पिछली बार रायशुमारी में भी हुआ था विरोध

 

विरोध के बाद भी नरेश दिवाकर को मिल गयी थी टिकिट पर . . .

(पॉलिटिकल ब्यूरो)

सिवनी (साई)। बुधवार को जिला भाजपा कार्यालय में जिले की चारों विधान सभाओं के लिये हुई रायशुमारी में जिस तरह के वाक्यात हुए उसे कार्यकर्त्ता विरोध की संज्ञा दे रहे हैं, पर इसी बीच कार्यकर्त्ताओं में यह चर्चा भी चल रही है कि पिछले विधान सभा चुनाव के पहले हुई रायशुमारी में नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर का जमकर विरोध होने के बाद भी नरेश दिवाकर टिकिट लाने में कामयाब तो हो गये थे पर उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था।

भाजपा कार्यालय में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार भाजपा कार्यालय में हुई राय शुमारी में भाजपा मूल का मुद्दा जिस तेजी से उभरा है उसके बाद भाजपा में अब टिकिट देने के पहले आला नेताओं को विचार अवश्य करना होगा। अगर भाजपा के आला नेताओं के द्वारा इस बार भी स्थानीय नेताओं और कार्यकर्त्ताओं की उपेक्षा करते हुए मनमाने तरीके से टिकिट बांटा गया तो उसका परिणाम पिछले विधान सभा चुनावों की तरह भोगना भी पड़ सकता है।

भाजपा के एक नेता ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि 2013 में चुनावों के पहले भाजपा के कार्यकर्त्ताओं के बीच हुई रायशुमारी के वक्त भाजपा के कार्यकर्त्ताओं ने स्पष्ट तौर पर यह कहा था कि श्रीमति नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर के अलावा किसी को भी टिकिट दे दी जाये तो कार्यकर्त्ता प्रण प्राण से जुट जायेंगे।

उक्त नेता ने कहा कि भाजपा आलाकमान ने पिछले चुनावों में कार्यकर्त्ताओं के विरोध को कमतर आँकते हुए नरेश दिवाकर को सिवनी विधान सभा से प्रत्याशी बनाया था। वर्ष 1990 तक सिवनी विधान सभा को काँग्रेस का अभेद्य दुर्ग माना जाता था, पर 1990 के विधान सभा चुनावों में भाजपा के स्व.महेश प्रसाद शुक्ला को 30995 मत मिले थे जबकि काँग्रेस के स्व.हरवंश सिंह 24869 मत लेकर पराजित हो गये थे।

1990 के बाद सिवनी में काँग्रेस की वापसी नहीं हो पायी। 1993 में हुए चुनावों में भाजपा के स्व.महेश प्रसाद शुक्ला को 32840 मत मिले और काँग्रेस के आशुतोष वर्मा को 28421 मत मिले थे। इस बार भी यह सीट भाजपा के खाते में ही गयी थी।

1998 के विधान सभा चुनावों में भाजपा की ओर से नरेश दिवाकर को मैदान में उतारा गया, वहीं काँग्रेस के द्वारा पिछली बार पराजित आशुतोष वर्मा पर ही दांव लगाया गया। इन चुनावों में नरेश दिवाकर को 32085 एवं आशुतोष वर्मा को 25570 मत मिले थे।

2003 में हुए विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा नरेश दिवाकर पर एक बार फिर भरोसा जताकर उन्हें मैदान में उतारा गया। इन चुनावों में भाजपा के नरेश दिवाकर को 53312 मत मिले तो काँग्रेस के राज कुमार खुराना को 37958 मत मिले थे।

2008 के चुनावों में भाजपा के द्वारा परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोक सभा की अंतिम सांसद श्रीमति नीता पटेरिया पर दांव लगाया गया। श्रीमति नीता पटेरिया ने इन चुनावों में 41928 मत हासिल किये तो निर्दलीय दिनेश राय को 29444 मत से ही संतोष करना पड़ा था। इन चुनावों में काँग्रेस के प्रसन्न चंद्र मालू को महज 17232 मत ही मिले और काँग्रेस अपनी जमानत भी नहीं बचा पायी थी।

2013 के विधान सभा चुनावों में भाजपा के द्वारा कार्यकर्त्ताओं की भारी नाराजगी को नजर अंदाज करते हुए श्रीमति नीता पटेरिया के स्थान पर दो बार के विधायक रहे नरेश दिवाकर को मैदान में उतारा गया। इस चुनाव में भाजपा को कार्यकर्त्ताओं की नाराजगी शायद भारी पड़ी और निर्दलीय दिनेश राय ने 65402 मत हासिल किये वहीं, दो बार के विधायक रहे नरेश दिवाकर को 44486 मत लेकर ही संतोष करना पड़ा था।

कार्यकर्त्ताओं के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार इस बार कार्यकर्त्ताओं के बीच भाजपा मूल का मुद्दा ठीक उसी तरह जोर पकड़ रहा है जिस तरह 2013 में श्रीमति नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर को टिकिट नहीं देने की माँग हो रही थी। अब अगर कार्यकर्त्ताओं की नाराजगी को इस बार भी पार्टी के द्वारा नजर अंदाज करते हुए पैराशूट से उतरने वाले नेता को टिकिट दी जाती है तो . . .!

 

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *