आखिर छोटा क्यों पड़ रहा है बस स्टैण्ड!

 

 

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ठोस कार्ययोजना बनायी जाये तो हो सकता है समस्या का निदान

(लिमटी खरे)

सिवनी (साई)। शहर में जब भी अतिक्रमण या यातायात जाम की बात सामने आती है वैसे ही शहर के दशकों पुराने यात्री बस स्टैण्ड को शहर से बाहर करने की माँग भी उभरकर सामने आती दिखती है। यात्री बस स्टैण्ड को शहर से बाहर करना इस समस्या का हल शायद नहीं है।

शहर के अंदर कितनी यात्री बस प्रवेश कर रहीं हैं! इनमें से कितनी यात्री बस के पास परिवहन विभाग के द्वारा दिया गया स्टेट कैरिज का परमिट है! कितनी बस बिना अनुज्ञा के ही मनमाने तरीके से शहर के अंदर आकर सवारियां भर और उतार रहीं हैं! इसकी जानकारी शायद परिवहन विभाग के पास भी नहीं होगी।

देखा जाये तो यातायात पुलिस और परिवहन विभाग का यह दायित्व है कि वे इस बात को देखें कि शहर के अंदर प्रवेश करने वाली यात्री बस जो शहर में सवारियां भर और उतार रहीं हैं उनके पास स्टैट कैरिज की अनुज्ञा है अथवा नहीं! अगर बिना अनुज्ञा के ही इनके द्वारा इस काम को अंजाम दिया जा रहा है और दोनों ही विभाग मौन हैं तो . . .!

जिला मुख्यलय के सरकारी बस स्टैण्ड का रकबा साढ़े तीन एकड़ से ज्यादा का है। कमोबेश इतना ही रकबा प्राईवेट बस स्टैण्ड का है। इन दोनों ही यात्री बस स्टैण्ड में कितनी यात्री बस वैध हैं और कितनी अवैध रूप से प्रवेश कर रहीं हैं, इस ओर अगर ध्यान दे दिया जाये तो आधी समस्या का निराकरण हो सकता है।

सालों से एक ही बात सामने आती रही है कि सांसद, विधायकों और अब तक पदस्थ रहे जिलाधिकारियों के द्वारा यात्री बस स्टैण्ड का समय – समय पर निरीक्षण किया जाकर बस स्टैण्ड को व्यवस्थित करने के निर्देश तो दिये जाते रहे हैं, पर बस स्टैण्ड सदा ही अव्यवस्थित रहता आया है जिससे यही प्रतीत हो रहा है कि प्रयास सही दिशा में नहीं किये जाते रहे हैं।

सरकारी बस स्टैण्ड में पर्याप्त स्थान होने के बाद भी ठोस कार्ययोजना के अभाव के चलते बस स्टैण्ड के अंदर यात्री बस की रेलम पेल नजर आती है। कभी ऑटो के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती रही है तो कभी रिक्शॉ स्टैण्ड और रेहड़ी वालों को यहाँ से हकाल दिया जाता रहा है।

सरकारी बस स्टैण्ड में स्थित वर्कशॉप वाले हिस्से का उपयोग सालों से नहीं किया जा रहा है। इस हिस्से का उपयोग जबलपुर की ओर जाने वाले वाहनों को मोड़ने के लिये अवश्य ही हो रहा है, जबकि इस हिस्से में ही अगर यात्री बस खड़ी होना आरंभ करवा दी जायें तो बस स्टैण्ड के मुहाने पर दिखने वाली यात्री बस की भीड़ को कम किया जा सकता है।

कुल मिलाकर इच्छा शक्ति के अभाव के चलते ही शहर का वह बस स्टैण्ड जो प्रदेश के बेहतरीन यात्री बस स्टैण्ड में शुमार हो सकता है, सालों से अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाने पर मजबूर है। सियासी दलों के द्वारा भी दिलचस्पी न लिये जाने से यहाँ यातायात जाम की स्थिति से निपटने का एकमात्र उपाय लोगों को यही सूझता है कि यात्री बस स्टैण्ड को शहर से बाहर ले जाया जाये, जो इस समस्या का हल किसी भी दृष्टिकोण से नहीं माना जा सकता है।

(क्रमशः जारी)

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