अच्छी बारिश से जल विद्युत उत्पादन को मिला बड़ा फायदा
(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में इस मानसून अच्छी बारिश का सीधा लाभ प्रदेश की जल विद्युत इकाइयों को मिला है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के जल विद्युत गृहों ने अगस्त माह में निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक बिजली का उत्पादन किया है। अगस्त में जल विद्युत इकाइयों के लिए 339 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन दर्ज किया गया।
इस तरह जल विद्युत गृहों ने अगस्त में निर्धारित लक्ष्य से करीब 42 मिलियन यूनिट अधिक बिजली पैदा की। उत्पादन में यह बढ़ोतरी मानसून के दौरान उपलब्ध पर्याप्त जल संसाधनों और जल विद्युत गृहों की समय पर की गई तकनीकी तैयारियों के बीच सामने आई है।
कंपनी के अनुसार जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता फैक्टर 83.40 प्रतिशत रहा। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त माह के अंत तक भी जल विद्युत उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से आगे चल रहा है।
अगस्त में 339 के लक्ष्य के मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट उत्पादन
MPPGCL के जल विद्युत गृहों के लिए अगस्त में 339 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन के बीच करीब 41.90 मिलियन यूनिट का अंतर रहा, जिसे लगभग 42 मिलियन यूनिट अतिरिक्त उत्पादन के तौर पर बताया गया है।
जल विद्युत उत्पादन सीधे तौर पर उपलब्ध जल संसाधनों से जुड़ा होता है। मानसून के दौरान बांधों और जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर जल विद्युत परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने का अवसर मिलता है। इस वर्ष अगस्त में प्रदेश में अच्छी बारिश होने से जल विद्युत इकाइयों को इसका फायदा मिला।
हालांकि उत्पादन केवल पानी की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करता। मशीनरी की स्थिति, टरबाइन और जनरेटर की उपलब्धता, तकनीकी अनुरक्षण तथा परिचालन प्रबंधन भी उत्पादन क्षमता के प्रभावी इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वित्तीय वर्ष में भी लक्ष्य से 20 मिलियन यूनिट आगे
सिर्फ अगस्त महीने में ही नहीं, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष में भी MPPGCL की जल विद्युत इकाइयां निर्धारित लक्ष्य से आगे चल रही हैं।
अगस्त माह के अंत तक कंपनी के जल विद्युत गृहों के लिए 963 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित था। इसके मुकाबले अब तक 983 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है।
इस प्रकार वित्तीय वर्ष में अगस्त तक जल विद्युत इकाइयां अपने निर्धारित लक्ष्य से 20 मिलियन यूनिट आगे निकल चुकी हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि मानसून के दौरान जल विद्युत संसाधनों का उपयोग अपेक्षाकृत बेहतर स्तर पर किया गया है। आगे के महीनों में उत्पादन का वास्तविक स्तर जल उपलब्धता, परियोजनाओं की तकनीकी स्थिति और संचालन संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रदेश में 10 जल विद्युत गृह, कुल क्षमता 915 मेगावाट
मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अंतर्गत प्रदेश में 10 जल विद्युत गृह संचालित हैं। इन सभी जल विद्युत गृहों की कुल स्थापित क्षमता 915 मेगावाट है।
स्थापित क्षमता किसी विद्युत परियोजना की अधिकतम निर्धारित उत्पादन क्षमता को दर्शाती है, लेकिन वास्तविक उत्पादन कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें जल की उपलब्धता, मशीनों की उपलब्धता, रखरखाव, ग्रिड की स्थिति और परियोजना का परिचालन शामिल हैं।
ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए जल विद्युत गृहों की मशीनरी को तैयार रखना महत्वपूर्ण होता है। कंपनी ने इसी उद्देश्य से इस वित्तीय वर्ष में संचालन रणनीति को ‘रेडीनेस फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर केंद्रित किया।
‘रेडीनेस फर्स्ट’ रणनीति से मिली मदद
कंपनी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में जल विद्युत गृहों के संचालन के लिए ‘रेडीनेस फर्स्ट’ रणनीति अपनाई गई। इसके तहत मानसून के दौरान उपलब्ध होने वाले जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मशीनरी और महत्वपूर्ण प्रणालियों की तैयारी पर पहले से ध्यान दिया गया।
रणनीति के तहत मशीनरी, टरबाइन, जनरेटर और सहायक प्रणालियों के आवश्यक अनुरक्षण तथा तकनीकी परीक्षण समय रहते पूरे किए गए।
