(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। भोपाल में गैस सिलेंडर बुकिंग को लेकर उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन लोगों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई, उनकी बुकिंग कैंसिल की जा रही है। गैस एजेंसियों का कहना है कि यह आदेश खुद गैस कंपनियों से आया है। कंपनियों ने यह निर्देश लिखित में नहीं बल्कि मौखिक रूप से दिया है। इसी वजह से उपभोक्ताओं को साफ जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। जानकारी के अनुसार सिर्फ 5 दिन के भीतर भोपाल में एक लाख 35 हजार उपभोक्ताओं की सिलेंडर डिलीवरी रोकी जा चुकी है। यह शहर के कुल उपभोक्ताओं का करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा है।
गैस सिलेंडर बुकिंग रद्द: क्या है वजह
भोपाल में गैस सिलेंडर बुकिंग को लेकर उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन लोगों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई, उनकी बुकिंग कैंसिल की जा रही है।
गैस एजेंसियों का कहना है कि यह आदेश खुद गैस कंपनियों से आया है। कंपनियों ने यह निर्देश लिखित में नहीं बल्कि मौखिक रूप से दिया है।
ई-केवाईसी क्या है और क्यों जरूरी है
ई-केवाईसी यानी उपभोक्ता की पहचान का डिजिटल सत्यापन। इसका मकसद फर्जी कनेक्शन और सब्सिडी के गलत इस्तेमाल को रोकना है।
सरकार और गैस कंपनियां लंबे समय से इसे अनिवार्य बताती आई हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।
गैस सिलेंडर बुकिंग रद्द: क्या हैं आंकड़े
जानकारी के अनुसार सिर्फ 5 दिन के भीतर भोपाल में एक लाख 35 हजार उपभोक्ताओं की सिलेंडर डिलीवरी रोकी जा चुकी है। यह शहर के कुल उपभोक्ताओं का करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा है।
- एक लाख 35 हजार उपभोक्ताओं की सिलेंडर डिलीवरी रोकी जा चुकी है।
- यह शहर के कुल उपभोक्ताओं का करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा है।
- गैस एजेंसियों का कहना है कि यह आदेश खुद गैस कंपनियों से आया है।
गैस सिलेंडर बुकिंग रद्द: क्या है समाधान
फिलहाल सबसे जरूरी है कि उपभोक्ता जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी पूरी कराएं। इसके लिए नजदीकी गैस एजेंसी पर आधार कार्ड और बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा।
उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुकिंग के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा वे गैस एजेंसी के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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