यातायात प्रभारी को नहीं संपत्ति की परवाह

 

जहाँ तहाँ बिखरे पड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे स्टॉपर!

(अपराध ब्यूरो)

सिवनी (साई)। यातायात पुलिस के स्वामित्व में कितने स्टॉपर, बैरीकेट्स, कैमरे, ब्रीथ एनेलाईज़र, हेल्मेट आदि हैं, यह बात शायद ही यातायात प्रभारी को पता हो। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण जिला मुख्यालय और आसपास बेतरतीब बिखरे और कबाड़ में तब्दील होते स्टॉपर को ही माना जा सकता है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिले में यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है। यातायात पुलिस के द्वारा सालों से चौक – चौराहों पर खड़े होकर हाथ दिखाते हुए सीटी बजाकर यातायात नियंत्रित करना, मानो इतिहास की बात बन चुका हो। वर्तमान में चौक – चौराहों (सर्किट हाऊस चौराहे को छोड़कर) पर यातायात पुलिस के सिपाही सिर्फ उस समय मुस्तैद नजर आते हैं जब पुलिस अधीक्षक का वाहन वे दूर से देख लेते हैं।

सूत्रों का कहना है कि यातायात पुलिस के द्वारा विभिन्न मार्ग से आने वाले वाहनों की चौथ (एंट्री) वसूलने हेतु अलग – अलग स्थान निर्धारित किये गये हैं। इनमें से नागपुर मार्ग से आने वाली मेक्सी कैब की एंट्री छिंदवाड़ा चौराहे पर एक चाय वाली बाई के पास तो अन्य बड़े वाहनों की किसी और के पास जमा होती हैं।

सूत्रों ने कहा कि यातायात पुलिस के किसी भी आरक्षक के मोबाईल पर फोन करने से यह आसानी से पता चल जाता है कि किस मार्ग की एंट्री किसके पास जमा होती है। शहर के अंदर से होकर गुजरते कहर बरपाने वाले डंपर्स का शुल्क भी पृथक से निर्धारित किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि यातायात पुलिस के पास स्टाक में कितनी सामग्री है और मौके पर कहाँ – कहाँ कितनी सामग्री है, इस बारे में शायद ही यातायात पुलिस के प्रभारी जानते हों। सूत्रों ने कहा कि जिसका जब जहाँ मन होता है यातायात पुलिस के स्टॉपर खींचकर ले जाये जाते हैं।

सूत्रों की मानें तो जिला मुख्यालय और आसपास अनेक स्टॉपर नाले नालियों में आड़े – तिरछे पड़े दिख जायेंगे। इनमें से कुछ स्टॉपर्स को तो टीन टप्पर बीनने वालों के द्वारा ठिकाने लगाया जा चुका है, जिसके अवशेष भी नहीं मिल पायेंगे। वहीं, कुछ प्रतिष्ठान वालों के द्वारा तो स्टॉपर्स पर रंग रोगन कर इन्हें निजि मिल्कियत भी बना लिया गया है।

 

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