और निजी शिक्षा

भारत में शिक्षा का संचालन दो मुख्य क्षेत्रों में होता है:

  • सरकारी विद्यालय और विश्वविद्यालय – जहाँ शिक्षा कम खर्च में उपलब्ध होती है।
  • निजी विद्यालय और संस्थान – जहाँ आधुनिक तकनीक और सुविधाएँ अधिक होती हैं, लेकिन खर्च भी ज्यादा होता है।

इन दोनों के बीच गुणवत्ता और पहुँच में अंतर अक्सर चर्चा का विषय रहता है।

📖नई शिक्षा नीति2020 (NEP 2020)

भारत सरकार ने 2020 में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू की, जिसने शिक्षा के ढांचे में कई बड़े बदलाव किए।
मुख्य बिंदु:

  • पुरानी 10+2प्रणाली की जगह 5+3+3+4संरचना लागू की गई।
  • प्राथमिक स्तर पर खेल-आधारित और कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई को बढ़ावा।
  • उच्च शिक्षा में बहुविषयी (multidisciplinary) शिक्षा की शुरुआत।
  • डिजिटल लर्निंग और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर।

📱भारत में डिजिटल शिक्षा

कोविड-19 महामारी ने भारत में डिजिटल शिक्षा को तेजी से बढ़ावा दिया। ऑनलाइन कक्षाओं, स्मार्ट क्लासरूम और मोबाइल ऐप्स ने पढ़ाई के नए रास्ते खोले।

  • SWAYAM, DIKSHA और e-Pathshala जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म
  • Byju’s, Unacademy जैसे निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म
    इनसे शिक्षा की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँची, लेकिन डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

🎓उच्च शिक्षा की स्थिति

भारत में आज लगभग 1,100विश्वविद्यालय और40,000से अधिक कॉलेज कार्यरत हैं।

  • IITs, IIMs, AIIMS और IISc जैसी संस्थाएं विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
  • लेकिन वैश्विक रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति अभी भी बेहतर होने की ज़रूरत है।
  • अनुसंधान और नवाचार पर पर्याप्त निवेश न होना एक बड़ी चुनौती है।

📊शिक्षा प्रणाली की चुनौतियाँ

भारत की शिक्षा प्रणाली के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं:

  1. शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) – सरकारी स्कूलों में ढांचागत कमी।
  2. शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) – आधुनिक तकनीकों का अभाव।
  3. डिजिटल असमानता (Digital Divide) – ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर।
  4. रोजगारपरक शिक्षा की कमी – डिग्री प्राप्त करने के बाद भी रोजगार का संकट।
  5. ड्रॉपआउट रेट – गरीबी और संसाधनों की कमी से बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।

💡शिक्षा सुधार के प्रयास

भारत सरकार और विभिन्न राज्यों ने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • राष्ट्रीय शिक्षा मिशन
  • मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal) – बच्चों की स्कूल उपस्थिति बढ़ाने में मददगार।
  • समग्र शिक्षा अभियान – स्कूलों के ढांचे और शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार।
  • स्किल इंडिया मिशन – युवाओं को रोजगारपरक कौशल सिखाने पर जोर।

🌍वैश्विक तुलना

  • भारत की साक्षरता दर 2025 में लगभग 79% है, जबकि विकसित देशों में यह 95% से अधिक है।
  • शिक्षा बजट GDP का लगभग 3%–3.5% है, जबकि विकसित देशों में यह 5% से अधिक होता है।
  • विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से भारत में शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की कोशिश की जा रही है।

🧑‍🎓भविष्य की दिशा

भारत की शिक्षा प्रणाली का भविष्य निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित होगा:

  1. डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग।
  2. स्किल-आधारित शिक्षा और रोजगार से जुड़ी पढ़ाई।
  3. शोध और नवाचार पर अधिक निवेश।
  4. वैश्विक स्तर की विश्वविद्यालय प्रणाली।
  5. गाँव और शहर के बीच शिक्षा की खाई को पाटना।

निष्कर्ष

भारत की शिक्षा प्रणाली (Education System in India) दुनिया की सबसे बड़ी और जटिल व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें सुधार की प्रक्रिया लगातार चल रही है। नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को आधुनिक, समावेशी और रोजगारपरक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
हालांकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं—जैसे शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल असमानता और उच्च शिक्षा का वैश्विक स्तर पर पिछड़ना। लेकिन यदि भारत शिक्षा पर पर्याप्त निवेश करता है और डिजिटल क्रांति का लाभ उठाता है, तो आने वाले दशक में भारत शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक नेता बन सकता है।

(लेखक मध्य प्रदेश के देवास में शिक्षाविद हैं)

(साई फीचर्स)