(ब्यूरो कार्यालय)
इंदौर (साई)। गणेश चतुर्थी के अवसर पर इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में प्रसाद की बढ़ती मांग के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने जांच अभियान चलाया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने मंदिर परिसर के साथ शहर के प्रमुख होटलों और रेस्टोरेंट में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण किया।
13 और 14 सितंबर को चले इस अभियान के दौरान करीब 31 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए गए। इनमें मंदिर परिसर में तैयार और बेचे जा रहे मोतीचूर के लड्डू, बेसन के लड्डू और मोदक समेत अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। नमूनों को खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है।
जांच के दौरान खजराना गणेश मंदिर परिसर के कुछ प्रसाद निर्माण केंद्रों पर ऐसी कमियां सामने आईं, जो सीधे तौर पर खाद्य स्वच्छता और सुरक्षित निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी हैं। एक स्थान पर जहां लड्डू बनाए जा रहे थे, वहीं कर्मचारियों के चप्पल पहनकर आने-जाने की बात सामने आई। इसके अलावा फर्श की सफाई, कच्चे माल के रखरखाव और जरूरी दस्तावेजों को लेकर भी कमियां मिलीं।
गणेश चतुर्थी पर बढ़ी प्रसाद की मांग, इसलिए हुई विशेष जांच
गणेश चतुर्थी के दौरान खजराना गणेश मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में प्रसाद की बिक्री और मांग भी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने वाले खाद्य प्रसाद की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने मंदिर परिसर में प्रसाद निर्माण और बिक्री से जुड़े केंद्रों का निरीक्षण किया। टीम ने थोक और फुटकर प्रसाद विक्रेताओं के करीब 8 से 10 काउंटर की जांच की।
अधिकारियों ने केवल तैयार प्रसाद की स्थिति ही नहीं देखी, बल्कि जिस जगह पर लड्डू और अन्य खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी, वहां की स्वच्छता और निर्माण प्रक्रिया का भी निरीक्षण किया।
एकदंत प्रसाद भंडार में मिली कई कमियां
मंदिर परिसर स्थित एकदंत प्रसाद भंडार में लड्डू प्रसाद का निर्माण अस्वच्छ परिस्थितियों में होता पाया गया। निरीक्षण के दौरान फर्श गंदा मिला। इसके अलावा खाद्य लाइसेंस निर्धारित तरीके से प्रदर्शित नहीं था।
कच्चे माल के भंडारण और रखरखाव की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को साफ और व्यवस्थित तरीके से रखना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि खराब भंडारण से खाद्य सामग्री के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन की टीम ने इन कमियों को दर्ज किया और संबंधित संचालकों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
भालचंद्र प्रसाद भंडार में गंदा और तेलयुक्त फर्श
भालचंद्र प्रसाद भंडार के निरीक्षण में भी लड्डू बनाने की जगह की सफाई व्यवस्था कमजोर मिली। यहां फर्श चिपचिपा, तेलयुक्त और गंदा पाया गया।
सबसे ध्यान खींचने वाली कमी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से जुड़ी थी। निरीक्षण के दौरान कर्मचारी लड्डू निर्माण क्षेत्र में चप्पल पहनकर आते–जाते दिखाई दिए।
खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखना जरूरी होता है। निर्माण क्षेत्र में बाहरी गंदगी के प्रवेश को रोकने के लिए कर्मचारियों के व्यक्तिगत स्वच्छता मानकों और निर्धारित कार्यप्रणाली का पालन अपेक्षित है।
इसके अलावा कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण–पत्र भी निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत नहीं किए गए।
प्रसाद के 8 नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मंदिर परिसर में प्रसाद विक्रेताओं और निर्माण केंद्रों से करीब 8 नमूने लिए। इनमें प्रमुख रूप से मोतीचूर के लड्डू, बेसन के लड्डू और मोदक शामिल हैं।
इन नमूनों को खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है। प्रयोगशाला जांच के बाद ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से संबंधित अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल निर्माण स्थल की स्वच्छता देखने से खाद्य पदार्थ की पूरी गुणवत्ता का पता नहीं चलता। प्रयोगशाला परीक्षण के माध्यम से खाद्य सामग्री में निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता की जांच की जा सकती है।
होटल फेयर फील्ड में स्टोर रूम में मिले कॉकरोच
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जांच केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रही। रिंग रोड स्थित होटल फेयर फील्ड बाय मैरियट का भी निरीक्षण किया गया।
यहां से तुअर दाल, पनीर और डेसिकेटेड कोकोनट पाउडर के तीन नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण और स्वच्छता को लेकर कई कमियां सामने आईं।
