मातृ नवमी श्राद्ध 2025 : जानिए तिथि, महत्व और तर्पण विधि

पितर पक्ष की नवमी तिथि जिसे मातृ नवमी कहा जाता है, दिवंगत माताओं एवं उन महिलाओं के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन पितरों को तर्पण और पिंडदान कर उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा की जाती है। साल 2025 में मातृ नवमी का श्राद्ध 15 सितंबर को किया जाएगा।

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पितर पक्ष में मातृ नवमी का महत्व

हिंदू धर्म में पितर पक्ष का अत्यंत महत्व है। इस पखवाड़े में पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है क्योंकि इस दिन दिवंगत माताओं और महिलाओं के श्राद्ध का विशेष विधान है।

पितर पक्ष अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी देवाधिदेव महादेव ब्रम्हाण्ड के राजा भगवान शिव एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी, मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, ओम नमः शिवाय, जय श्री कृष्ण, जय श्री राम, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।

कब किया जाएगा माताओं का श्राद्ध?

साल 2025 में पितर पक्ष की नवमी तिथि सोमवार, 15सितंबर 2025 को पड़ेगी।

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:51 से 12:41 तक

रौहिण मुहूर्त: 12:41 से 1:30 तक

अपराह्न काल: 1:30 से 3:58 तक

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नवमी श्राद्ध के नियम और विधि

इस दिन घर के मुख्य द्वार पर पितरों का आह्वान किया जाता है। पहले कौए, कुत्ते और गाय को भोजन अर्पित करें। उसके बाद कुश, तिल, जल और पुष्प से तर्पण करें।

तर्पण प्रक्रिया: तीन बार तिल और जल से तर्पण करना अनिवार्य माना गया है।

पिंडदान: चावल, तिल और जौ से बने पिंड पितरों को अर्पित करें।

दान: ब्राह्मण को वस्त्र, अन्न, फल और दक्षिणा दें।

कौन कर सकता है मातृ नवमी का श्राद्ध?

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध का अधिकार पुत्र, पौत्र, भतीजे और भांजे को है। मातृ नवमी पर विशेष रूप से दिवंगत माताओं, बहनों और बेटियों का श्राद्ध किया जाता है।

मातृ नवमी का धार्मिक और पारिवारिक महत्व

इस दिन किया गया श्राद्ध दिवंगत महिलाओं की आत्मा को शांति प्रदान करता है।

यह दिन उन माताओं के लिए भी विशेष माना जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो।

श्राद्ध से कुल और वंश की उन्नति होती है।

पितरों की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

माताओं के श्राद्ध के दौरान क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

खीर, पूरी, दाल और सब्जी का भोजन बनाकर पहले पितरों को अर्पित करें।

सुहागिन महिलाओं और वृद्धाओं को दान दें।

क्या न करें:

क्रोध और अपशब्दों से बचें।

मांस-मदिरा का सेवन न करें।

श्राद्ध कर्म के दिन विवाद या झगड़ा न करें।

✅ निष्कर्ष

पितर पक्ष की नवमी तिथि, जिसे मातृ नवमी कहा जाता है, दिवंगत माताओं और महिलाओं को स्मरण करने का दिन है। इस दिन किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। साल 2025 में मातृ नवमी का श्राद्ध 15 सितंबर को होगा। धर्मशास्त्रों में इसका अत्यधिक महत्व बताया गया है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इस दिन श्रद्धा और भक्ति से मातृ नवमी का श्राद्ध करना चाहिए। हरि ओम,

पितर पक्ष अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी देवाधिदेव महादेव ब्रम्हाण्ड के राजा भगवान शिव एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी, मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, ओम नमः शिवाय, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, जय श्री राम, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।

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(साई फीचर्स)