(विद्याधर जाधव)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को वन्य जीव शिकार के आरोपी मुंबई निवासी सलमान की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। यह निर्णय एमपीएसटीएसएफ द्वारा काले हिरण और चिंकारा के शिकार के मामले में दायर मुकदमे के संदर्भ में आया। न्यायालय ने संरक्षित प्रजातियों के क्रूर शिकार को गंभीर अपराध मानते हुए राहत देने से इनकार किया, जिससे इस प्रकार के अपराधों पर कड़ी रोकथाम का संदेश मिला।
जांच की पृष्ठभूमि और जब्ती
एमपीएसटीएसएफ की इंदौर इकाई ने 3 दिसंबर 2024 को भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत सलमान को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 64.70 किलोग्राम काले हिरण का मांस, एक अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और शिकार में प्रयुक्त टोयोटा इनोवा वाहन जब्त किया गया। जांच के दौरान आरोपी और उसके साथियों के मोबाइल फोन से शिकार की तस्वीरें व वीडियो क्लिप बरामद हुए, जिसमें मृत वन्य जीवों के साथ उनका स्पष्ट चित्र दिखता है। यह सबूत अदालत में प्रस्तुत किए गए और शिकार की क्रूरता को सिद्ध किया।
न्यायिक निर्देश और आगे की कार्यवाही
न्यायालय ने एमपीएसटीएसएफ के शासकीय अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को गंभीर मानते हुए जमानत याचिका को अस्वीकार किया। साथ ही, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को प्रतिदिन सुनवाई कर शीघ्र निराकरण करने का निर्देश दिया। गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया गया, जिससे प्रक्रिया में कोई देरी न हो। यह कदम वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएसएफ)
• आयोजन: जमानत याचिका सुनवाई
• स्थान: इंदौर (मध्यप्रदेश हाई कोर्ट)
• मुख्य उद्देश्य: संरक्षित वन्य जीवों के शिकार पर कड़ी सजा सुनिश्चित करना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: जमानत याचिका खारिज, दैनिक सुनवाई निर्देश, नोडल अधिकारी नियुक्ति
• लक्ष्य: वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी रोकथाम और न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ बनाना
भविष्य की दिशा
उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत नियमित दैनिक सुनवाई और नोडल अधिकारी की निगरानी से इस मामले की तेज़ प्रगति अपेक्षित है। एमपीएसटीएसएफ ने आधुनिक निगरानी तकनीक और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा देकर भविष्य में समान अपराधों को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। निरंतर कर्मचारी कल्याण, तकनीकी उन्नयन और कड़ी कानूनी कार्रवाई से वन्य जीव संरक्षण में स्थायी सुधार और सतत विकास की राह प्रशस्त होगी।