जांच में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों का भंडारण साथ मिला। इसके अलावा अधिकतर डस्टबिन खुले पाए गए और गीले तथा सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की व्यवस्था भी नहीं मिली।
सबसे गंभीर स्थिति स्टोर रूम में सामने आई, जहां कॉकरोच पाए गए। खाद्य भंडारण क्षेत्र में कीटों की मौजूदगी स्वच्छता के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय मानी जाती है।
खुले बुफे और खाद्य सामग्री के लेबल पर भी सवाल
होटल के निरीक्षण के दौरान कुछ अन्य व्यवस्थाओं में भी कमियां सामने आईं। कच्ची खाद्य सामग्री के पैकेट पर आसानी से हटाए जा सकने वाले लेबल मिले।
बुफे में रखे कई तैयार खाद्य पदार्थ खुले पाए गए। खुले खाद्य पदार्थों पर धूल, बाल या अन्य बाहरी माध्यमों से दूषित होने की आशंका रहती है। इसलिए तैयार खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से ढककर रखना खाद्य स्वच्छता का अहम हिस्सा है।
इसके अलावा खाद्य निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पानी की जांच रिपोर्ट में कीटनाशक अवशेष और भारी धातुओं की जांच शामिल नहीं थी। ऐसे में प्रशासन ने दस्तावेजी और खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़ी कमियों को भी निरीक्षण में दर्ज किया।
13 सितंबर को कई अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच
13 सितंबर को भी खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने कई होटल और रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया। इस दौरान केवल खाद्य नमूने लेने के बजाय दस्तावेज, स्वच्छता, पानी की गुणवत्ता, कर्मचारियों की फिटनेस और खाद्य भंडारण जैसी व्यवस्थाओं की जांच की गई।
श्री गुरुकृपा रेस्टोरेंट में दस्तावेज नहीं मिले
विजय नगर स्थित श्री गुरुकृपा रेस्टोरेंट के निरीक्षण में खाद्य जांच रिपोर्ट, पानी की जांच रिपोर्ट और कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं मिले।
ये दस्तावेज खाद्य कारोबार में सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों से संबंधित जरूरी प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनके उपलब्ध नहीं होने पर प्रतिष्ठान को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं।
द रेड मेपल और होटल मशाल में भी कमियां
द रेड मेपल, होटल मशाल के निरीक्षण के दौरान खाद्य लाइसेंस निर्धारित स्थान पर प्रदर्शित नहीं मिला। कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र और पानी की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी।
कुछ खाद्य पदार्थों के पैकेट खुले और सीलनयुक्त पाए गए। इसके अलावा दो डीप फ्रीजर में तापमान डिस्प्ले नहीं था।
खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण में तापमान नियंत्रण की भूमिका अहम होती है। विशेष रूप से जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री के लिए निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी होता है।
इस प्रतिष्ठान से पनीर और विभिन्न सॉस के पांच नमूने जांच के लिए लिए गए।
सेफ भूपिज किचन में अव्यवस्थित स्टोरेज
एबी रोड, राऊ स्थित सेफ भूपिज किचन में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। यहां कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र और पानी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।
कच्चे माल का भंडारण भी अव्यवस्थित पाया गया। निरीक्षण के दौरान कुछ कटे-फटे पैकेट से खाद्य सामग्री बाहर निकलती और लीक होती मिली।
स्टोरेज शेल्फ पर भी गंदगी पाई गई। ऐसी स्थिति में खाद्य सामग्री के बाहरी प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने कमियों को दर्ज करते हुए आवश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू की।
यहां से पनीर, हल्दी और धनिया पाउडर के तीन नमूने लिए गए।
करीब 31 नमूने, रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
13 और 14 सितंबर को चलाए गए अभियान में अलग-अलग प्रतिष्ठानों से करीब 31 खाद्य नमूने लिए गए। इनमें मंदिर परिसर के प्रसाद से लेकर होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री तक शामिल है।
अब इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। यदि किसी नमूने में निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों से संबंधित गंभीर कमी सामने आती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, केवल निरीक्षण के दौरान मिली स्वच्छता संबंधी कमियों और प्रयोगशाला परीक्षण के परिणामों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी परिसर में सफाई की कमी मिलना और किसी खाद्य नमूने का प्रयोगशाला परीक्षण में असुरक्षित या मानक से बाहर पाया जाना दो अलग-अलग निष्कर्ष हैं।
खाद्य सुरक्षा के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह जांच?