जल विद्युत परियोजनाओं के लिए मानसून का समय विशेष महत्व रखता है। यदि पर्याप्त पानी उपलब्ध हो और उस समय मशीनरी तकनीकी कारणों से उपलब्ध न हो, तो संभावित उत्पादन का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए मानसून से पहले उपकरणों की तैयारी को प्राथमिकता देना उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कंपनी का कहना है कि समय पर किए गए अनुरक्षण और परीक्षणों ने मानसून के दौरान उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग में मदद की।
83.40 प्रतिशत रहा प्लांट उपलब्धता फैक्टर
अगस्त माह के अंत तक कंपनी की जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता फैक्टर 83.40 प्रतिशत रहा। यह मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 83.77 प्रतिशत वार्षिक मानक के करीब है।
प्लांट उपलब्धता फैक्टर किसी विद्युत उत्पादन इकाई की उस अवधि में उपलब्ध रहने की क्षमता को समझने का महत्वपूर्ण संकेतक है। जल विद्युत इकाइयों के मामले में इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जब पानी उपलब्ध हो, तब संयंत्र का तकनीकी रूप से तैयार रहना जरूरी होता है।
कंपनी के अनुसार बेहतर उपलब्धता ने जल विद्युत गृहों को उपलब्ध जल के अनुरूप अधिकतम क्षमता से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तकनीकी निगरानी पर लगातार जोर
जल विद्युत गृहों की मशीनरी में टरबाइन, जनरेटर और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियां शामिल होती हैं। इनके संचालन में किसी तरह की तकनीकी बाधा उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से कंपनी द्वारा मशीनरी और महत्वपूर्ण प्रणालियों की लगातार निगरानी की जा रही है। आवश्यक अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य उत्पादन के दौरान तकनीकी व्यवधान की संभावना को कम करना है।
यह रणनीति खासतौर पर मानसून के दौरान महत्वपूर्ण हो जाती है, जब जल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ती है और जल विद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।
समय पर अनुरक्षण से बढ़ी उत्पादन क्षमता का उपयोग
कंपनी के प्रदर्शन को केवल अधिक बारिश से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। पर्याप्त पानी जल विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है, लेकिन उपलब्ध पानी से बिजली पैदा करने के लिए संयंत्र का तकनीकी रूप से तैयार रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी संदर्भ में समय पर किए गए अनुरक्षण और तकनीकी परीक्षण महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यदि टरबाइन, जनरेटर या सहायक प्रणालियां बेहतर स्थिति में रहें, तो उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग किया जा सकता है।
MPPGCL की ओर से इसी तकनीकी अनुशासन और पूर्व तैयारी को उत्पादन प्रदर्शन से जोड़ा गया है।
डायरेक्टर टेक्निकल ने बताई उत्पादन रणनीति की अहमियत
कंपनी के डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में विश्वसनीयता केवल स्थापित क्षमता पर निर्भर नहीं करती। समय पर की गई तैयारी, तकनीकी दक्षता और परिचालन अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उनके अनुसार संभावित मौसमीय परिस्थितियों का पूर्व आकलन कर जल विद्युत गृहों को उच्च स्तर की निगरानी में संचालित किया गया। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव हुआ।
यह दृष्टिकोण जल विद्युत परियोजनाओं के संचालन में पूर्व तैयारी की भूमिका को सामने लाता है। खासकर मानसून के दौरान जब जल की उपलब्धता अचानक बढ़ सकती है, उस समय उत्पादन इकाइयों का तैयार रहना आवश्यक होता है।
मुख्य अभियंता ने कुशल जल उपयोग को बताया प्राथमिकता
जल विद्युत के मुख्य अभियंता राजेन्द्र पटेल ने बताया कि सभी जल विद्युत गृहों में प्राथमिकता उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम, कुशल और किफायती उपयोग सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि इकाइयों को उनकी तकनीकी क्षमता के अनुरूप उपलब्ध रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
इसका सीधा संबंध उत्पादन दक्षता से है। जल विद्युत परियोजनाओं में पानी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इसलिए उपलब्ध जल का योजनाबद्ध और कुशल उपयोग बिजली उत्पादन के साथ-साथ संसाधन प्रबंधन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
बिजली व्यवस्था के लिए जल विद्युत का महत्व
मध्यप्रदेश में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से बिजली का उत्पादन किया जाता है। इनमें जल विद्युत का अपना अलग महत्व है।
जल विद्युत परियोजनाएं उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल करके बिजली पैदा करती हैं। मानसून के दौरान जल की उपलब्धता बढ़ने पर इन परियोजनाओं से उत्पादन की संभावना भी बढ़ जाती है।
