काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ और उसके बाद मची तबाही में मृतकों की संख्या बढ़कर 794 हो गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। सेना, सुरक्षाबल और स्थानीय बचाव दल प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना बनी हुई है। त्रिशूली-3A समेत कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत अभियान में भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं।
नेपाल में 794 मौतें, हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने लापता लोगों की तलाश तेज कर दी है।
लापता लोगों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी अधिक होने की आशंका है। कई क्षेत्रों में तेज बहाव, भारी मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव अभियान बेहद मुश्किल बना हुआ है।
रेस्क्यू टीमें उन स्थानों पर विशेष ध्यान दे रही हैं, जहां बाढ़ के दौरान लोगों के सुरंगों के अंदर फंसने की आशंका है।
त्रिशूली-3A सुरंग में फंसे लोगों की तलाश
हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित निकालना बचाव दलों की प्राथमिकता बन गया है। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर साइट पर भी सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गई।
भारत और चीन से पहुंचे विशेषज्ञों ने भी राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग किया है। हालांकि, अब तक सुरंग के भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने की बात सामने आई है। इससे वहां फंसे लोगों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बचाव दल पानी और मलबे के बीच रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सुरंग के अंदर पहुंचकर वहां की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
तिब्बत में भी फ्लैश फ्लड का असर
नेपाल के अलावा पड़ोसी तिब्बत में भी बाढ़ से भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
खराब मौसम और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वहां भी राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी और जमा मलबा रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है।
त्रिशूली नदी में फिर बाढ़, सस्पेंशन ब्रिज बहा
नेपाल में बाढ़ का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। त्रिशूली नदी में दोबारा आई बाढ़ के कारण मध्य नेपाल में एक सस्पेंशन ब्रिज तेज बहाव में बह गया।
यह पुल गोरखा जिले के गांदकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी हाईवे के किनारे स्थित चरौदी से जोड़ता था।
जानकारी के मुताबिक, करीब तीन घंटे तक नदी में तेज बहाव रहा। इसी दौरान सुबह लगभग 11:30 बजे पुल बाढ़ की चपेट में आ गया और बह गया।
वैकल्पिक मार्ग भी हुआ बंद
घ्यालचोक-चरौदी पुल के बह जाने से गांदकी ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड 7 और 8 के लोगों का पृथ्वी हाईवे से सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है।
इससे पहले 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड में काठमांडू से कुछ दूरी पर स्थित धवाडीघाट का पुल भी बह गया था। इसके बाद स्थानीय लोग घ्यालचोक-चरौदी पुल को वैकल्पिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे।
अब यह पुल भी बह जाने से स्थानीय लोगों की आवाजाही के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
तेज बहाव और मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल में बदलती परिस्थितियों के बीच बचाव दलों के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। नदियों का तेज बहाव, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और पुलों के टूटने से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
इसके बावजूद नेपाली सेना, सुरक्षाबल और स्थानीय प्रशासन लापता लोगों की तलाश में अभियान चला रहे हैं। सुरंगों में संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों और विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है।
आठ जिलों में शवों की तलाश जारी
बाढ़ से प्रभावित सभी आठ जिलों में शव बरामद होने की सूचना है। राहत और बचाव दल उन इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रहे हैं, जहां बाढ़ के साथ बड़ी मात्रा में मलबा जमा हुआ है।
लापता लोगों की संख्या अधिक होने के कारण प्रशासन के सामने उनकी तलाश, पहचान और परिजनों तक सूचना पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव संभव है।
भारत और चीन के विशेषज्ञ भी कर रहे मदद
नेपाल के राहत अभियान में भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। खास तौर पर हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे संभावित लोगों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञों की मदद अहम मानी जा रही है।
रेस्क्यू टीमें सुरंगों के भीतर संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, अब तक संपर्क स्थापित नहीं होने के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल में 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड ने व्यापक तबाही मचाई है। मृतकों की संख्या 794 तक पहुंच गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी है। इसी बीच त्रिशूली नदी में दोबारा आई बाढ़ ने एक सस्पेंशन ब्रिज बहा दिया, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों का पृथ्वी हाईवे से संपर्क प्रभावित हुआ है। नेपाल के साथ तिब्बत में भी राहत और बचाव अभियान जारी है।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं.
अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.
