शराबखोरी काँग्रेस की संस्कृति

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शराबखोरी, गुण्डागर्दी और रिश्वतखोरी काँग्रेस की संस्कृति रही है। पिछले 15 वर्षों से प्रदेश की सत्ता से बाहर रहे काँग्रेसियों के कण्ठ शराब की प्यास में इतने सूख गये हैं कि अब सत्ता में आते ही वे खुलेआम अपने साथियों के कण्ठ तर करने के लिये शराब के स्टाल लगा रहे हैं। इसका प्रमाणिक नजारा गत दिवस काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित सभा के दौरान देखने को मिला।

उक्ताशय के आरोप लगाते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष प्रेम तिवारी द्वारा कहा गया कि, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि काँग्रेस युवा पीढ़ी को शिक्षा, संस्कार और रोजगार की जगह शराब परोस रही है। अभी तक तो काँग्रेस सत्ता हासिल करने के लिये मतदाताओं को शराब बांट कर उन्हें प्रलोभित करते रही है, लेकिन अब अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में भीड़ जुटाने के लिये अपने ही कार्यकर्त्ताओं को खुलेआम शराब परोसकर सभा में शामिल होने के लिये प्रेरित कर रही है।

श्री तिवारी ने कहा कि राहुल गाँधी की सभा में भीड़ जुटाने के लिये काँग्रेसियों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। कार्यकर्त्ताओं पर किस तरह दबाव डाला गया इसका प्रमाण भोपाल के स्थानीय विधायक आरिफ अकील का वह वायरल वीडियो है जिसमें वे कार्यकर्त्ताओं को भीड़ जुटाने के लिये धमकाते हुए दिख रहे हैं। यह शराबखोरी भी भीड़ जुटाने के लिये दिये गये प्रलोभन का एक हिस्सा है।

श्री तिवारी ने कहा कि यह भी दुःखद है कि इस शराब खोरी के जो समाचार और वीडियो प्रकाशित हुए हैं उससे जुड़े हुए स्थान पर सिवनी जिले के काँग्रेसियों का बैनर लगा हुआ पाया गया है। क्योंकि सिवनी जिला काँग्रेस के मुख्यमंत्री कमल नाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा का पड़ोसी जिला है अतः कमल नाथ के निर्देश पर सिवनी जिले से भी भीड़ जुटाने का दबाव काँग्रेस संगठन पर था तथा इसके लिये हर प्रकार की चंदा वसूली और खाने – पीने की मनमानी की छूट मिली हुई थी। इसी का परिणाम शराब खोरी के रूप में देखने को मिला है।

श्री तिवारी ने कहा कि राहुल गाँधी एक असफल नेता साबित हुए हैं। उनके भाषण और सभाओं में आम जन तो क्या काँग्रेस के कार्यकर्त्ता भी शामिल होने से परहेज करते हैं। भोपाल के जंबूरी मैदान में काँग्रेस ने एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया गया था किंतु सत्तासीन काँग्रेस की ओर से भीड़ जुटाने के लिये झोंके गये सरकारी और अनैतिक साधनों के बावजूद राहुल गाँधी की सभा में 15 हजार से भी कम लोग इकट्ठे हो पाये। अब यह साबित हो गया है कि लोग शराब पीकर भी राहुल गाँधी का भाषण नहीं सुनना चाहते हैं।

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