इस लिहाज से अगस्त में लक्ष्य से अधिक उत्पादन प्रदेश की विद्युत उत्पादन व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि पूरे वर्ष बिजली उत्पादन की स्थिति कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है।
आंकड़ों से समझें जल विद्युत उत्पादन की स्थिति
अगस्त और वित्तीय वर्ष के अंत तक सामने आए आंकड़ों को इस तरह समझा जा सकता है:
- प्रदेश में जल विद्युत गृह: 10
- कुल स्थापित क्षमता: 915 मेगावाट
- अगस्त का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य: 339 मिलियन यूनिट
- अगस्त में वास्तविक उत्पादन: 380.90 मिलियन यूनिट
- अगस्त में लक्ष्य से अतिरिक्त उत्पादन: करीब 42 मिलियन यूनिट
- अगस्त अंत तक वित्तीय वर्ष का लक्ष्य: 963 मिलियन यूनिट
- अगस्त अंत तक वास्तविक उत्पादन: 983 मिलियन यूनिट
- वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से बढ़त: 20 मिलियन यूनिट
- प्लांट उपलब्धता फैक्टर: 83.40 प्रतिशत
- वार्षिक नियामकीय मानक: 83.77 प्रतिशत
ये आंकड़े बताते हैं कि अगस्त के दौरान जल विद्युत उत्पादन ने निर्धारित लक्ष्य को स्पष्ट रूप से पार किया है।
अच्छी बारिश और तकनीकी तैयारी का संयुक्त असर
जल विद्युत उत्पादन में मानसून की भूमिका स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है। पर्याप्त बारिश से जलाशयों और संबंधित जल संसाधनों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है। इससे जल विद्युत गृहों के संचालन के लिए बेहतर परिस्थितियां बन सकती हैं।
लेकिन इस उपलब्धता का वास्तविक लाभ तभी उठाया जा सकता है जब उत्पादन इकाइयां तकनीकी रूप से तैयार हों। MPPGCL ने इसी वजह से मानसून से पहले मशीनरी के अनुरक्षण और परीक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही है।
इस तरह अगस्त का बेहतर उत्पादन अच्छी जल उपलब्धता और समय पर तकनीकी तैयारी दोनों के संयुक्त प्रभाव के रूप में देखा जा सकता है।
भविष्य में उत्पादन के लिए जल उपलब्धता अहम
आने वाले समय में जल विद्युत उत्पादन का स्तर कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इनमें जलाशयों में उपलब्ध पानी, मानसून की स्थिति, मशीनरी की उपलब्धता और बिजली की मांग प्रमुख कारक होंगे।
यदि जल संसाधन पर्याप्त बने रहते हैं और जल विद्युत गृह तकनीकी रूप से उपलब्ध रहते हैं, तो उत्पादन को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
वहीं लंबे समय में जल विद्युत परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए मशीनरी का नियमित अनुरक्षण, तकनीकी निगरानी और संसाधनों का किफायती उपयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
ऊर्जा क्षेत्र में विश्वसनीयता पर बढ़ता जोर
बिजली उत्पादन के क्षेत्र में केवल स्थापित क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता। उपलब्ध क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल और संयंत्रों की विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
इसी वजह से जल विद्युत इकाइयों में तकनीकी अनुरक्षण, परीक्षण और निरंतर निगरानी को महत्व दिया जा रहा है। ‘रेडीनेस फर्स्ट’ जैसी रणनीति का उद्देश्य भी यही है कि जब उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हों, तब मशीनरी उत्पादन के लिए तैयार रहे।
अगस्त में लक्ष्य से अधिक उत्पादन के आंकड़े इस रणनीति के सकारात्मक परिणाम के तौर पर देखे जा सकते हैं।
मध्यप्रदेश में अच्छी मानसूनी बारिश ने जल विद्युत उत्पादन को मजबूती दी है। MPPGCL के 10 जल विद्युत गृहों ने अगस्त में 339 मिलियन यूनिट के लक्ष्य के मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। इस तरह अगस्त में करीब 42 मिलियन यूनिट अतिरिक्त उत्पादन दर्ज किया गया।
चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त के अंत तक भी कंपनी का उत्पादन 983 मिलियन यूनिट रहा, जबकि लक्ष्य 963 मिलियन यूनिट था। यानी वित्तीय वर्ष के स्तर पर भी उत्पादन 20 मिलियन यूनिट आगे है।
83.40 प्रतिशत का प्लांट उपलब्धता फैक्टर और 83.77 प्रतिशत के वार्षिक मानक के बीच मामूली अंतर भी जल विद्युत इकाइयों की उपलब्धता की स्थिति को दर्शाता है। कंपनी द्वारा समय पर अनुरक्षण, तकनीकी परीक्षण और लगातार निगरानी को उत्पादन प्रदर्शन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में बताया गया है।
आने वाले समय में जल उपलब्धता और तकनीकी तैयारियों का बेहतर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि जल विद्युत गृह अपनी तकनीकी क्षमता के अनुरूप उपलब्ध रहते हैं और उपलब्ध जल संसाधनों का कुशल उपयोग जारी रहता है, तो प्रदेश की बिजली उत्पादन व्यवस्था में जल विद्युत की भूमिका और मजबूत हो सकती है।