सरकारी बस स्टैण्ड में है पर्याप्त स्थान

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अगर कर दिया जाये व्यवस्थित तो बन सकती है बात

(लिमटी खरे)

सिवनी (साई)। पता नहीं क्यों जिले में पदस्थ रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा सिवनी शहर के सरकारी और प्राईवेट बस स्टैण्ड को पूरी मंशा के साथ व्यवस्थित करने पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया। शहर के दोनों बस स्टैण्ड को अगर व्यवस्थित कर दिया जाये तो बस स्टैण्ड को शहर से बाहर ले जाने की माँग भी उठना बंद ही हो जायेगी।

मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद हो जाने के बाद से नागरिकों को यह पता नहीं चल पता है कि जिस यात्री बस में वे बैठे हैं वह वैध बस है अथवा अवैध। जो यात्री बस नागपुर में सरकारी बस स्टैण्ड के आसपास फटकती भी नजर नहीं आती हैं वे सिवनी के सरकारी बस स्टैण्ड में ठसक के साथ सवारी भरती और उतारती नजर आती हैं।

सिवनी के यात्री बस स्टैण्ड को अगर व्यवस्थित करने की मंशा अधिकारियों के साथ ही चुने हुए सांसद, विधायक एवं अन्य प्रतिनिधियों की है तो निश्चित तौर पर इसके लिये उनके द्वारा ईमानदारी से दोनों ही बस स्टैण्ड को व्यवस्थित करने की दिशा में पहल की जानी चाहिये थी, किन्तु अब तक सभी ने अपने – अपने हिसाब से बस स्टैण्ड में निर्माण और व्यवस्थाएं करवायी हैं।

लोगों का कहना है कि सिवनी के नागरिकों के लिये यात्री बस स्टैण्ड को सुव्यवस्थित किया जाता रहा है पर सिवनी के नागरिकों से प्रशासन या जन प्रतिनिधियों के द्वारा यह पूछने की जहमत कभी भी नहीं उठायी गयी है कि सिवनी के यात्री बस स्टैण्ड को किस तरह से सुव्यवस्थित किया जा सकता है।

सरकारी बस स्टैण्ड में इतना स्थान मौजूद है कि अगर उसे करीने से बना दिया जाये तो पूरा बस स्टैण्ड ही खाली खाली नजर आने लगेगा। वर्तमान में संचालित होने वाला बस स्टैण्ड सड़क परिवहन निगम की तर्ज पर संचालित हो रहा है, किन्तु जब सरकारी बसें चला करती थीं, उस समय डिपो की कर्मशाला के लिये रिक्त पड़े स्थान और शेड का उपयोग अब नहंीं किया जा रहा है। यह स्थान खाली पड़ा है और इस स्थान पर अतिक्रमण करने वालों की नजरें भी दिख रही हैं।

सड़क परिवहन निगम की यात्री बस जब संचालित होती थीं, उस समय वर्तमान बस स्टैण्ड के पश्चिमी हिस्से में डिपो का वर्कशॉप, पेट्रोल पंप तथा भण्डार गृह बनाया गया था। यहाँ इतनी रिक्त भूमि है कि सारा का सारा बस स्टैण्ड इस स्थान से ही संचालित किया जा सकता है।

जिसका जहाँ मन आया वैसा निर्माण करा दिया और जिसका मन आया वहाँ तोड़ दिया गया की तर्ज पर मुख्य बस स्टैण्ड के दो प्रवेश द्वारों के बीच की दीवार नेस्तनाबूत कर दी गयी। इस दीवार की एक ओर रिक्शॉ स्टैण्ड संचालित होता था। 2013 के पूर्व ही इस दीवार को ढहा दिया गया। अब यात्री बस स्टैण्ड में एक ही प्रवेश और निकासी द्वारा है।

बस स्टैण्ड है तो जाहिर है रिक्शॉ ऑटो स्टैण्ड भी संचालित होगा। सालों से जिला प्रशासन और नगर पालिका के द्वारा संयुक्त रूप से यात्री बस स्टैण्ड को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है किन्तु अब तक इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। और तो और बस स्टैण्ड में रिक्शॉ या ऑटो स्टैण्ड के लिये चिन्हित स्थल और शेड न होने से भी मनमाने तरीके से ऑटो और रिक्शे यहाँ खड़े हो रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

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