केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अतिरिक्त प्रभार पर नहीं मिलेगी दूसरी सरकारी कार, स्टाफ कारों के उपयोग पर जारी हुए नए निर्देश

सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया

(विनीत खरे)

नई दिल्ली (साई)।सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने 27 मई 2026 को एक ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) जारी कर केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में स्टाफ कारों के उपयोग से संबंधित अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं।

इस आदेश का उद्देश्य सरकारी वाहनों के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाना, एक ही अधिकारी के पास एक से अधिक सरकारी वाहनों की व्यवस्था को रोकना तथा सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर नियंत्रण स्थापित करना है। यह आदेश सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों तथा संबंधित कार्यालयों के लिए जारी किया गया है।

क्या है नया आदेश?

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि कोई अधिकारी अपने नियमित पद के लिए पहले से अधिकृत सरकारी कार का उपयोग कर रहा है और उसे किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, अधीनस्थ कार्यालय, स्वायत्त निकाय या सार्वजनिक उपक्रम (PSU) का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है, तो उसे उस अतिरिक्त प्रभार के लिए अलग से दूसरी सरकारी कार उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे सरकारी वाहनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा और अतिरिक्त वाहन आवंटन की आवश्यकता कम होगी।

आदेश का मुख्य उद्देश्य

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था निम्न उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है—

  • सरकारी वाहनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना।
  • सरकारी संसाधनों के अनावश्यक उपयोग को रोकना।
  • सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर नियंत्रण स्थापित करना।
  • प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना।
  • सार्वजनिक धन की बचत करना।

आदेश में क्या-क्या कहा गया है?

ऑफिस मेमोरेंडम में कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं—

  1. अतिरिक्त प्रभार पर दूसरी सरकारी कार नहीं

यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है तो उसके लिए अलग सरकारी कार उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। अधिकारी अपनी नियमित पद के लिए आवंटित सरकारी कार का ही उपयोग करेगा।

  1. अनुपयोगी वाहन सुरक्षित रखे जाएंगे

ऐसे वाहन जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं है या जिनका उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें विभाग द्वारा सुरक्षित अभिरक्षा (Safe Custody) में रखा जाएगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी वाहन बिना आवश्यकता के किसी अधिकारी के पास न रहें।

  1. पीएसयू या स्वायत्त संस्थाओं की कारें नहीं रख सकेंगे

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय सरकारी अधिकारी अपने पास सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) या अर्ध-सरकारी संगठनों (Quasi Government Organizations) की स्टाफ कारें अपने स्थायी उपयोग के लिए नहीं रख सकेंगे।

हालांकि, यदि अधिकारी आधिकारिक दौरे (Official Tour) पर हैं तो आवश्यकतानुसार ऐसी व्यवस्था की जा सकती है।

2022के दिशा-निर्देशों की अगली कड़ी

वित्त मंत्रालय ने बताया है कि यह आदेश 1 सितंबर 2022 को जारी स्टाफ कार उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों का विस्तार है।

सरकार का उद्देश्य पहले से लागू नियमों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा उनके अनुपालन को सुनिश्चित करना है।

क्या इसका मतलबएक अफसर,एक सरकारी कारहै?

व्यावहारिक रूप से इस आदेश का यही संदेश निकलता है कि एक अधिकारी, जिसे पहले से सरकारी कार मिली हुई है, उसे अतिरिक्त पदभार मिलने पर दूसरी सरकारी कार नहीं मिलेगी।

हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि आदेश में “One Officer One Official Car” शब्दावली का औपचारिक उपयोग नहीं किया गया है। यह अवधारणा आदेश के प्रावधानों से निकलती है।

क्या सभी केंद्रीय अधिकारियों पर लागू होगा नियम?

यह आदेश केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के लिए जारी किया गया है।

इसका पालन उन सभी संबंधित कार्यालयों द्वारा किया जाएगा जहां स्टाफ कार की व्यवस्था उपलब्ध है।

क्या राज्य सरकारों पर भी लागू होगा?

यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

उत्तर है—नहीं,यह आदेश स्वतः राज्य सरकारों पर लागू नहीं होता।

भारत के संघीय ढांचे में राज्य सरकारें अपने प्रशासनिक मामलों और सरकारी वाहन संबंधी नियम स्वयं तय करती हैं।

यदि कोई राज्य सरकार इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करना चाहती है तो उसे अपने स्तर पर अलग आदेश या अधिसूचना जारी करनी होगी।

यानी फिलहाल यह आदेश केवल केंद्र सरकार के दायरे में लागू माना जाएगा।

प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

बेहतर संसाधन प्रबंधन

एक अधिकारी के पास अनेक सरकारी वाहनों की व्यवस्था समाप्त होने से वाहन जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

सरकारी खर्च में कमी

कम वाहनों के उपयोग से ईंधन, रखरखाव और चालक संबंधी खर्चों में कमी आने की संभावना है।

जवाबदेही बढ़ेगी

सरकारी वाहन केवल अधिकृत आवश्यकता के अनुसार आवंटित होंगे तो उनके उपयोग की निगरानी आसान होगी।

वाहन उपलब्धता में सुधार

कई विभागों में वाहन उपलब्धता की समस्या बनी रहती है। अतिरिक्त वाहनों के वापस आने से अन्य अधिकारियों एवं कार्यालयों को वाहन उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

क्या आदेश में जुर्माने का प्रावधान है?

इस ऑफिस मेमोरेंडम में किसी प्रकार के अलग वित्तीय जुर्माने, वेतन से कटौती, कमर्शियल रेट पर किराया वसूली, जीपीएस ट्रैकिंग, डिजिटल लॉगबुक या एपीएआर में प्रविष्टि जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख नहीं किया गया है।

इसलिए इन प्रावधानों को इस आदेश का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

हालांकि, सरकारी सेवा नियमों के तहत यदि किसी अधिकारी द्वारा सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया जाता है तो संबंधित विभाग अपने लागू सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

हालांकि यह आदेश सीधे आम नागरिकों से संबंधित नहीं है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव सरकारी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

यदि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है तो सरकारी खर्च में कमी आएगी और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

सरकारी कार्यालयों में संसाधनों के कुशल प्रबंधन की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि सरकारी वाहनों का वैज्ञानिक और आवश्यकता आधारित आवंटन सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग की दिशा में आवश्यक कदम है।

उनके अनुसार यदि सभी मंत्रालय इस आदेश का प्रभावी पालन करते हैं तो वाहन प्रबंधन अधिक पारदर्शी बन सकता है और संसाधनों की उपलब्धता में सुधार हो सकता है।

भविष्य में क्या हो सकता है?

यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है तो भविष्य में सरकारी वाहन प्रबंधन को और अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में अन्य सुधार भी किए जा सकते हैं। हालांकि वर्तमान आदेश में ऐसे किसी अतिरिक्त प्रावधान का उल्लेख नहीं किया गया है।

इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी इस मॉडल का अध्ययन कर अपने प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप समान व्यवस्था लागू करने पर विचार कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए अलग सरकारी आदेश आवश्यक होगा।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी नया ऑफिस मेमोरेंडम सरकारी वाहनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल माना जा रहा है। आदेश का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार मिलने पर उसके लिए अलग सरकारी कार आवंटित न की जाए और सरकारी वाहनों का उपयोग आवश्यकता एवं नियमों के अनुरूप हो।

यह व्यवस्था सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग, सार्वजनिक धन की बचत तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि फिलहाल यह आदेश केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों पर लागू है तथा राज्य सरकारों के लिए इसे अपनाना उनकी अपनी प्रशासनिक नीतियों और निर्णयों पर निर्भर करेगा।