क्या डॉ.श्रीवास्तव से वसूला जायेगा पीनल रेंट!

 

चार सालों से रह रहे बिना किराया दिये आईपीपी 06 में!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। प्रभारी सिविल सर्जन रहे डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के सेवानिवृत्त होने के बाद भी विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। सालों बाद ओपीडी में बैठकर मरीज देखने की बात सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब सरकारी रेस्ट हाऊस में कितने दिन रहेंगे, इस बारे में चर्चाएं तेज हो गयी हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में लगभग चार सालों से अधिक समय से पदस्थ रहे डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव पहले प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे। बाद में उन्हें सीएमएचओ पद से हटाया जाकर उनके स्थान पर डॉ.के.सी. मेश्राम को सीएमएचओ बनाया गया था।

सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में इकलौता आवास ईयर मार्क है वह भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के लिये। भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के बाजू में बना सरकारी आवास अस्सी के दशक तक सिविल सर्जन के लिये ईयर मार्क हुआ करता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पद जबसे सृजित हुआ उसके बाद से इस भवन को सीएस की बजाय सीमएचओ के लिये ईयर मार्क कर दिया गया था।

सूत्रों ने बताया कि पूर्व सांसद और पूर्व विधायक रहीं श्रीमति नीता पटेरिया के पति डॉ.एच.पी. पटेरिया जब प्रभारी सीएमएचओ बने थे तब उन्होंने इस आवास में रहना आरंभ किया था। उनके बाद लखनादौन विधायक रहीं श्रीमति शशि ठाकुर के पति डॉ.वाय.एस. ठाकुर के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बनने के बाद भी डॉ.पटेरिया के द्वारा इस आवास को रिक्त नहीं किया गया।

डॉ.ठाकुर के तबादले के बाद दो तीन सीएमएचओ बदल गये पर किसी का भी साहस इस ईयर मार्क आवास को रिक्त करवाने का नहीं हुआ। डॉ.ठाकुर के द्वारा भी मजबूरी में पुराने चिकित्सालय में एक भवन को ठीक करवाकर उसे सीएमएचओ का अस्थायी आवास बना लिया गया था। इसके बाद जितने भी सीएमएचओ सिवनी में पदस्थ रहे सभी पुराने अस्पताल वाले आवास में ही रहते रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि जब डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के द्वारा प्रभारी सीएमएचओ का प्रभार लिया गया उसके बाद उनके द्वारा पुराने अस्पताल के जर्जर आवास में रहने की बजाय जिला चिकित्सालय परिसर में बने प्रशिक्षण केंद्र के विश्राम गृह के प्रथम तल को अपना आशियाना बना लिया गया था।

सूत्रों ने आगे बताया कि चूंकि वे स्वास्थ्य विभाग के जिला प्रमुख थे अतः किसी ने उनका विरोध नहीं किया। हालात यहाँ तक बने कि इस विश्राम गृह में प्रशिक्षण के लिये आने वालीं महिला कर्मचारियों को डॉ.श्रीवास्तव के वहाँ निवास करने से भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता था।

सूत्रों की मानें तो डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के द्वारा बिना कोई दाम चुकाये हुए ही इस रेस्ट हाऊस की बिजली, पानी, गैस यहाँ तक कि टीवी, फ्रिज आदि का भी जमकर उपयोग किया गया। उसके बाद भी किसी का इतना साहस नहीं था कि वे अपने ही विभाग के अधिकारी के खिलाफ कुछ कह पायें।

सूत्रों ने कहा कि सेवा निवृत्ति या स्थानांतरण के उपरांत सरकारी कर्मचारी को सरकारी आवास छः माह तक रखने की पात्रता होती है। उसके बाद अगर उस अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा इसका उपयोग किया जाता है तो उससे बाजार दर पर किराया वसूल किया जाता है।

सूत्रों ने आगे कहा कि डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव पहले ही गलत तरीके से विश्राम गृह में रहते आये हैं। नियमानुसार उनसे इस भवन का बाजार दर पर किराया वसूला जाना चाहिये। इसके अलावा अब जबकि वे सेवा निवृत्त हो चुके हैं तो वे किस अधिकार से इस भवन का उपयोग कर रहे हैं! देखा जाये तो सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम को डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव से वसूली की कार्यवाही की जाना चाहिये!

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