अदभुत नजारा होगा कुरई घाट का

 

 

वाहनों का शोर नहीं डाल पायेगा वन्यजीवों की निजता में खलल

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। आने वाले दिनों में कुरई घाट का नजारा इतना अद्भुत होगा कि देश विदेश के सैलानियों के लिये यह आकर्षण का केंद्र बन जायेगा। दरअसल, लगभग दस सालों से अटके कुरई घाट में फोरलेन के निर्माण हेतु वन विभाग के सुझाव पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के द्वारा जिस तरह की सड़क का निर्माण कराया जा रहा है वह अपने आप में अद्वितीय ही होगा।

एनएचएआई के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में लंबे समय से अटके फोरलेन के निर्माण को लेकर छिंदवाड़ा के सांसद और मुख्यमंत्री कमल नाथ के द्वारा एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देश दिये गये थे कि इसका काम जल्द से जल्द आरंभ कराया जाये।

सूत्रों ने आगे बताया कि कमल नाथ के द्वारा एनएचएआई के साथ ही साथ वन विभाग के आला अधिकारियों को भी यह निर्देश दिये गये थे कि वे कुरई घाट को इस तरह का बनायें कि यह अपने आप में अद्वितीय हो। उनकी मंशा के अनुरूप ही वन विभाग और एनएचएआई के अधिकारियों के द्वारा इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि मोहगाँव से खवासा के बीच लगभग 29 किलोमीटर के हिस्से में सड़क निर्माण का काम लंबे अरसे से रूका हुआ था। इसमें से लगभग आठ किलोमीटर लंबे कुरई घाट में सड़क निर्माण करना टेड़ी खीर इसलिये भी था क्योंकि सड़क के एक ओर ऊँचा पहाड़ तो दूसरी ओर गहरी खाई है।

इधर, वन विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सड़क के जिस हिस्से का काम रूका हुआ है उस हिस्से में पेंच नेशनल पार्क का भाग आता है और यहाँ से वन्य जीवों की आवाजाही सतत जारी रहती है। यह वन विभाग के सामने चुनौति से कम नहीं था कि सड़क का निर्माण भी हो जाये और वन्य जीवों की आवाजाही या उनकी निजता या स्वच्छंदता भी इससे प्रभावित न हो।

सूत्रों ने बताया कि छिंदवाड़ा के सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री कमल नाथ की मंशा के अनुसार वन विभाग और एनएचएआई के अधिकारियों के द्वारा मिलकर कई विकल्पों पर चर्चा के उपरांत जिस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया है उसमें कुरई घाट सहित शेष 29 किलोमीटर के हिस्से में फोरलेन प्रस्तावित है।

सूत्रों ने बताया कि इसके लिये एनएचएआई एवं वन विभाग को खासी मशक्कत करना पड़ा था। इसके लिये उन स्थानों को चिन्हित किया गया जहाँ से वन्य जीवों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है। लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबे हिस्से में एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर वन्य जीवों की आवाजाही के लिये प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जायेगा।

सूत्रों ने बताया कि वन विभाग के द्वारा दिये गये प्रस्ताव के अनुसार सड़क के निर्माणाधीन हिस्से को इस तरह तैयार किया जाये कि वन्य जीवों को वाहनों के शोरगुल और रात के वक्त हेड लाईट की रोशनी से किसी भी तरह की परेशानी का अनुभव न हो एवं वन्य जीव उन स्थानों को सहजता के साथ पार कर सकें।

 

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