त्योहारों के दौरान मिठाई, प्रसाद और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। ऐसे समय में खाद्य कारोबारियों पर बड़ी मात्रा में उत्पादन और बिक्री का दबाव रहता है।
इसी कारण खाद्य सुरक्षा जांच का महत्व और बढ़ जाता है। निर्माण स्थल की सफाई से लेकर कच्चे माल के भंडारण, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और तैयार खाद्य पदार्थों की सुरक्षित पैकिंग तक हर स्तर पर सावधानी जरूरी है।
विशेष रूप से प्रसाद जैसे खाद्य पदार्थ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तक पहुंचते हैं। इसलिए निर्माण और वितरण की प्रक्रिया में छोटी सी लापरवाही भी बड़े स्तर पर खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा कर सकती है।
सिर्फ नोटिस नहीं, सुधार की नियमित निगरानी भी जरूरी
इस अभियान से यह बात सामने आती है कि खाद्य सुरक्षा केवल त्योहारों के दौरान होने वाली जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन प्रतिष्ठानों में कमियां मिली हैं, वहां सुधार के बाद दोबारा निरीक्षण और नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण है।
खाद्य कारोबारियों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे निरीक्षण के बाद केवल तत्काल सफाई या दस्तावेज पूरे करने तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिससे रोजाना खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन हो।
इसके लिए प्रतिष्ठानों में नियमित रूप से:
- निर्माण क्षेत्र की सफाई,
- कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों का अलग भंडारण,
- उचित तापमान नियंत्रण,
- कीट नियंत्रण,
- कचरे का उचित निपटान,
- कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता,
- पानी की नियमित जांच और
- आवश्यक खाद्य लाइसेंस एवं रिकॉर्ड का उचित प्रदर्शन
सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
श्रद्धालुओं और उपभोक्ताओं के लिए भी संदेश
खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल प्रशासन या खाद्य कारोबारियों की नहीं है। उपभोक्ता भी प्रसाद और खाद्य सामग्री खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां बरत सकते हैं।
खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी पैकेजिंग, स्वच्छता और रखरखाव की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। यदि कोई खाद्य सामग्री खुले में अस्वच्छ तरीके से रखी है या निर्माण स्थल की स्थिति संदिग्ध दिखाई देती है, तो उपभोक्ता संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी दे सकते हैं।
त्योहार के दौरान अधिक मांग का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों में समझौता किया जाए।
आगे क्या होगा?
अब लिए गए खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार रहेगा। रिपोर्ट के आधार पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं निरीक्षण के दौरान सामने आई स्वच्छता और दस्तावेजों से जुड़ी कमियों को लेकर संबंधित प्रतिष्ठानों को सुधार के निर्देश और आवश्यक नोटिस की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
खजराना गणेश मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर प्रसाद की गुणवत्ता और निर्माण की स्वच्छता श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ी हुई है। इसलिए यहां नियमित निरीक्षण और मानकों के पालन की निगरानी विशेष महत्व रखती है।
गणेश चतुर्थी के बीच इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन का यह अभियान त्योहारों के दौरान खाद्य स्वच्छता की अहमियत को सामने लाता है। खजराना गणेश मंदिर परिसर में प्रसाद निर्माण केंद्रों पर गंदा फर्श, अव्यवस्थित कच्चा माल, लाइसेंस प्रदर्शन की कमी और लड्डू निर्माण क्षेत्र में चप्पल पहनकर कर्मचारियों के आने-जाने जैसी लापरवाहियां सामने आईं।
दूसरी ओर, होटल और रेस्टोरेंट में कॉकरोच, खुले डस्टबिन, खुले खाद्य पदार्थ, तापमान नियंत्रण और जरूरी दस्तावेजों से संबंधित कमियां भी मिलीं। करीब 31 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, इसलिए खाद्य गुणवत्ता की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश यही है कि त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई खाद्य मांग के बीच स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और खाद्य सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।